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फारूक से उपराष्ट्रपति बनाने का वादा कर मुकर गए थे वाजपेयी

Fri, 03 Jul 2015 12:51 PM IST
Updated Fri, 03 Jul 2015 12:51 PM IST
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former raw chief as dulat reveals about farooq abdullah and mufti mohammad sayeed in his book

रॉ के पूर्व प्रमुख रहे एएस दुलत ने पूर्व मुख्यमंत्री फारूक अब्दुल्ला और मुख्यमंत्री मुफ्ती मोहम्मद सईद से जुड़े कई अहम खुलासे किए हैं। किताब में दुलत लिखते हैं कि, वाजपेयी चाहते थे कि फारूक अब्दुल्ला केंद्र में उपराष्ट्रपति के पद पर काम करें जबकि जेएंडके की कमान उमर अब्दुल्ला को दी जाए।

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लेकिन बाद में वाजपेयी अपनी बात से मुकर गए। वहीं फारूक को भी इस बात का इल्म था कि दिल्ली उन पर कभी भरोसा नहीं करेगी। आगे दुलत ने एक और चौंकाने वाला खुलासा किया है। वह लिखते हैं कि, तत्कालीन मुख्यमंत्री फारूक अब्दुल्ला ने हिजबुल मुजाहिद्दीन के प्रमुख के बेटे को कश्मीर के एक कॉलेज में दाखिला दिलवाने की सिफारिश की थी।

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मुफ्ती गृहमंत्री बने तब हुआ रूबिया का अपहरण

former raw chief as dulat reveals about farooq abdullah and mufti mohammad sayeed in his book

इसके अलावा दुलत ने अपनी किताब में दावा किया है कि, 1989 में आतंकी मुख्यमंत्री मुफ्ती मोहम्मद सईद की बेटी रूबिया का अपहरण करने के लिए नहीं आए थे। दुलत के अनुसार, आतंकियों का निशाना फारूक अब्दुल्ला की बेटी साफिया थीं लेकिन तभी सईद केंद्र में गृहमंत्री बन गए तो आतंकियों रणनीति बदलते हुए रूबिया का अपहरण कर लिया।

रॉ चीफ ने किताब में लिखा है कि, पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी नहीं चाहते थे कि मुफ्ती मोहम्मद सईद को जेएंडके का मुख्यमंत्री बनाया जाए क्योंकि उन्हें शक था सईद के रिश्ते आतंकी संगठन हिजबुल के साथ हैं। मुफ्ती के बारे में वह आगे लिखते हैं कि, मुफ्ती को ब्लैक लेबल व्हिस्की बहुत पसंद है।

रॉ चीफ पर चीखे थे फारूक

former raw chief as dulat reveals about farooq abdullah and mufti mohammad sayeed in his book

दुलत के अनुसार जब 1999 में 24 दिंसबर को कुछ आतंकी विमान का अपहरण करके उसे कंधार ले गए और यात्रियों को छोड़ने के बदले तीन खुंखार आतंकियों को रिहा करने की मांग रखी तो तत्कालीन मुख्यमंत्री इसके खिलाफ थे और रॉ चीफ पर ‌चीखने लगे और घंटों तक यहीं कहते रहे, ये हमारी बहुत बड़ी गलती है।

अब्दुल्ला नहीं चाहते थे कि इन खुंखार आतंकियों को रिहा किया जाए। जब केंद्र ने आतंकियों को रिहा करने की सहमति दी तो इस पर अब्दुल्ला अपना इस्तीफा तक देने को तैयार हो गए थे। दुलत के अनुसार, जब अब्दुल्ला इस्तीफा देने के लिए राज्यपाल गिरीश चंद्र के पास गए तो उन्होंने अब्दुल्ला को किसी तरह शांत कराया।

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