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नोएडा फ्लैट विवाद: पूर्व जज सुधीर सक्सेना करेंगे असली हकदारों की पहचान, सुप्रीम कोर्ट ने की नियुक्ति

Sat, 03 Oct 2026 03:24 AM IST
दुष्यंत शर्मा अमर उजाला नेटवर्क, दिल्ली
अमर उजाला नेटवर्क, दिल्ली Published by: दुष्यंत शर्मा Updated Sat, 03 Oct 2026 03:24 AM IST
सार

शीर्ष अदालत ने जस्टिस सक्सेना को एक सदस्यीय स्वतंत्र उच्चस्तरीय समिति का अध्यक्ष नियुक्त किया है। यह आदेश केंद्रीय कर्मचारी सहकारी जीएन समिति से जुड़े लंबे समय से लंबित विवाद में आया।

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Noida flat dispute: Former judge Sudhir Saxena to identify the genuine claimants.
सुप्रीम कोर्ट - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

सुप्रीम कोर्ट ने नोएडा में बहुमंजिला फ्लैटों के वास्तविक हकदार सदस्यों और बाद के खरीदारों की पहचान करने की जिम्मेदारी इलाहाबाद हाईकोर्ट के पूर्व जज जस्टिस सुधीर कुमार सक्सेना को सौंपी है। शीर्ष अदालत ने जस्टिस सक्सेना को एक सदस्यीय स्वतंत्र उच्चस्तरीय समिति का अध्यक्ष नियुक्त किया है। यह आदेश केंद्रीय कर्मचारी सहकारी जीएन समिति से जुड़े लंबे समय से लंबित विवाद में आया।
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सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि उसके पहले के निर्देशों के बावजूद मामला अब तक सुलझ नहीं पाया है। सुप्रीम कोर्ट ने 2022 में न्यू ओखला इंडस्ट्रियल डेवलपमेंट अथॉरिटी (नोएडा) को समिति के 844 चिह्नित सदस्यों को बहुमंजिला फ्लैट आवंटित करने और 133 बाद के खरीदारों के दावों की जांच करने का निर्देश दिया था।
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बाद की सुनवाई में मूल सदस्यों की संख्या 863 और बाद के खरीदारों की संख्या 120 बताई गई, जिससे विवाद और उलझ गया। नोएडा ने बाद के खरीदारों को मान्यता देने का विरोध करते हुए कहा कि आवंटन के हस्तांतरण पर रोक थी और 1998 में मूल आवंटन रद्द कर दिए गए थे। वहीं, समिति ने दावा किया कि नोएडा ने हस्तांतरण के लिए दिए गए आवेदनों पर कार्रवाई नहीं की और मूल आवंटियों को जारी रिफंड चेक भी भुनाए नहीं गए।
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ये सब जांचेंगे जस्टिस सक्सेना
सुप्रीम कोर्ट ने जस्टिस सक्सेना को दस्तावेज मंगाने, संबंधित दावेदारों की सुनवाई करने और अपनी प्रक्रिया तय करने की स्वतंत्रता दी है। समिति को आठ सप्ताह में रिपोर्ट सौंपनी होगी। नोएडा को समिति को सभी जरूरी सचिवीय और लॉजिस्टिक सहायता देने का निर्देश दिया गया है। मामले की अगली सुनवाई 2 दिसंबर को होगी।
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