गर्मियों से पहले ही1000 मेगावाट बिजली का टोटा
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बिजली उपभोक्ताओं को अघोषित कटौती से फिलहाल राहत मिलने के आसार नहीं है। बिजली की मांग और उपलब्धता में अंतर एक हजार मेगावाट पार कर चुका है। ऐसे में बिजली की अघोषित कटौती जारी रहने के ही आसार हैं।
आधिकारिक सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार सर्दियों में कश्मीर घाटी के अलावा जम्मू संभाग के ज्यादा सर्दी वाले इलाकों में बिजली की मांग काफी बढ़ी हुई है। इस वजह से उत्तरी ग्रिड से बिजली खरीदने के बावजूद भी बिजली की मांग और उपलब्धता में अंतर एक हजार मेगावाट से ज्यादा है।
दूसरी ओर दरियाओं और नदियों में जल स्तर कम होने से पनबिजली परियोजनाओं में उत्पादन क्षमता से एक तिहाई ही हो पा रहा है। बिजली विभाग के अनुसार जरूरत के अनुसार कटौती की जा रही है। गर्मियों में जम्मू में बिजली की मांग बढ़ती है और सर्दियों में कश्मीर में।
जम्मू में तीन से आठ घंटे तक की बिजली कटौती हो रही है। वहीं गर्मी बढ़ने के साथ साथ इसमें ओर बढ़ोतरी होती जाएगी। बिजली कटौती होने से लोगों को खासी परेशानी का सामना करना पड़ता है।
आरएपीडीआरपी प्रोजेक्ट की रफ्तार सुस्त
बिजली ढांचे को मजबूत करने के लिए आरएपीडीआरपी प्रोजेक्ट को रियासत में पिछले साल जोरशोर से जारी किया गया था। लेकिन प्रोजेक्ट अभी आधा अधूरा ही है और इसे पूरा होने में अभी समय लगेगा।
भाजपा के गांधीनगर विधानसभा क्षेत्र से विधायक कविंद्र गुप्ता ने बिजली अधिकारियों के साथ बैठक में आर-एपीडीआरपी परियोजना पर हो रहे कार्य की समीक्षा करते हुए अधिकारियों को निर्धारित समयावधि के भीतर काम पूरा करने को कहा है।
प्रोजेक्ट के तहत बिजली ढांचे को मजबूत किया जाना है और ट्रासंमिशन लाइनों पर भी मीटर लगाए जाने हैं ताकि बिजली की बर्बादी पर रोक लगाई जा सके।