कारगिल गाथा: कारगिल के उत्तरी छोर से भी हट गई पाक सेना
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
लाइन आफ कंट्रोल का लांघकर कारगिल की पर्वतीय चोटियाें को कब्जाने वाली पाक सेना को मुंह की खानी पड़ी थी। जुलाई के दूसरे सप्ताह के अंत तक पाकिस्तानी सेना को न सिर्फ खुद एलओसी पार लौटना पड़ा, बल्कि घुसपैठियों को वापस बुलाने पर मजबूर होना पड़ा।
बारह जुलाई को काओबाली गली के पश्चिमी हिस्से को भारतीय सेना ने अपने कब्जे में लेने की प्रक्रिया तेजी से अंजाम दी। काओबाली गली ठीक कारगिल सेक्टर की तरह घुसपैठ के लिहाज से संवेदनशील था।
8 जाट को पूरे इलाके में अपना नियंत्रण हासिल करने की जिम्मेदारी दी गई। जोश से भरे गश्ती दलों ने इलाके को खंगाल मारा। घंटाें लगातार की कार्रवाई में दुरूह इलाके पर भारतीय सेना की मौजूदगी ने पाकिस्तानी सेना को कारगिल के उत्तरी छोर वाली एलओसी से लौटने को मजबूर कर दिया।
भारतीय सेना का पूरी तरह से कब्जा
उधर बारह जुलाई के दिन ही द्रास सेक्टर में बोफोर्स तोप लेकर आ रही टीम पर मोर्टार हमला हुआ। इसमें जवान सरतूल सिंह शहीद हो गए। ये हमला घुसपैठियाें ने किया था जिनके खिलाफ जबरदस्त जवाबी कार्रवाई करते हुए इलाके को खाली करवा लिया गया।
कारगिल सेक्टर के अधिकांश इलाकाें पर अब भारतीय सेना का पूरी तरह से कब्जा हो चुका था। इस बीच सैन्य कार्रवाई को युद्ध समाप्ति से पूर्व की औपचारिक दबिश के रूप में देखा जा रहा था।