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Jammu News: महबूबा ने बीजीएसबीयू में कुप्रबंधन का आरोप लगाया, कार्रवाई की मांग की
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श्रीनगर। पीडीपी अध्यक्ष महबूबा मुफ्ती ने बाबा गुलाम शाह बादशाह विश्वविद्यालय (बीजीएसबीयू) की मौजूदा स्थिति पर गंभीर चिंता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि यह अपने मूल दृष्टिकोण से पूरी तरह भटक गया है। मुफ्ती ने कहा कि यह विश्वविद्यालय जिसकी परिकल्पना दिवंगत मुफ्ती मोहम्मद सईद के नेतृत्व में एक शिक्षण केंद्र के रूप में की गई थी और चौधरी मसूद के प्रयासों से अस्तित्व में आया, अब गंभीर प्रशासनिक और संस्थागत चुनौतियों का सामना कर रहा है।
विश्वविद्यालय में शिक्षकों और कर्मचारियों की स्थिति पर प्रकाश डालते हुए उन्होंने कहा कि लगभग 80 प्रतिशत पद रिक्त हैं, कोई स्थायी शिक्षक नहीं है और बुनियादी ढांचा अपर्याप्त है। उन्होंने आगे आरोप लगाया कि विश्वविद्यालय वर्तमान में संविदा कर्मचारियों द्वारा चलाया जा रहा है जो दीर्घकालिक सुरक्षा या संस्थागत सहायता के बिना कठिन परिस्थितियों में काम कर रहे हैं। मुफ्ती ने बताया कि इस स्थिति ने शिक्षण और शोध दोनों को प्रभावित किया है जिससे छात्र शैक्षणिक दिशा और निरंतरता से वंचित रह गए हैं।
उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय प्रशासन की ओर से निर्णय लेने में कमी ने मौजूदा समस्याओं को और बढ़ा दिया है। कुलपति ने स्थिति को सुधारने या बदलने के लिए कोई प्रभावी कदम नहीं उठाया है। उन्होंने तत्काल हस्तक्षेप की मांग करते हुए कहा कि बाबा गुलाम शाह बादशाह विश्वविद्यालय पर सरकार और उच्च शिक्षा अधिकारियों से तत्काल ध्यान देने की आवश्यकता है। उन्होंने आग्रह किया कि संकाय पदों को भरने, बुनियादी ढांचा उपलब्ध कराने और विश्वविद्यालय को उसके मूल उद्देश्यों के अनुरूप संचालित करने के लिए कदम उठाए जाने चाहिएं।
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मुफ्ती ने दोहराया कि यह संस्थान क्षेत्र के युवाओं को सशक्त बनाने के लिए बनाया गया था और इस उद्देश्य की पूर्ति के लिए इसे पुनर्स्थापित किया जाना चाहिए। उन्होंने सभी संबंधित अधिकारियों से इस मामले को प्राथमिकता देने और विश्वविद्यालय को कार्यात्मक और जवाबदेह बनाने की दिशा में काम करने की अपील की।
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विश्वविद्यालय में शिक्षकों और कर्मचारियों की स्थिति पर प्रकाश डालते हुए उन्होंने कहा कि लगभग 80 प्रतिशत पद रिक्त हैं, कोई स्थायी शिक्षक नहीं है और बुनियादी ढांचा अपर्याप्त है। उन्होंने आगे आरोप लगाया कि विश्वविद्यालय वर्तमान में संविदा कर्मचारियों द्वारा चलाया जा रहा है जो दीर्घकालिक सुरक्षा या संस्थागत सहायता के बिना कठिन परिस्थितियों में काम कर रहे हैं। मुफ्ती ने बताया कि इस स्थिति ने शिक्षण और शोध दोनों को प्रभावित किया है जिससे छात्र शैक्षणिक दिशा और निरंतरता से वंचित रह गए हैं।
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उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय प्रशासन की ओर से निर्णय लेने में कमी ने मौजूदा समस्याओं को और बढ़ा दिया है। कुलपति ने स्थिति को सुधारने या बदलने के लिए कोई प्रभावी कदम नहीं उठाया है। उन्होंने तत्काल हस्तक्षेप की मांग करते हुए कहा कि बाबा गुलाम शाह बादशाह विश्वविद्यालय पर सरकार और उच्च शिक्षा अधिकारियों से तत्काल ध्यान देने की आवश्यकता है। उन्होंने आग्रह किया कि संकाय पदों को भरने, बुनियादी ढांचा उपलब्ध कराने और विश्वविद्यालय को उसके मूल उद्देश्यों के अनुरूप संचालित करने के लिए कदम उठाए जाने चाहिएं।
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मुफ्ती ने दोहराया कि यह संस्थान क्षेत्र के युवाओं को सशक्त बनाने के लिए बनाया गया था और इस उद्देश्य की पूर्ति के लिए इसे पुनर्स्थापित किया जाना चाहिए। उन्होंने सभी संबंधित अधिकारियों से इस मामले को प्राथमिकता देने और विश्वविद्यालय को कार्यात्मक और जवाबदेह बनाने की दिशा में काम करने की अपील की।