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कश्मीर के सियासी दल अलगाववादियों का करते हैं इस्तेमाल : जितेंद्र

Wed, 15 Feb 2017 01:00 PM IST
ब्यूरो,अमर उजाला/जम्मू
ब्यूरो,अमर उजाला/जम्मू Updated Wed, 15 Feb 2017 01:00 PM IST
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jitendra singh speaks about sepratists
JITENDRA SINGH - फोटो : file photo

प्रधानमंत्री कार्यालय में राज्य मंत्री डा. जितेंद्र सिंह ने कहा है कि अलगाववादी का समूह किसी सैद्धांतिक प्रतिबद्धता के कारण नहीं, बल्कि सुविधाओं के लिए अलगाववादी बने हैं। कश्मीर में अलगाववाद एक सियासी संस्कृति बन गई है।

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कश्मीर में मुख्यधारा के राजनीतिक दलों ने भी एक कला विकसित कर ली है, जिसके तहत वे अपनी सुविधा के अनुसार अलगाववादी और सेमी अलगाववादी समूहों का सियासी फायदे के लिए इस्तेमाल करते हैं। पीएमओ राज्य मंत्री ने कश्मीर पर एक विमर्श के दौरान दिल्ली में कहा कि कश्मीर के दो पूर्व मुख्यमंत्री ऐसे हैं जो जब सत्ता में थे तब कश्मीर को भारत का अभिन्न अंग बताते थे।
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सत्ता से बाहर होने के बाद अब वे कश्मीर को विवाद का मुद्दा बताने लगे हैं। सत्ता से बाहर होते ही उन्हें नया ज्ञान प्राप्त हो गया है। अधिकांश कथित अलगाववादी नेता भारतीय संविधान द्वारा मिलने वाली हर सुविधाओं और पैकेज का उपभोग करते हैं, लेकिन सार्वजनिक रूप से कहते हैं कि उनका संविधान में विश्वास नहीं है। समय आ गया है जब कश्मीर के युवकों को यह तय करना होगा कि वे विकास की मुख्यधारा में पीछे नहीं छूट जाएं।

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'पीओके में रहने वाले लोगों की हालत दयनीय'

jitendra singh speaks about sepratists
JITENDRA SINGH - फोटो : file photo

कश्मीर में युवाओं का आबादी कुल आबादी का लगभग 60 प्रतिशत है। डा. सिंह ने कहा कि देश के सभी राज्यों के युवा अपने सपनों को सच करने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में आगे बढ़ रहे हैं। कश्मीर के युवाओं को यह समझना होगा कि दशकों से अलगाववाद के नारों से उन्हें गुमराह किया जाता रहा है।

यह सब निहित सियासी स्वार्थवश किया गया है। पीओके में रहने वाले लोगों की हालत दयनीय है। वहां के अधिकांश लोग भी भारत में रहना पसंद करते हैं। कश्मीर में भारत का विरोध करना अब एक फैशन बन गया है ताकि सुर्खियां बटोरी जा सकें।

डा. सिंह ने सुरक्षा बलों और सेना के जवानों की सराहना की जो मुश्किल हालात में भी निरंतर सीमा पर चौकसी रखते हैं। इस विमर्श में लेफ्टिनेंट जनरल रिटायर डीएस हुड्डा ने भी शिरकत की। 

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