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Jammu News: विशेषज्ञों ने जम्मू-कश्मीर में आई आपदा पर जताई चिंता
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श्रीनगर। इंडियन बिल्डिंग्स कांग्रेस (आईबीसी) जम्मू-कश्मीर चैप्टर ने आईबीसी के 34वें स्थापना दिवस पर सोमवार को ‘हालिया आपदाओं में निर्मित पर्यावरण का प्रदर्शन: सीखे गए सबक’ विषय पर एक वेबिनार आयोजित किया। इंजीनियरों, वास्तुकारों, योजनाकारों, बिल्डरों, शिक्षाविदों और नीति निर्माताओं ने हाल की आपदाओं पर चिंता व्यक्त करते हुए सीखे गए सबक को व्यवहार में लाने पर चर्चा की।
उद्घाटन करते हुए आईबीसी के अध्यक्ष, ई. चिन्मय देबनाथ ने निर्माण क्षेत्र में एक पेशेवर निकाय के रूप में आईबीसी के विकास पर प्रकाश डाला।
उन्होंने देश भर में सुरक्षित, टिकाऊ और लचीले बुनियादी ढांचे को बढ़ावा देने में आईबीसी की महत्वपूर्ण भूमिका पर जोर दिया। टिकाऊ निर्माण और आपदा-प्रतिरोधी बुनियादी ढांचे में अनुसंधान, संवाद और कार्रवाई पर निरंतर ध्यान केंद्रित करने का आह्वान किया। क्षेत्र के नाजुक पहाड़ों, भूकंपीय कमजोरियों और जलवायु संबंधी जोखिमों को देखते हुए नियोजन, डिजाइन, निर्माण और रखरखाव में लचीलेपन को एक मुख्य मूल्य के रूप में अंतर्निहित करने की जरूरत को रेखांकित किया।
मुख्य वक्ता प्रो. अमीर अली खान ने कहा कि बाढ़ के मैदानों पर लगातार अतिक्रमण जोखिम संवेदनशील भूमि उपयोग नियोजन में कमियों को दर्शाता है। उन्होंने आपदा तैयारी और विकास नियोजन में पारंपरिक ज्ञान और सर्वोत्तम प्रथाओं को एकीकृत करने की आवश्यकता पर बल दिया। डॉ. खान ने तवी पुल के ढहने सहित पंजाब, जम्मू और कश्मीर और हिमाचल प्रदेश में हुई हाल की चरम घटनाओं का उल्लेख किया और इन विफलताओं को खराब निर्माण प्रथाओं और कमजोर भूमि उपयोग नियोजन से जोड़ा।
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प्रतिभागियों का स्वागत करते हुए आईबीसी जम्मू-कश्मीर चैप्टर के अध्यक्ष ई. आमिर अली ने पेशेवरों से पिछले अनुभवों पर चिंतन करने, कमियों की पहचान करने और सीखे गए सबक को व्यवहार में ढालने का आग्रह किया। वेबिनार में देश के विभिन्न राज्यों से आए सैकड़ों प्रतिभागी शामिल हुए। सभी ने एक स्वर में कहा कि प्रकृति से सबक लेने और जंगलों, नालों और नदियों को नुकसान पहुंचाने से बचने की जरूरत है।
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उद्घाटन करते हुए आईबीसी के अध्यक्ष, ई. चिन्मय देबनाथ ने निर्माण क्षेत्र में एक पेशेवर निकाय के रूप में आईबीसी के विकास पर प्रकाश डाला।
उन्होंने देश भर में सुरक्षित, टिकाऊ और लचीले बुनियादी ढांचे को बढ़ावा देने में आईबीसी की महत्वपूर्ण भूमिका पर जोर दिया। टिकाऊ निर्माण और आपदा-प्रतिरोधी बुनियादी ढांचे में अनुसंधान, संवाद और कार्रवाई पर निरंतर ध्यान केंद्रित करने का आह्वान किया। क्षेत्र के नाजुक पहाड़ों, भूकंपीय कमजोरियों और जलवायु संबंधी जोखिमों को देखते हुए नियोजन, डिजाइन, निर्माण और रखरखाव में लचीलेपन को एक मुख्य मूल्य के रूप में अंतर्निहित करने की जरूरत को रेखांकित किया।
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मुख्य वक्ता प्रो. अमीर अली खान ने कहा कि बाढ़ के मैदानों पर लगातार अतिक्रमण जोखिम संवेदनशील भूमि उपयोग नियोजन में कमियों को दर्शाता है। उन्होंने आपदा तैयारी और विकास नियोजन में पारंपरिक ज्ञान और सर्वोत्तम प्रथाओं को एकीकृत करने की आवश्यकता पर बल दिया। डॉ. खान ने तवी पुल के ढहने सहित पंजाब, जम्मू और कश्मीर और हिमाचल प्रदेश में हुई हाल की चरम घटनाओं का उल्लेख किया और इन विफलताओं को खराब निर्माण प्रथाओं और कमजोर भूमि उपयोग नियोजन से जोड़ा।
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प्रतिभागियों का स्वागत करते हुए आईबीसी जम्मू-कश्मीर चैप्टर के अध्यक्ष ई. आमिर अली ने पेशेवरों से पिछले अनुभवों पर चिंतन करने, कमियों की पहचान करने और सीखे गए सबक को व्यवहार में ढालने का आग्रह किया। वेबिनार में देश के विभिन्न राज्यों से आए सैकड़ों प्रतिभागी शामिल हुए। सभी ने एक स्वर में कहा कि प्रकृति से सबक लेने और जंगलों, नालों और नदियों को नुकसान पहुंचाने से बचने की जरूरत है।