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कागजों में ही सिमट कर रह गया जम्मू कश्मीर का पहला थर्मल पॉवर प्लांट

Mon, 16 Jul 2018 05:05 AM IST
संजीव दुबे, अमर उजाला, जम्मू
संजीव दुबे, अमर उजाला, जम्मू Updated Mon, 16 Jul 2018 05:05 AM IST
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jammu kashmir thermal power project is just working on paper ground reports are zero for it
फाइल
जम्मू-कश्मीर में पहला थर्मल प्लांट पिछले एक दशक से कागजों में ही सिमट कर रह गया है। 26 मार्च 2015 को एनटीपीसी और जम्मू कश्मीर स्टेट पावर डेवलपमेंट कारपोरेशन में समझौते के बावजूद अभी तक जमीनी पर कुछ नहीं है।
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आधिकारिक सूत्रों की मानें तो 2010 में पूर्ववर्ती केंद्र सरकार ने कठुआ में 1000 मेगावाट के थर्मल पावर प्लांट को शुरू करने की घोषणा की थी। इसके बाद प्लांट की व्यवहारिकता को लेकर मसला लटका रहा। 26 मार्च 2015 को जम्मू कश्मीर स्टेट पावर डेवलपमेंट कारपोरेशन और एनटीपीसी के मध्य 660 मेगावाट का थर्मल प्लांट शुरू करने के लिए समझौता हुआ।
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समझौते में जम्मू संभाग के कठुआ में नहीं उड़ीसा में राज्य जम्मू कश्मीर को पिट हैड आवंटित करने का जिक्र था। ऐसा इसलिए किया जाना था कि जम्मू-कश्मीर कोयला पहुंचाने में खर्च बहुत जाना होना था। ऐसे में उड़ीसा में प्लांट आवंटित होने से कोयला पहुंचाने से सस्ते ट्रांसमिशन चार्जेज पड़ने थे।
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यह सब होने के बावजूद यह मामला नीति आयोग के पास पहुंचा और फिर नीति आयोग की कड़ी शर्तों जिसमें एनटीपीसी और जम्मू कश्मीर स्टेट पावर डेवलपमेंट कारपोरेशन के प्लांट में हिस्से को लेकर थी के बाद से मामला ठंडे बस्ते में पड़ा हुआ है।
 
पन बिजली से नहीं हो पा रही मांग पूरी 
रियासत में उपभोक्ताओं को बिजली पहुंचाने का मुख्य स्त्रोत पन बिजली ही है। बिजली की मांग बढ़कर 2800 मेगावाट के पार जा चुकी है। लेकिन रियासत का अपना पन बिजली उत्पादन 1200 मेगावाट के आसपास ही है। ऐसे में बिजली खरीदकर भी गुजारा नहीं हो रहा। पाकिस्तान से सिंधु जल समझौते की वजह से रियासत में चिनाब, झेलम और सिंधु नदी पर पन बिजली परियोजनाएं रन द वाटर स्कीम पर हैं। जल स्तर कम होते ही इनमें बिजली उत्पादन एक चौथाई तक रह जाता है।

 
पांच से 12 घंटे की रोजाना बिजली कटौती
गर्मी के मौसम में जम्मू संभाग में पांच से 12 घंटे तक प्रतिदिन बिजली कटौती उपभोक्ताओं को सहनी पड़ रही है। बिजली की मांग ज्यादा होने के चलते ढांचे पर ओवरलोड क्षमता से बहुत ज्यादा रहने के चलते ग्रिड स्टेशनों से लेकर ट्रांसफार्मरों का ब्रेक डाउन भी आम समस्या बनकर रह गई है।
 
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