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इस गंदे नशे ने जकड़ रखा है रियासत के युवाओं को

Sun, 27 Dec 2015 08:04 PM IST
Updated Sun, 27 Dec 2015 08:04 PM IST
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jammu youths are taking heroin

हेरोइन (प्रसिद्ध नाम चिट्टा) की लत ने शहर के युवा वर्ग को जकड़ लिया है। शहर के बड़े स्कूल, कोचिंग सेंटर, कालेज और निजी शिक्षण संस्थानों तक हेरोइन पहुंचाई जा रही है।

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इनमें वे संस्थान निशाने पर हैं, जहां बड़े घरों के बच्चे पढ़ते हैं, ताकि बड़ी कमाई हो। इसके लिए बाइक, व्हाट्एसएप का इस्तेमाल किया जा रहा है। पिछले एक हफ्ते में चार तस्कर पकड़े गए।
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इनके खुलासा हुआ कि नशा विद्यार्थियों तक पहुंचाना था। ड्रग एडिक्शन सेंटर में हर रोज 15 से 20 नए मामले आ रहे हैं। इसमें हेरोइन के सबसे अधिक हैं। हर रोज 150 पंजीकृत (नशे की लत लगा चुके) मरीजों की जांच सेंटर में हो रही है।
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महिलाएं भी इसकी शिकार हो रही हैं। ड्रग एडिक्शन सेंटर में दो साल में हेरोइन का नशा करने वालों में युवतियों की मात्रा शून्य से पांच फीसदी हो गई है। डा. मनु अरोड़ा का कहना है कि तेजी से हेरोइन का नशा करने वालों की संख्या बढ़ रही है।

चिट्टा(हेरोइन) शहर में सबसे अधिक बिक रहा है। इसकी तीन क्वालिटी हैं। सफेद पाउडर, सख्त (गुड़ की तरह) और एक अन्य किस्म है। इसके अलावा ब्राउन शूगर, गांजा, अफीम, कोकीन, पाउडर शामिल है।

सिल्वर पेपर पर हेरोइन को डाला जाता है। इसके नीचे धीमी आंच से इसको पिघलाया जाता है। इसके बाद यह पूरे पेपर पर फैल जाता है। पेपर को गोल करके इसके साथ चिपका कर इनहेल किया जाता है। हेरोइन को छोटे बड़े शाट बनाकर बेचे जाते हैं।

कितने में कितनी डोज

jammu youths are taking heroin

सबसे छोटा शाट 1500 रुपये, इससे बड़ा 3000 और सबसे अधिक असर वाला पांच हजार रुपये में। हेरोइन का यदि तीन से चार बार इस्तेमाल कर लिया जाए तो इसके बाद इसकी लत लग जाती है।

सिद्दड़ा, तवी नदी के किनारे, बठिंडी, गांधी नगर, सरवाल, जानीपुर, सैनिक कालोनी, बख्शी नगर, पलोड़ा में ज्यादा जाल फैला है। एक दम से खर्च बढ़ना, परिवार से बातचीत कम होना, दोस्तों का बदल जाना, चुपचाप रहना, खाना पीना कम, गुस्सा करना।

यह तमाम हेरोइन और अन्य नशों की लत के लक्षण हैं। इसलिए अभिभावक सतर्क हो जाएं। हेरोइन की तस्करी मुख्य रूप से पंजाब और हिमाचल से हो रही है।

इसकी सप्लाई करने वालों की पूरी जानकारी पुलिस के पास है, लेकिन पुलिस तस्करों को नहीं पकड़ रही। एसपी शहजाद सलारिया का कहना है कि कई बार पुलिस की टीमों को तस्करी करने वाले मुख्य लोगों तक पहुंचने के लिए भेजा गया, लेकिन पकड़ में नहीं आते।

अब एक ग्राम हेरोइन पकड़ने पर भी मामला दर्ज होता है।हेरोइन को तैयार करना भी आसान है। अफीम के फूलों पर कट लगाकर इसमें निकलने वाले गुंध को एक शीशे के फलास्क में डाल दिया जाता है।

इसके साथ नली लगाकर एक और फलास्क जोड़ा जाता है। अफीम वाले फलास्क के नीचे सिपरिट लैंप जलाया जाता है। इससे निकलने वाली भाप दूसरे फलास्क में जमा हो जाती है। जो ठंडी होकर पाउडर में तब्दील हो जाती है। तस्कर इनको शीशे के फलास्क लेकर तैयार कर लेते हैं।

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