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Jammu News: सीमावर्ती क्षेत्रों के स्वास्थ्य केंद्रों में क्रिटिकल केयर एंबुलेंस नहीं, लोग परेशान
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सांबा। जिले के सीमावर्ती क्षेत्र के ग्रामीणों ने मांग की है कि उनके स्वास्थ्य केंद्रों में क्रिटिकल केयर एंबुलेंस दी जाए, ताकि सीमावर्ती क्षेत्र के लोगों को सरकारी स्वास्थ्य सुविधाओं का लाभ मिल सके।
एडवोकेट देवेंदर सिंह, पूर्व सरपंच दर्शन चौधरी, संजीव चौधरी, यशपाल शर्मा ने कहा कि सीमावर्ती क्षेत्रों में एंबुलेंस नहीं होने से ग्रामीणों को सरकारी सुविधाओं का लाभ नही मिल रहा है। उनके अनुसार गत मई माह में भारत पाकिस्तान के मध्य बने युद्ध के हालात के दौरान सरकार की ओर से सीमावर्ती गांव बैनगलाड़ के पीएचसी में एक क्रिटिकल केयर एंबुलेंस दी गई थी जब सीजफायर हुआ तो एंबुलेंस को वहां से ले गए। उसके बाद पता ही नहीं चला कि एंबुलेंस कहां गई। उन्होंने मांग की कि सीमावर्ती क्षेत्रों में ऐसी एंबुलेंस को तैनात किया जाए। उनके अनुसार सीमावर्ती गांव बैनगलाड़ के पीएचसी में एक छोटी बैन को एंबुलेंस के लिए इस्तेमाल किया जा रहा है। वहीं सीमावर्ती क्षेत्र राजपुरा के सनूरा में पीएचसी में भी एक छोटी बैन को ही एंबुलेंस के तौर पर इस्तेमाल में लाया जा रहा है, जबकि इन क्षेत्रों में क्रिटिकल केयर एंबुलेंस होनी चाहिए ताकि सीमावर्ती क्षेत्र के लोगों को सरकारी स्वास्थ्य सुविधाओं का सही लाभ मिल सके। उन्होंने जम्मू-कश्मीर सरकार से मांग की कि उनके क्षेत्र में क्रिटिकल केयर एंबुलेंस तैनात की जाए।
कोट
पांच क्रिटिकल केयर एंबुलेंस की मांग सरकार के सामने रखी थी। उनमें से दो एंबुलेंस जिले को दी गई थी। जब भारत-पाकिस्तान के युद्ध के हालात बने थे तो दो एंबुलेंस हमें दी गई थी। एक हमने बैनगलाड क्षेत्र को दी तो दूसरी रामगढ़ के रंगूर क्षेत्र में भेजी गई। हालात सामान्य होने पर एक जिला अस्पताल भेजी गई तो दूसरी रामगढ़ अस्पताल में। अभी उनकी मरम्मत भी की जानी है। इसके बाद ही यह 108 के तहत उपलब्ध होंगी।
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-डॉ. विधि भटियाल, सीएमओ जिला स्वास्थ्य विभाग सांबा
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एडवोकेट देवेंदर सिंह, पूर्व सरपंच दर्शन चौधरी, संजीव चौधरी, यशपाल शर्मा ने कहा कि सीमावर्ती क्षेत्रों में एंबुलेंस नहीं होने से ग्रामीणों को सरकारी सुविधाओं का लाभ नही मिल रहा है। उनके अनुसार गत मई माह में भारत पाकिस्तान के मध्य बने युद्ध के हालात के दौरान सरकार की ओर से सीमावर्ती गांव बैनगलाड़ के पीएचसी में एक क्रिटिकल केयर एंबुलेंस दी गई थी जब सीजफायर हुआ तो एंबुलेंस को वहां से ले गए। उसके बाद पता ही नहीं चला कि एंबुलेंस कहां गई। उन्होंने मांग की कि सीमावर्ती क्षेत्रों में ऐसी एंबुलेंस को तैनात किया जाए। उनके अनुसार सीमावर्ती गांव बैनगलाड़ के पीएचसी में एक छोटी बैन को एंबुलेंस के लिए इस्तेमाल किया जा रहा है। वहीं सीमावर्ती क्षेत्र राजपुरा के सनूरा में पीएचसी में भी एक छोटी बैन को ही एंबुलेंस के तौर पर इस्तेमाल में लाया जा रहा है, जबकि इन क्षेत्रों में क्रिटिकल केयर एंबुलेंस होनी चाहिए ताकि सीमावर्ती क्षेत्र के लोगों को सरकारी स्वास्थ्य सुविधाओं का सही लाभ मिल सके। उन्होंने जम्मू-कश्मीर सरकार से मांग की कि उनके क्षेत्र में क्रिटिकल केयर एंबुलेंस तैनात की जाए।
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पांच क्रिटिकल केयर एंबुलेंस की मांग सरकार के सामने रखी थी। उनमें से दो एंबुलेंस जिले को दी गई थी। जब भारत-पाकिस्तान के युद्ध के हालात बने थे तो दो एंबुलेंस हमें दी गई थी। एक हमने बैनगलाड क्षेत्र को दी तो दूसरी रामगढ़ के रंगूर क्षेत्र में भेजी गई। हालात सामान्य होने पर एक जिला अस्पताल भेजी गई तो दूसरी रामगढ़ अस्पताल में। अभी उनकी मरम्मत भी की जानी है। इसके बाद ही यह 108 के तहत उपलब्ध होंगी।
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-डॉ. विधि भटियाल, सीएमओ जिला स्वास्थ्य विभाग सांबा