हमलों से निपटने को बना एंटी फिदायीन ग्रुप
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आतंकियों के बढ़ते फिदायीन हमलों से निपटने के लिए जम्मू-कश्मीर पुलिस ने एंटी फिदायीन ग्रुप बनाया है। ग्रुप में अधिकारियों से लेकर तेजतर्रार जवानों को शामिल किया गया है, जो विशेष तौर पर फिदायीन हमलों से निपटेगा। एक साल पहले ही इसका गठन कर दिया गया था। शनिवार को हुए आतंकी हमले में पहली बार यह ग्रुप दिखा।
हालांकि सेना ने ही मोर्चा संभाले रखा और इस ग्रुप को आगे जाने का मौका नहीं मिला, लेकिन इस ग्रुप के बनने से साफ है कि पुलिस फिदायीन हमलों को लेकर चिंतित है। जानकारी के अनुसार इस 70 सदस्यों के ग्रुप में एसपी, डीएसपी, इंस्पेक्टर, सब इंस्पेक्टर स्तर के अधिकारी और जवान शामिल हैं।
इस दस्ते को हरियाणा में विशेष रूप से ट्रेनिंग दी गई है। इसमें बताया गया कि यदि फिदायीन हमला हो तो किस तरह से निपटना है। अकसर देखा गया है कि फिदायीन हमलों में आतंकी मरने के बाद अपने शरीर पर ग्रेनेड बांध लेते हैं। इसकी चपेट में कई अधिकारी और जवान भी आए हैं। पुलिस का फिदायीन दस्ता इन सब घटनाओं को रोकने में मददगार साबित होगा।
कहां हैं बचे हुए छह आतंकी?
पहले कठुआ और फिर अगले दिन सांबा में लगातार दो आतंकी हमलों ने सुरक्षा एजेंसियों को सकते में डाल दिया है। इन हमलों को लेकर कई तरह के कयास लगाए जा रहे हैं। आतंकी कहां से और कितने आए, अब तक सेना को इसकी जानकारी नहीं हुई। सूत्रों का कहना है कि आतंकियों ने इस घुसपैठ का ताना-बाना एक हफ्ता पहले ही बुना था।
राज्य में लगातार होने वाली तीन दिन की बारिश में आतंकी घुसपैठ कर आए। हीरानगर सेक्टर के इंटरनेशनल बार्डर से घुसपैठ की गई। कठुआ से बार्डर 15 किलोमीटर दूर है और सांबा 12 किलोमीटर। खुफिया एजेंसियों के सूत्रों की मानें तो 10 आतंकियों का दल एक हफ्ता पहले हुई जोरदार बारिश के दौरान ही बार्डर से घुसपैठ कर आया।
यहां उन्होंने बारिश और नालों में आई बाढ़ का लाभ उठाया। इसके बाद वह घुसपैठ करके आ गए। इनमें से दो ने कठुआ में हमला किया और दो ने शनिवार को सांबा के महेशवर में हमला किया। अब भी छह आतंकियों का कोई अता-पता नहीं है। वहीं आतंकियों की मौजूदगी के बाद सैन्य कैंपों के बाहर अलर्ट जारी किया गया है।
सैन्य स्कूलों और सैन्य क्वार्टरों के बाहर सुरक्षा बढ़ा दी गई है। आतंकी किस संगठन से हैं, इसका भी अभी तक पता नहीं चल पाया है। लेकिन आतंकियों के पास मिले सामान से साफ है कि वह एक बड़ी तबाही को अंजाम देने के इरादे से आए थे।