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Jammu News: बीआरओ के कर्मचारियों ने कुपवाड़ा में विरोध प्रदर्शन किया
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श्रीनगर। बॉर्डर रोड्स ऑर्गेनाइजेशन (बीआरओ) द्वारा शुरू की गई परियोजनाओं में लगे श्रमिकों ने सोमवार को जम्मू-कश्मीर के कुपवाड़ा जिले में विरोध प्रदर्शन किया। इस प्रदर्शन के दौरान उनके द्वारा वन विभाग से कार्यों के लिए मंजूरी प्रमाण पत्र जारी करने की मांग की गई। प्रदर्शनकारियों ने कुपवाड़ा के जिला उपायुक्त के कार्यालय के बाहर कुछ देर के लिए धरना दिया।
एक प्रदर्शनकारी बिलाल ने कहा, हम बीआरओ के साथ मजदूर के रूप में काम करते हैं और हमारी आजीविका इसके द्वारा शुरू की गई परियोजनाओं पर निर्भर करती है। परियोजनाओं पर काम रोक दिया गया है क्योंकि वन विभाग ने इन कार्यों के लिए एनओसी नहीं दी है।
उन्होंने कहा कि कुपवाड़ा जिले में बीआरओ परियोजनाओं पर मजदूर के रूप में काम करके 5,000 से अधिक परिवार अपनी आजीविका कमाते हैं। एक अन्य प्रदर्शनकारी ने कहा, हमें बीआरओ द्वारा जरूरत के आधार पर काम पर रखा जाता है। अगर कोई काम नहीं है तो बीआरओ हमें काम पर नहीं रखेगा। इसलिए उपराज्यपाल और निर्वाचित सरकार से हमारा अनुरोध है कि इन परियोजनाओं के लिए जल्द से जल्द एनओसी जारी की जाए।
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प्रदर्शनकारियों ने कहा कि उनका परिवार भुखमरी का सामना कर रहा है क्योंकि उनके पास काम नहीं है। फारूक नामी एक प्रदर्शनकारी ने कहा, हमारे लिए अपने परिवारों को पालना मुश्किल हो रहा है। हमारे पास आत्महत्या करने के अलावा कोई विकल्प नहीं है।
जानकारी के अनुसार कुपवाड़ा जिले में केरन, कलारूस, हायहामा, करनाह, जिरहामा और आवूरा सहित कई महत्वपूर्ण सीमा सड़क परियोजनाएं वन विभाग की मंजूरी (एनओसी) में देरी के कारण लंबित हैं।
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एक प्रदर्शनकारी बिलाल ने कहा, हम बीआरओ के साथ मजदूर के रूप में काम करते हैं और हमारी आजीविका इसके द्वारा शुरू की गई परियोजनाओं पर निर्भर करती है। परियोजनाओं पर काम रोक दिया गया है क्योंकि वन विभाग ने इन कार्यों के लिए एनओसी नहीं दी है।
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उन्होंने कहा कि कुपवाड़ा जिले में बीआरओ परियोजनाओं पर मजदूर के रूप में काम करके 5,000 से अधिक परिवार अपनी आजीविका कमाते हैं। एक अन्य प्रदर्शनकारी ने कहा, हमें बीआरओ द्वारा जरूरत के आधार पर काम पर रखा जाता है। अगर कोई काम नहीं है तो बीआरओ हमें काम पर नहीं रखेगा। इसलिए उपराज्यपाल और निर्वाचित सरकार से हमारा अनुरोध है कि इन परियोजनाओं के लिए जल्द से जल्द एनओसी जारी की जाए।
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प्रदर्शनकारियों ने कहा कि उनका परिवार भुखमरी का सामना कर रहा है क्योंकि उनके पास काम नहीं है। फारूक नामी एक प्रदर्शनकारी ने कहा, हमारे लिए अपने परिवारों को पालना मुश्किल हो रहा है। हमारे पास आत्महत्या करने के अलावा कोई विकल्प नहीं है।
जानकारी के अनुसार कुपवाड़ा जिले में केरन, कलारूस, हायहामा, करनाह, जिरहामा और आवूरा सहित कई महत्वपूर्ण सीमा सड़क परियोजनाएं वन विभाग की मंजूरी (एनओसी) में देरी के कारण लंबित हैं।