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Jammu News: एमसीएच 12 दिन से बिना चिकित्सा अधीक्षक के

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jammu, MCH gandhinagar
हस्ताक्षर प्राधिकरण न होने से चिकित्सा सेवाओं पर पड़ रहा असर
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अमर उजाला ब्यूरो
जम्मू। एसएमजीएस अस्पताल के बाद दूसरे बड़े जच्चा-बच्चा अस्पताल (एमसीएच) गांधीनगर 12 दिन से बिना चिकित्सक के चल रहा है। 19 फरवरी को चिकित्सा अधीक्षक के तबादले के बाद न तो नए अधीक्षक की नियुक्ति हुई और न ही किसी को अतिरिक्त कार्यभार दिया गया है। इससे अस्पताल में हस्ताक्षर प्राधिकरण न होने से चिकित्सा सेवाओं पर असर पड़ रहा है। इस 200 बिस्तर वाले अस्पताल में वर्तमान में 70 तक निको के बिस्तर स्थापित हैं।
कोविड के दौरान एमसीएच ने समर्पित कोविड अस्पताल के रूप में भूमिका निभाई थी। इसके बाद इसे जच्चा बच्चा अस्पताल के रूप में विकसित किया गया। बताया जाता है कि चिकित्सा अधीक्षक के हस्ताक्षर प्राधिकरण होने से अधिकांश चिकित्सा सेवाएं सामान्य तौर पर रहती हैं और निगरानी बढ़ती है। लेकिन, वर्तमान में ये प्रभावित हो रहा है।
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अस्पताल की एंबुलेंस के तेल के लिए भी चिकित्सा अधीक्षक द्वारा मंजूरी दी जाती है, जो वर्तमान में लटक रहा है। इसी तरह आयुष्मान सेहत योजना के तहत कई दवाओं की खरीद के लिए चिकित्सा अधीक्षक की मंजूरी रहती है। इस अस्पताल को पहले चिकित्सा शिक्षा विभाग से स्वास्थ्य विभाग के अधीन करने की भी चर्चा रही है।
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सूत्रों के अनुसार एमसीएच अस्पताल के लिए सृजित पद और अपना बजट है। अस्पताल में मौजूदा 15 से 20 लाख रुपये की देनदारी है, जिसके भुगतान में चिकित्सा अधीक्षक की भूमिका अहम रहती है। उधर, जीएमसी प्रशासन का दावा है कि मरीजों को कोई परेशानी नहीं हो रही है। लेकिन यह भी ध्यान देने योग्य है कि अगर किसी को कोई जरूरी मंजूरी चाहिए तो उसे मेडिकल कालेज जाना पड़ेगा, जबकि चिकित्सा अधीक्षक होने पर उन्हें एमसीएच में ही यह सुविधा मिल सकती थी।

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किसी मरीज को परेशानी है तो मुझसे मिल सकते हैं : प्रिंसिपल
जीएमसी जम्मू के प्रिंसिपल डाॅ. आशुतोष गुप्ता का कहना है कि वह खुद एमसीएच अस्पताल की प्रबंधन व्यवस्था को देख रहे हैं। अगर किसी मरीज को कोई परेशानी आ रही है तो वह उनके मिल सकते हैं। कोशिश कर रहे हैं कि स्थायी नियुक्ति न होने तक जल्द किसी अधिकारी को चिकित्सा अधीक्षक का कार्यभार दे दें।
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