{"_id":"5fd0b1850acef47c1623745e","slug":"justice-rajesh-bindal-becomes-acting-chief-justice-of-jammu-and-kashmir-high-court","type":"story","status":"publish","title_hn":"जस्टिस राजेश बिंदल बने जम्मू-कश्मीर हाईकोर्ट के कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
जस्टिस राजेश बिंदल बने जम्मू-कश्मीर हाईकोर्ट के कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश
Wed, 09 Dec 2020 04:44 PM IST
प्रशांत कुमार
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जम्मू
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जम्मू
Published by: प्रशांत कुमार
Updated Wed, 09 Dec 2020 04:44 PM IST
विज्ञापन
हाईकोर्ट
- फोटो : अमर उजाला
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
जम्मू-कश्मीर हाईकोर्ट की मुख्य न्यायाधीश गीता मित्तल की बुधवार को प्रस्तावित सेवानिवृत्ति के साथ ही जस्टिस राजेश बिंदल को कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश नियुक्त किया गया है। राष्ट्रपति ने जम्मू-कश्मीर और लद्दाख हाईकोर्ट के वर्तमान जस्टिस राजेश बिंदल की कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश के तौर पर नियुक्ति का आदेश मंगलवार को कर दिया। इस पद पर जस्टिस बिंदल की सेवाएं 9 दिसंबर 2020 से प्रभावी होंगी। यह आदेश कानून व न्याय मंत्रालय, भारत सरकार के संयुक्त सचिव राजेंद्र कश्यप की ओर से जारी किया गया है।
विज्ञापन
जस्टिर बिंदल ने पंजाब और हरियाणा में 80 हजार मामलों का किया निस्तारण
जम्मू-कश्मीर हाईकोर्ट के कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश बनने वाले जस्टिस राजेश बिंदल का जन्म 16 अप्रैल 1961 को हरियाणा के अंबाला शहर में हुआ। कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय से 1985 में एलएलबी करने के बाद वह सितंबर 1985 में पंजाब और हरियाणा उच्च न्यायालय में अपना करियर शुरू किया।
विज्ञापन
उन्होंने 2004 से एक दशक से ज्यादा समय तक केंद्रीय प्रशासनिक न्यायाधिकरण के समक्ष चंडीगढ़ प्रशासन का प्रतिनिधित्व किया। उन्होंने पंजाब और हरियाणा में लगभग 80 हजार मामलों का निस्तारण किया। जस्टिस बिंदल उच्च न्यायालय के समक्ष कर्मचारी भविष्य निधि संगठन के मामले में पंजाब और हरियाणा क्षेत्रों का प्रतिनिधित्व करने के साथ 1992 में केंद्रीय प्रशासनिक न्यायाधिकरण में शामिल हुए। उन्होंने सतलुज-यमुना जल से संबंधित विवाद के निपटारे में पंजाब राज्य के साथ एराडी ट्रिब्यूनल के समक्ष और सर्वोच्च न्यायालय में हरियाणा का पक्ष रखा।
विज्ञापन
हाईकोर्ट में उच्च न्यायालय के समक्ष आयकर विभाग हरियाणा का प्रतिनिधित्व किया। उन्हें 22 मार्च 2006 को पंजाब और हरियाणा के उच्च न्यायालय के न्यायाधीश के रूप में पदोन्नत किया गया। वह मुख्य न्यायाधीशों के सम्मेलन, 2016 में इलेक्ट्रानिक साक्ष्य के लिए मसौदा नियम तैयार करने के लिए गठित समिति के अध्यक्ष रहे। अंतरराष्ट्रीय बाल अपहरण विधेयक 2016 के नागरिक पहलुओं का अध्ययन करने के लिए उन्होंने सिफारिशों और मसौदे के साथ रिपोर्ट प्रस्तुत की। उन्होंने पंजाब और हरियाणा में लगभग 80 हजार मामलों का निस्तारण किया।
जम्मू-कश्मीर के उच्च न्यायालय आने से पहले वह कंप्यूटर समिति, एरियर्स समिति सहित अन्य कई समितियों का नेतृत्व कर रहे थे। प्रदेश में उन्होंने 19 नवंबर 2018 को पद की शपथ ली थी। वर्तमान में वह उच्च न्यायालय में वित्त समिति, भवन और अवसंरचना समिति, सूचना प्रौद्योगिकी समिति, राज्य न्यायालय प्रबंधन प्रणाली समिति के साथ जम्मू-कश्मीर राज्य कानूनी सेवा प्राधिकरण के अध्यक्ष भी हैं।