कारगिल गाथा: सटीक रणनीति से तबाह किया दुश्मन का आयुध भंडार
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
पाकिस्तानी सेना तो लौटने को मजबूर हो गई। लेकिन, घुसपैठियों ने दोनों मुल्कों के बीच हुए समझौते की नाफरमानी जारी रखी। नतीजतन पाकिस्तानी सेना के साथ मिलकर महत्वपूर्ण सामरिक मोर्चों पर बने बंकर और आयुद्ध भंडारों पर अब भी घुसपैठिए जमे हुए थे।
भारतीय सेना की टुकड़ियों को आगे बढ़ता देख वे ऊंचाई वाली पोस्ट से गोले दागने लगते। 15 जुलाई 1999 को घातक प्लाटून को चोरबटला सेक्टर में प्वाइंट 5310 को वापस हासिल करने की जिम्मा दिया गया। दुश्मन की संख्या कम होने के बावजूद ऊंचाई वाले इस मोर्चे को वापस हासिल करना बेहद मुश्किल था।
लेफ्टिनेंट प्रवीण कुमार के नेतृत्व में घातक प्लाटून इस बेहद मुश्किल मोर्चे को हासिल करने में जुट गई। प्वाइंट 5310 के लिए घातक प्लाटून ने तीन टुकड़ियों की रणनीति से काम लिया। लेफ्टिनेंट प्रवीण कुमार ने 300 मीटर ऊंची बर्फ की दीवार पर चढ़ने के लिए 250 मीटर ऊंचाई पर रस्सी लगाने का कारनामा कर दिखाया। इसके बाद रस्सी के सहारे ये दल ऊपर तक पहुंचने में कामयाब हो गया।
लेफ्टिनेंट प्रवीण कुमार जवानों की जान गंवाए बिना मार गिराए 15 घुसपैठिए
दूसरी टुकड़ी भी पीछे-पीछे अपने लक्ष्य बिंदु तक पहुंच गई। तीसरी टुकड़ी चूंकि ऊपर चढ़ने में नाकाम रही लिहाजा उसे आधार स्थल की ओर डायवर्ट कर दिया गया। दुश्मन के मोर्चे पर पहुंचकर टीम ने अचानक हमला बोल दिया। प्रवीण कुमार द्वारा बनाई गई रणनीति से 15 दुश्मनाें को ढेर कर दिया गया।
प्वाइंट 5310 पर बने ईंधन और आयुध भंडार को तबाह कर दिया गया। बेहद जटिल और चुनौतीपूर्ण लक्ष्य को हासिल करने में प्रवीण कुमार के युद्ध कौशल को इसलिए भी खास माना गया क्योंकि भारतीय सेना ने बिना किसी जवान की जान गंवाए ही आपरेशन को अंजाम तक पहुंचाया। लेफ्टिनेंट प्रवीण कुमार को वीर चक्र का सम्मान दिया गया।