कारगिल गाथा: बमबारी के बीच एविएशन कॉर्प्स ने भरीं 2500 उड़ानें
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अचानक छिड़े युद्ध की चुनौती का सामना करना जितना मुश्किल था, भारतीय सेना का जवाबी हमला पाकिस्तान के लिए उससे कहीं अधिक चौंकाने वाला था। सेना के अलग-अलग विंग दिन-रात एक योजनाबद्ध जवाबी हमले को सटीक रणनीति पर अमल में जुट गए।
इसी में शामिल भारतीय सेना की एविएशन कॉर्प्स ने जवाबी हमले को ऐसी तेजी दी कि दुशमन के लिए ऊंचाई वाले मोर्चों पर टिकना भी मुश्किल हो गया। कारगिल युद्ध के छोटे-बड़े मिशन को अंजाम देने के लिए एविएशन कॉर्प्स के हेलीकाप्टरों ने कुल 2500 उड़ानें भरीं।
हेलीकाप्टरों के माध्यम से 240 सैनिक टुकड़ियों और 200 टन वजन की सामग्री को विभिन्न लोकेशन के लिए लिफ्ट किया गया। इसमें सबसे खास बात यह रही कि एयरलिफ्ट कर लाने और ले जाने में लगे हेलीकाप्टरों ने पुरानी लोकेशनों के साथ-साथ नई लोकेशनों पर भी जोखिम उठाया। सभी 2500 उड़ानें दुश्मन निगरानी तंत्र से होकर गुजरीं।
दुश्मन की बमबारी के बीच हेलीकाप्टर की उड़ानें जारी रहीं। युद्ध के विभिन्न मोर्चों से एविएटर्स ने 900 घायल जवानों को रेस्क्यू किया। कुल 900 घायलों में से 734 घायलों को तो अकेले चीता हेलीकाप्टर के माध्यम से रेस्क्यू किया गया।
जोखिम से भरे इस चुनौतीपूर्ण मिशन में आर्मी एविएशन कॉर्प्स की सेवाओं को दो वीर चक्र, एक युद्ध सेवा मेडल, दो सेना मेडल (वीरता) और एक सेना मेडल (असाधारण सेवा प्रदर्शन) का सम्मान दिया गया।