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दिल्ली हाईकोर्ट की टिप्पणी- बेटे की हरकतों के लिए ससुर जिम्मेदार नहीं, न्यायमूर्ति ने की धारा की व्याख्या
Sat, 03 Oct 2026 03:25 AM IST
दुष्यंत शर्मा
अमर उजाला नेटवर्क, दिल्ली
अमर उजाला नेटवर्क, दिल्ली
Published by: दुष्यंत शर्मा
Updated Sat, 03 Oct 2026 03:25 AM IST
सार
अदालत ने स्पष्ट किया कि ससुर की कथित वैवाहिक दुराचार में कोई प्रत्यक्ष भागीदारी नहीं थी। न्यायमूर्ति जैन ने कहा, कोई पिता केवल इसलिए घरेलू हिंसा अधिनियम के तहत दोषी नहीं ठहराया जा सकता कि उसने अपने वयस्क बेटे के आचरण को नियंत्रित नहीं किया।
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दिल्ली हाईकोर्ट
- फोटो : ANI
विस्तार
दिल्ली हाईकोर्ट ने कहा कि कोई ससुर केवल इसलिए घरेलू हिंसा अधिनियम के तहत उत्तरदायी नहीं ठहराया जा सकता कि उसने अपने वयस्क बेटे के आचरण को नियंत्रित नहीं किया। न्यायमूर्ति मधु जैन ने एक महिला की याचिका खारिज करते हुए यह टिप्पणी की।
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महिला ने निचली अदालत के उस आदेश को चुनौती दी थी। इस आदेश में उसके ससुर के खिलाफ घरेलू हिंसा के आरोपों पर आगे न बढ़ने का निर्देश था। अदालत ने स्पष्ट किया कि ससुर की कथित वैवाहिक दुराचार में कोई प्रत्यक्ष भागीदारी नहीं थी। न्यायमूर्ति जैन ने कहा, कोई पिता केवल इसलिए घरेलू हिंसा अधिनियम के तहत दोषी नहीं ठहराया जा सकता कि उसने अपने वयस्क बेटे के आचरण को नियंत्रित नहीं किया।
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अदालत ने यह भी रेखांकित किया कि घरेलू हिंसा अधिनियम की धारा 3 में शारीरिक या मानसिक नुकसान पहुंचाने वाले आचरण शामिल हैं। इसमें मौखिक, भावनात्मक और आर्थिक शोषण भी आते हैं। हालांकि, केवल घरेलू संबंध होना ही इस धारा को लागू करने के लिए पर्याप्त नहीं है।
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