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जंतर मंतर प्रदर्शन: जुलाई की चूक से सबक लेकर रोक दी प्रदर्शनकारियों की राह, काम आई गृह मंत्री शाह की सलाह
Sat, 03 Oct 2026 01:20 AM IST
दुष्यंत शर्मा
अमर उजाला नेटवर्क, संतोष कुमार/जितेंद्र भारद्वाज
अमर उजाला नेटवर्क, संतोष कुमार/जितेंद्र भारद्वाज
Published by: दुष्यंत शर्मा
Updated Sat, 03 Oct 2026 01:20 AM IST
सार
20 जुलाई के हिंसक प्रदर्शन से सबक लेते हुए इस बार दिल्ली पुलिस ने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की सलाह पर काम किया।
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जंतर मंतर के पास...
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
जुलाई के सीजेपी प्रदर्शन से सबक लेते हुए दिल्ली पुलिस ने इस बार सिर्फ जंतर-मंतर प्रदर्शन स्थल ही नहीं, बल्कि वहां पहुंचने वाली हर राह को घेर लिया। शुक्रवार को जंतर-मंतर के आसपास अभेद सुरक्षा घेरा था। दिल्ली मेट्रो के 11 स्टेशन बंद रहे और लुटियंस दिल्ली की तरफ आने वाले प्रमुख रास्तों पर पुलिस की पूछताछ और निगरानी बढ़ा दी गई। नतीजा यह रहा कि पुलिस और प्रदर्शनकारियों की टक्कर प्रदर्शन स्थल पर होने के बजाय वहां पहुंचने की राह में ही शुरू हो गई।
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20 जुलाई को संसद मार्च के दौरान जंतर-मंतर से जुड़े सिर्फ पांच मेट्रो स्टेशन बंद किए गए थे। लेकिन 22 जुलाई को हालात बिगड़ती देख दोपहर करीब 11:30 बजे 16 मेट्रो स्टेशन बंद कराने पड़े। सड़कों पर भी आवाजाही सख्त की गई। बाद में सुरक्षा व्यवस्था से जुड़े लोगों ने इसे रणनीतिक चूक माना। इस बार पुलिस ने पहले ही मोर्चा संभाल लिया।
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प्रदर्शन स्थल नहीं, पूरी राह बनी सुरक्षा की पहली दीवार
पुलिस ने बृहस्पतिवार से ही जंतर-मंतर से जुड़े इलाकों में सुरक्षा बढ़ा दी थी। शुक्रवार सुबह 7:30 बजे से 11 मेट्रो स्टेशन बंद कर दिए गए। इसका सबसे ज्यादा असर दिल्ली विश्वविद्यालय के नॉर्थ और साउथ कैंपस को जंतर-मंतर से जोड़ने वाली यलो लाइन पर पड़ा। सिर्फ मेट्रो ही नहीं, सड़क मार्ग भी आसान नहीं रहा। आईटीओ, दिल्ली गेट, आरके आश्रम, तालकटोरा, मथुरा रोड और आईएनए समेत लुटियंस दिल्ली की तरफ आने वाले प्रमुख रास्तों पर पुलिस की मौजूदगी रही।
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इंटरनेट पर भी सुबह से पहरा
जंतर-मंतर और आसपास के इलाकों में शुक्रवार सुबह से ही इंटरनेट सेवाएं प्रभावित रहीं। पिछली बार संसद मार्च के दिन दोपहर करीब 12 बजे के बाद इंटरनेट बंद किया गया था। इस बार इसे पहले ही लागू करने से प्रदर्शनकारियों के बीच संपर्क और एक-दूसरे तक पहुंचने में दिक्कत हुई।
भीड़ बनने से पहले तोड़ने पर जोर
इस बार पुलिस की रणनीति में सबसे बड़ा बदलाव भीड़ बनने से पहले उसे छोटे समूहों में रोकने का रहा। पिछली बार बड़ी संख्या में प्रदर्शनकारियों के एक जगह जुटने के बाद पुलिस को भीड़ नियंत्रित करनी पड़ी थी। इस बार छोटे-छोटे समूहों को ही रास्ते में रोककर अलग करने पर जोर रहा।
इस बार प्रदर्शन का सियासी रंग भी ज्यादा
इस प्रदर्शन का मुद्दा भी पहले के प्रदर्शनों से अलग और ज्यादा राजनीतिक रहा। मुख्य मांग मुख्य चुनाव आयुक्त के इस्तीफे की रही। प्रदर्शन की घोषणा होने के साथ पहले दिन से आम आदमी पार्टी और वामदलों की सक्रियता दिखाई दी। इससे आम लोगों की भागीदारी पर असर पड़ा। फिर, पूरा विपक्ष एक मंच पर नजर नहीं आया। चुनाव आयोग को लेकर विपक्षी दलों का रुख में समान होने के बावजूद कांग्रेस इस प्रदर्शन से दूर रही।
जंतर-मंतर : पिछले अनुभवों और आईबी इनपुट पर बनी पुलिस ने की थी तैयारी
मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे और मतदाता सूची में विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) के अभियान को रोकने की मांग को लेकर विभिन्न राजनीतिक दलों एवं छात्र संगठनों ने शुक्रवार को नई दिल्ली के जंतर-मंतर पर प्रदर्शन किया। हालांकि दिल्ली पुलिस को प्रदर्शनकारियों को संभालने के लिए खासी मशक्कत करनी पड़ी, लेकिन बल प्रयोग जैसी नौबत नहीं आई। 20 जुलाई के हिंसक प्रदर्शन से सबक लेते हुए इस बार दिल्ली पुलिस ने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की सलाह पर काम किया। धरना-प्रदर्शन को लेकर अतीत के ट्रेंड्स का सूक्ष्मता से अध्ययन किया गया, आईबी के इनपुट जुटाए गए और फिर नई दिल्ली के लिए एडवांस प्लानिंग तैयार की गई।
क्या है गृह मंत्री शाह की प्लानिंग ...
महाराष्ट्र में भी कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) के प्रदर्शन के दौरान इस प्लानिंग को लागू किया गया। इसके अलावा दूसरे राज्यों के पुलिस बलों में भी केंद्रीय गृह मंत्रालय ने इसी रणनीति पर काम करने का सुझाव दिया है। केंद्रीय गृह मंत्री शाह ने पिछले दिनों राष्ट्रीय सुरक्षा रणनीति सम्मेलन में कहा था कि 2047 में विकसित भारत के लक्ष्य की पहली शर्त है, मजबूत आंतरिक सुरक्षा। यह फोरम आने वाले 15-20 वर्षों के ट्रेंड्स देखकर तय करे कि कौन-सी समस्या उठ सकती है और उसे रोकने की रणनीति क्या हो।
एआई के जरिये तरीके की पहचान करें आईपीएस ...
शाह ने कहा था कि सीसीटीएनएस, अंतर–प्रचलित आपराधिक न्याय प्रणाली (आईसीजेएस), नेटग्रिड और नेशनल ऑटोमेटेड फिंगरप्रिंट आइडेंटिफिकेशन सिस्टम (एनएएफआईएस) का इंटीग्रेटेड डेटा बैंक बनाया गया है। शाह ने सभी युवा आईपीएस अफसरों से एआई के जरिए डेटा इंटीग्रेशन, एनालिसिस और तरीके की पहचान करने की अपील की थी। उन्होंने सुझाव दिया था कि इससे वे कार्रवाई योग्य इंटेलिजेंस विकसित कर सकेंगे। यह संभव हुआ तो भविष्य की चुनौतियों को उनके घटित होने से पहले ही रोका जा सकेगा।
दिल्ली पुलिस ने किया अमल
दिल्ली पुलिस ने गृह मंत्री की सलाह पर अमल करते हुए प्रदर्शन को लेकर पहले से पूरी तैयारी कर ली थी। प्रदर्शन में कितने लोग शामिल हो सकते हैं, उनके रूट क्या होंगे और जंतर मंतर से पंद्रह किलोमीटर के दायरे में ट्रांसपोर्ट का मुख्य साधन कौन सा है। इस आधार पर प्रदर्शनकारियों के साथ शांतिपूर्वक तरीके से निपटने की रणनीति बनाई गई। दर्जनभर मेट्रो स्टेशन बंद कर दिए गए। 15 किमी की दूरी तक के मार्गों पर बेरिकेड लगाए गए। लिंक रोड पर फोर्स तैनात की गई। खास बात यह रही कि इस बार मेट्रो स्टेशन, प्रदर्शन की भीड़ को देखकर नहीं, बल्कि उन्हें पहले से ही बंद करने का आदेश जारी कर दिया गया। जंतर मंतर के आसपास स्थित मेट्रो स्टेशनों पर एक अक्तूबर की रात को ही अतिरिक्त बल तैनात कर दिया गया। यह इसलिए किया गया कि ताकि रात के दौरान प्रदर्शनकारियों की मूवमेंट पर नजर रखी जा सके।
आईबी ने रखी सोशल मीडिया पर नजर ...
खुफिया एजेंसी आईबी के मल्टी एजेंसी सेंटर मैक में प्रदर्शन को लेकर सोशल मीडिया पर खास नजर रखी गई। दिल्ली एनसीआर के सभी रूटों की वीडियो ग्राफी कराई गई। विदेशी फंडिंग और बाहरी मदद पर भी नजर रखी गई। प्रदर्शन को लेकर दूसरे राज्यों से रिपोर्ट ली गई कि वहां तो ऐसा कुछ नहीं है। इसके अलावा विभिन्न मार्गों पर लगे पुलिस की चेतावनी वाले बैनर थे। इन पर लिखा था कि यहां निषेधाज्ञा लागू है। पांच या इससे अधिक व्यक्ति या समूह इस क्षेत्र में किसी भी प्रकार का धरना प्रदर्शन वर्जित है।
इस बार पिछले ट्रेंड्स पर हुआ काम ...
20 जुलाई के हिंसक प्रदर्शन से सीख लेते हुए दिल्ली पुलिस ने ऐसे प्रदर्शनों के पिछले ट्रेंड्स नोट किए थे। उसी आधार पर इस दफा नई दिल्ली क्षेत्र में ड्रोन का इस्तेमाल किया गया। पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी आईएसआई द्वारा किसी भी तरह के प्रदर्शन में युवाओं को गुमराह करने के लिए फर्जी सोशल मीडिया हैंडल का उपयोग, इस पर साइबर यूनिट की नजर रही। इंटरनेट बंद होने पर भी सोशल मीडिया पर हिंसा दिखाने को लेकर भी पुलिस एवं केंद्रीय एजेंसियां सचेत रहीं।