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कारगिल युद्ध: पति कारगिल युद्ध में शहीद ,बेटे को भी फौजी देखना चाहती हैं यह मां
Sat, 24 Jul 2021 08:19 PM IST
करिश्मा चिब
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जम्मू
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जम्मू
Published by: करिश्मा चिब
Updated Sat, 24 Jul 2021 08:19 PM IST
सार
बच्चों के सिर पर पिता का साया न होने पर परिवार के लोगों को दिक्कतों का सामना करना पड़ा है।
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कारगिल युद्ध
- फोटो : twitter
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विस्तार
सिपाही देवेंद्र सिंह शादी के दो माह बाद शहीद हो गए थे। गांव कोटली शाहदौला के देवेंद्र सिंह की पत्नी बलजीत कौर अब उस दिन का इंतजार कर रही है, जब बेटा युद्धवीर सिंह सेना की वर्दी पहने। बलजीत कौर कहती हैं कि शादी के दो माह बाद ही पति कारगिल में शहीद हो गए थे।
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वे पूरी तरह से टूट गई थीं, लेकिन बेटे को इस तमन्ना के साथ पाल रही हैं कि वो भी एक दिन सेना में जाकर देश का नाम रोशन करे। युद्धवीर ने इसी वर्ष 12वीं कक्षा पास की है। पति की यादें साथ हैं। उन्हें खोने का गम जरूर है लेकिन देश के लिए कुर्बानी का गर्व भी है। देवेंद्र के बेटे युद्धवीर सिंह का कहना है कि सेना में भर्ती होने का सपना बचपन से है।
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बच्चों के पिता का साया न होने पर करना पड़ा दिक्कतों का सामना
16 ग्रेनेडियर के नायक देवराज ने छह जुलाई को कारगिल युद्ध में बलिदान दिया था। उनकी पत्नी निर्मला देवी ने कहा कि जिस समय कारगिल संघर्ष हुआ था, उस समय बच्चे छोटे थे। बच्चों के सिर पर पिता का साया न होने पर परिवार के लोगों को दिक्कतों का सामना करना पड़ा है।
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मन में तब बच्चों के बेहतर भविष्य बनाने की जिम्मेदारी होने पर बच्चों को शिक्षा दिलाने के बाद दो बेटियों की शादियां की। बेटे अमित की बाद में शादी की। उन्होंने कहा कि आज वह हमारे मध्य नहीं हैं, लेकिन उनकी बदौलत ही आज वह अपना जीवन-यापन कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि उनकी कमी को पूरा नहीं किया जा सकता, लेकिन उन्होंने देश की खातिर अपना बलिदान दिया, जिस पर नाज है।
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हौसलों से जीती थी जंग आज हम और भी बेहतर
परमवीर चक्र विजेता कैप्टन सरदार बाना सिंह ने कहा कि वर्ष 1999 में जिस प्रकार 18 हजार फुट की ऊंचाई पर सेना ने दुश्मन का सफाया कर तिरंगा फहराया, वह इतिहास में दर्ज सबसे हैरतअंगेज जीत है। कारगिल युद्ध में बहादुर सैनिकों ने अपने हौसलों से दुश्मन को चौंका दिया।
आज हमारी सेना कारगिल एलओसी पर ही नहीं, पूरे लद्दाख में बढ़त के साथ तैनात है। कैप्टन बाना सिंह ने कहा कि कारगिल की पहाड़ियों में लगभग दो माह चला संघर्ष बेहद चुनौतीपूर्ण था। उस युद्ध से सीख लेते हुए हमने अपनी तैयारी को कई गुना विस्तार दिया है।