मुख्यधारा के कुछ राजनेता अलगाववादियों से अधिक नुकसानदेह: जितेंद्र सिंह
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पीएमओ में केंद्रीय राज्य मंत्री डा. जितेंद्र सिंह ने नेशनल कांफ्रेंस के अध्यक्ष एवं सांसद डा. फारूक अब्दुल्ला का नाम लिए बिना कहा कि मुख्यधारा के कुछ राजनीतिज्ञ अलगाववादियों से ज्यादा नुकसानदायक है।
कारगिल दिवस के संबंध में नई दिल्ली में आयोजित सेमिनार में डा. जितेंद्र सिंह ने कहा कि तथाकथित मुख्यधारा के राजनीतिज्ञ अपने मौकापरस्त एजेंडे को आगे बढ़ाने के लिए अलगाववादियों की तरह बर्ताव करते हैं। इससे वह कश्मीर में अलगाववादियों से भी ज्यादा नुकसान पहुंचाते हैं। उन्होंने कहा कि तथाकथित मुख्यधारा के राजनीतिज्ञों ने विभिन्न मौकों पर अलग अलग भाषा बोलने की कला विकसित की हुई है। वह सत्ता में आने पर देश के लिए कुछ भी कर गुजरने की शपथ लेते हैं और सत्ता से बाहर होने पर कश्मीर के दर्जे पर सवाल उठाना शुरू कर देते है।
यहीं लोग फिर सत्ता में लौटने पर कश्मीर को भारत का अभिन्न अंग बताने लगे हैं। उन्होंने कहा कि समय आ गया हैं कि ऐसे कश्मीर केंद्रित नेताओं का पर्दाफाश किया जाएगा और उनके नकलीपन से पर्दा उठाया जाए।
उन्होंने कहा कि जम्मू कश्मीर में मौजूदा समय 35 से 40 वर्ष की आयु के युवाओं की संख्या सबसे ज्यादा है। युवा वर्ग को सोचना होगा कि जो लोग उन्हें बंदूक उठाने को उकसाते हैं, वह पहले अपने बच्चों को बंदूक थमाएं। ऐसे ही जिन राजनीतिज्ञ को कश्मीर के भारत का हिस्सा होने पर भ्रम है, उन्हें सांसद, विधायक आदि के रूप में इस्तीफा देना चाहिए।
उन्होंने कहा कि पाकिस्तान शुरू से ही धोखेबाज पड़ोसी के रूप में रहा है। वह जम्मू कश्मीर को भारत का हिस्सा कभी नहीं मानेगा। जबकि भारत के लिए केवल एक ही मसला है वह है पाक अधिकृत जम्मू कश्मीर को वापस लेना जो कि पाकिस्तान की तरफ से अवैध रूप से कब्जे में रखा गया है।
पाक अधिकृत कश्मीर को वापस लेने के बाद ही महाराजा हरि सिंह की तरफ से विलय किए गए जम्मू कश्मीर को भारत का हिस्सा बनाया जा सकता है। उन्होंने सुरक्षा बलों की सराहना करते हुए कहा कि जिस तरह का जवाब पाकिस्तान को सीमा पर हिमाकत का अब दिया जा रहा है। वैसे पहले कभी नहीं दिया गया।