हमले के बाद जम्मू में भी हाई अलर्ट
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राजबाग, कठुआ में आतंकी हमले के बाद जम्मू-कश्मीर में हाई अलर्ट कर दिया गया। जगह-जगह पुलिस के नाके बढ़ा दिए गए। शहर में प्रवेश करने वाले सभी रास्तों पर पुलिस कर्मियों को तैनात किया गया। इसके साथ दो पहिया से लेकर चौपहिया वाहनों का तलाशी अभियान चलाया गया। बिक्रम चौक, ज्यूल चौक जानीपुर में बैरियर लगा दिए गए।
चार से पांच-पांच पुलिस कर्मियों को तैनात कर दिया। धार्मिक स्थलों, अस्पताल तथा अन्य सार्वजनिक स्थलों के बाहर भी पुलिस कर्मियों को लगाया गया। रेलवे स्टेशन और बस स्टैंड में सुरक्षा कर्मियों की गश्त चलती रही। सुबह 11 बजे तक सभी ओर सख्ती की गई थी। बिक्रम चौक पर कई वाहनों को रोका गया।
हमले के बाद से जीएमसी अस्पताल की पुलिस चौकी के पुलिस कर्मी भी सक्रिय रहे। सारे स्टाफ के लोगों को ड्यूटी पर लगाया हुआ था। संतरी से लेकर अफसर मौके पर तैनात थे। हर आने वाले पर नजर रखी जा रही थी।
पुरुषोत्तम की मौत से बंदोर में मातम
आतंकियों की पहली गोली का शिकार बने पुलिस कांस्टेबल पुरुषोत्तम सिंह की मौत की खबर जैसे ही उनके पैतृक गांव बंदोर पहुंची तो पूरे गांव में मातम छा गया। शहीद की पत्नी नीशा देवी का रो-रो कर बुरा हाल है। पहले तो उसे यकीन ही नहीं हुआ, लेकिन जैसे जैसे परिवार के अन्य सदस्यों को पता चला तो उन पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा।
बेटे की मौत की खबर मिलने के बाद शहीद के माता-पिता बदहवास हो गए। लाडले के जाने का गम तो था ही, साथ ही देश के लिए प्राणों की आहुति देने पर परिवार के लोगों में गर्व भी था।
पुरुषोत्तम पांच भाइयों में सबसे छोटे थे। शहीद के बडे भाई संतोख राज ने बताया कि पुरुषोत्तम लाल पिछले करीब एक साल से राजबाग थाने में तैनात था और वह सुबह करीब पांच बजे ड्यूटी के लिए घर से निकला था। दो साल पहले ही उसकी शादी हुई थी। छोटे भाई की मौत का गम उन्हें ताउम्र रहेगा, पर उसकी शहादत से पूरे गांव वालों का सीना आज गर्व से चौड़ा हो गया है।
जीएमसी में संदिग्ध पकड़ा
जीएमसी पुलिस ने कठुआ हमले के बाद सक्रियता
दिखाते हुए एक संदिग्ध को पकड़ा। चौकी में ही उसकी तलाशी ली गई। कई घंटों
तक उसे जीएमसी पुलिस चौकी में रखा गया। वह अपने आप को पुलिस वाला बताता
रहा, लेकिन पता चला कि उसने शराब भी पी रखी थी। तब उसके रिश्तेदारों को
बुलाया गया, तब उसका, नाम पता आदि जानकारी हासिल करने के बाद उसे छोड़ा
गया।