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Jammu Landslide: 'देखते ही देखते मलबा हमारे ऊपर आ गिरा...' हादसे में घायल आगरा की उमंग ने बताया सबकुछ कैसे हुआ

Thu, 28 Aug 2025 04:05 PM IST
शाहरुख खान अमर उजाला नेटवर्क, जम्मू
अमर उजाला नेटवर्क, जम्मू Published by: शाहरुख खान Updated Thu, 28 Aug 2025 04:05 PM IST
सार

कटड़ा हादसे में घायल आगरा की उमंग ने आपबीती सुनाई। उन्होंने कहा कि देखते ही देखते मलबा हमारे ऊपर आ गिरा, पिता और भाई की जान ले ली। मां भी नारायणा अस्पताल में भर्ती है।

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Jammu Landslide Tragedy Agra Family Hit by Debris on Vaishno Devi Route Know Details in Hindi
भूस्खलन के बाद के हालात - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी

विस्तार

कटड़ा में मां वैष्णो देवी भवन मार्ग पर मंगलवार को हुए भीषण हादसे में आगरा (उत्तर प्रदेश) से दर्शन के लिए आए एक परिवार पर गमों का पहाड़ टूट पड़ा। हादसे में परिवार के दो सदस्यों की मौत हो गई, जबकि बेटी उमंग और उसकी मां गंभीर रूप से घायल हैं। दोनों का उपचार नारायण अस्पताल कटड़ा में जारी है।
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घायल उमंग से जब बातचीत की गई तो वह दर्द और सदमे से टूटी हुई नजर आई। उमंग ने रोते हुए बताया कि हमें समझ ही नहीं आया कि हादसा कैसे हुआ। सबकुछ अचानक हुआ। हम चल भी नहीं पाए और देखते ही देखते पत्थर और मलबा हमारे ऊपर आ गिरा। 
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इसी हादसे में मेरे पिता और भाई की मौके पर ही मौत हो गई। मैं और मेरी मां गंभीर रूप से घायल हो गए और अस्पताल में भर्ती हैं। उमंग का कहना है कि पूरा परिवार बड़ी श्रद्धा और उत्साह के साथ मां वैष्णो देवी के दर्शन के लिए आया था। मगर अचानक हुए इस हादसे ने उनकी खुशियां मातम में बदल दीं। 
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फिलहाल अस्पताल में उनका इलाज जारी है और परिजनों को इस दर्दनाक घटना की सूचना दी जा चुकी है। हादसे के बाद पूरे क्षेत्र में मातम का माहौल है। श्रद्धालु लगातार ईश्वर से घायलों के जल्द स्वस्थ होने की दुआ कर रहे हैं। 
 

वहीं प्रशासन की ओर से मृतकों के परिजनों को सहायता राशि देने की घोषणा की गई है। यह हादसा न केवल उस परिवार बल्कि हर श्रद्धालु के लिए गहरा आघात है, जो मां के दरबार में आस्था लेकर आते हैं।
 

जम्मू-कश्मीर में मौसम का कहर 
जम्मू-कश्मीर में मौसम का कहर बुधवार को भी जारी रहा। जम्मू में चौबीस घंटे में 380 मिमी बारिश दर्ज हुई जोकि पिछले 115 वर्षों में सबसे ज्यादा बारिश है। जम्मू संभाग में नदियों का जलस्तर घटा तो कश्मीर संभाग में बढ़ गया। 

 

श्री माता वैष्णो देवी के यात्रा मार्ग पर हुए भूस्खलन से मरने वाले श्रद्धालुओं की संख्या बुधवार को 34 पहुंच गई। इनमें 11 उत्तर प्रदेश के हैं। मंगलवार देर रात तक नौ श्रद्धालुओं की मौत और 21 के घायल होने की पुष्टि हुई थी। बाद में बचाव दल को मलबे के नीचे से कई और शव मिले। 

 

बुधवार को अधिकारियों ने बताया कि वैष्णो देवी मार्ग पर भूस्खलन में मरने वालों की संख्या बढ़कर 34 हो गई है। कम से कम 20 लोग घायल हैं। हादसा मंगलवार दोपहर करीब तीन बजे पहाड़ का हिस्सा ढहने से हुआ। इससे चट्टानें और मलबा नीचे गिरा और लोग दब गए। 

 

सुरक्षा के मद्देनजर वैष्णो देवी यात्रा बुधवार को दूसरे दिन भी बंद रखी गई। भारतीय मौसम विभाग ने बताया कि मंगलवार सुबह 8:30 बजे से 24 घंटे के दौरान उधमपुर में अभूतपूर्व 629.4 मिमी और जम्मू में 380 मिमी बारिश हुई है। यह 1910 में राज्य में मौसम वेधशाला स्थापित होने के बाद से अब तक का एक दिन की बारिश का नया रिकॉर्ड है।

मृतकों के परिजन को 11-11 लाख की मदद
वैष्णो देवी मार्ग हादसे में जान गंवाने वालों के परिजन को 11-11 लाख रुपये की आर्थिक मदद दी जाएगी। श्री माता वैष्णो देवी श्राइन बोर्ड 5-5 लाख देगा। एसडीआरएफ से चार-चार लाख तो मुख्यमंत्री राहत कोष से दो-दो लाख रुपये दिए जाएंगे। मुख्यमंत्री राहत कोष और एसडीआरएफ से गंभीर रूप से घायलों को एक-एक लाख और मामूली घायलों को 50-50 हजार रुपये की मदद दी जाएगी।

झेलम नदी का पानी कुर्सु राजबाग में घुसा, बाशिंदों में दहशत
वहीं, श्रीनगर शहर के कुर्सु राजबाग मोहल्ले में बुधवार को झेलम नदी का पानी घुसने से हड़कंप मच गया। रिहायशी इलाके में घरों और गलियों में पानी घुसने से लोग दहशत में आ गए। लोगों का कहना है कि झेलम नदी का जलस्तर बढ़ने से कई जगहों पर ओवरफ्लो हुआ पानी मुसीबत बन रहा है। 

 

वहीं सूचना पर पहुंचे एसपी साउथ शब्बीर खान ने साथी पुलिस कर्मियों की मदद से प्रभावित लोगों को बाहर निकालकर सुरक्षित स्थानों पर भेजा। लोगों को आश्वस्त किया कि घरों में पड़े सामान को लेकर चिंतित न हो, उसकी सुरक्षा पुलिस करेगी।

 

राजबाग के एक स्थानीय निवासी गुलाम अहमद ने बताया कि गलियां मंगलवार की देर रात ही जलमग्न हो गई थीं। बुधवार को दोपहर तक पानी हमारे आंगन तक पहुंच गया है और अब घरों में घुस रहा है। 

 

लोग डरे हुए हैं, कई लोगों ने अपना ज़रूरी सामान ऊपरी मंज़िल पर रख लिया है। एक अन्य निवासी ने बताया कि काफी लोग ऊपरी मंजिल पर चले गए हैं। स्थिति पर नजर बनाए हुए हैं। बच्चे और बुजुर्ग सबसे ज़्यादा प्रभावित हैं। सभी को 2014 के जैसी बाढ़ के आने का डर है।"

 

स्थानीय लोगों ने शिकायत की कि पूर्व में बार-बार अनुरोध के बावजूद कुर्सु राजबाग में कोई भी सुधारात्मक उपाय नहीं किए गए। उन्होंने अधिकारियों से इस मुसीबत से स्थाई निजात दिलाने की मांग की। वहीं सिंचाई एवं बाढ़ नियंत्रण विभाग के अधिकारियों ने कहा कि वह स्थिति पर नज़र रख हुए हैं।

संवेदनशील स्थानों पर टीमें तैनात कर दी गई हैं। एक अधिकारी ने कहा कि लोगों को सतर्क रहने की जरूरत है। किसी भी आपात स्थिति से निपटने को महकमा पूरी तरह तैयार है।
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