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Jammu News: लंबित मांगों के लिए अनशन 13वें दिन भी जारी
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सोनम वांगचुक के साथ काफी संख्या में लोगों ने लिया हिस्सा
संवाद न्यूज एजेंसी
लेह। लंबित मांगों के समर्थन में सोमवार को सोनम वांगचुक का अनशन 13वें दिन भी जारी रहा है। इस दौरान काफी संख्या में लोगों ने हिस्सा लिया। साथ ही छठी अनुसूची की मांग को लेकर नारे लगाए।
इससे पहले, वांगचुक ने एक्स पर पोस्ट कर बताया कि केंद्र सरकार को लद्दाख के पर्यावरण और आदिवासी स्वदेशी संस्कृति की रक्षा करने के अपने वादों की याद दिलाने के लिए माइनस 12 डिग्री सेल्सियस में 250 लोग भूखे सोए थे। इससे पहले रविवार को देशभर के विभिन्न शहरों में लोगों ने एक दिवसीय अनशन रख कर एकजुटता दिखाई थी। इसके लिए उन्होंने लोगों का आभार जताया। सरकार भारत को लोकतंत्र की जननी कहना पसंद करती है, तो लद्दाख के साथ सौतेला व्यवहार न किया जाए। साथ ही उन्होंने एक बार फिर देश और दुनिया भर के लोगों से 24 मार्च को अपने-अपने स्थानों सभाएं कर आंदोलन का समर्थन करने की अपील की।
गौरतलब रहे कि वह खुले आसमान के नीचे कई अन्य लोगों के साथ 6 मार्च से शून्य तापमान में उपवास कर रहे हैं। वांगचुक, जो पर्यावरण-अनुकूल जीवन शैली की वकालत करते हैं, लद्दाख के लिए संवैधानिक सुरक्षा उपायों के लिए एक प्रमुख प्रचारक हैं और उन्होंने लद्दाख की मांगों पर केंद्र के साथ बातचीत के दौर के अनिर्णायक होने के बाद अपना उपवास शुरू किया। यह विरोध सरकार द्वारा अभी तक पूरी नहीं की गई कुछ चीजों के मद्देनजर भी आया है, जो 2019 में उनके चुनावी घोषणापत्र का हिस्सा थे।
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संवाद न्यूज एजेंसी
लेह। लंबित मांगों के समर्थन में सोमवार को सोनम वांगचुक का अनशन 13वें दिन भी जारी रहा है। इस दौरान काफी संख्या में लोगों ने हिस्सा लिया। साथ ही छठी अनुसूची की मांग को लेकर नारे लगाए।
इससे पहले, वांगचुक ने एक्स पर पोस्ट कर बताया कि केंद्र सरकार को लद्दाख के पर्यावरण और आदिवासी स्वदेशी संस्कृति की रक्षा करने के अपने वादों की याद दिलाने के लिए माइनस 12 डिग्री सेल्सियस में 250 लोग भूखे सोए थे। इससे पहले रविवार को देशभर के विभिन्न शहरों में लोगों ने एक दिवसीय अनशन रख कर एकजुटता दिखाई थी। इसके लिए उन्होंने लोगों का आभार जताया। सरकार भारत को लोकतंत्र की जननी कहना पसंद करती है, तो लद्दाख के साथ सौतेला व्यवहार न किया जाए। साथ ही उन्होंने एक बार फिर देश और दुनिया भर के लोगों से 24 मार्च को अपने-अपने स्थानों सभाएं कर आंदोलन का समर्थन करने की अपील की।
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गौरतलब रहे कि वह खुले आसमान के नीचे कई अन्य लोगों के साथ 6 मार्च से शून्य तापमान में उपवास कर रहे हैं। वांगचुक, जो पर्यावरण-अनुकूल जीवन शैली की वकालत करते हैं, लद्दाख के लिए संवैधानिक सुरक्षा उपायों के लिए एक प्रमुख प्रचारक हैं और उन्होंने लद्दाख की मांगों पर केंद्र के साथ बातचीत के दौर के अनिर्णायक होने के बाद अपना उपवास शुरू किया। यह विरोध सरकार द्वारा अभी तक पूरी नहीं की गई कुछ चीजों के मद्देनजर भी आया है, जो 2019 में उनके चुनावी घोषणापत्र का हिस्सा थे।
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