{"_id":"69f3c214a126fec4b90f1c75","slug":"jammu-kashmir-news-samba-news-c-289-1-sba1003-112221-2026-05-01","type":"story","status":"publish","title_hn":"Jammu News: सांबा कोर्ट ने जमीनी विवाद को आपराधिक रंग देने के प्रयास को किया खारिज","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Jammu News: सांबा कोर्ट ने जमीनी विवाद को आपराधिक रंग देने के प्रयास को किया खारिज
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
सांबा। सांबा के अतिरिक्त मुंसिफ (न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम श्रेणी) की अदालत ने एक आदेश पारित करते हुए दीवानी (सिविल) विवाद को आपराधिक मामले में बदलने की कोशिश पर सख्त रुख अपनाया है।
न्यायालय ने ग्राम सलमेरी तहसील विजयपुर से संबंधित एक भूखंड के विवाद में आरोपी राहुल शर्मा के विरुद्ध एफआईआर दर्ज करने की मांग वाली याचिका को खारिज कर दिया है। शिकायतकर्ता मदन लाल और शशि पाल ने आवेदन दायर कर आरोप लगाया था कि विपक्षी दल ने उनकी भूमि पर अवैध कब्जा करने का प्रयास किया। उन पर घातक हथियारों से हमला किया। हालांकि पुलिस द्वारा प्रस्तुत रिपोर्ट और तथ्यों के विश्लेषण के बाद अदालत ने इन आरोपों को निराधार पाया।
न्यायाधीश कृतिका सेठी ने अपने आदेश में स्पष्ट किया कि संबंधित भूमि पहले से ही दीवानी मुकदमेबाजी का विषय है। वर्तमान में मुंसिफ कोर्ट सांबा में लंबित है। अदालत ने पुलिस जांच रिपोर्ट का संज्ञान लेते हुए कहा कि कथित जानलेवा हमले के कोई पुख्ता सबूत नहीं मिले हैं। शिकायतकर्ताओं के बयानों में भारी विरोधाभास है। न्यायालय ने सुप्रीम कोर्ट के विभिन्न फैसलों का हवाला देते हुए टिप्पणी की कि आपराधिक न्याय प्रणाली का उपयोग निजी प्रतिशोध लेने या दीवानी विवादों में दबाव बनाने के औजार के रूप में नहीं किया जा सकता।
विज्ञापन
अदालत ने निष्कर्ष निकाला कि मामला पूरी तरह से दीवानी प्रकृति का है। इसे आपराधिक रंग देना कानून की प्रक्रिया का दुरुपयोग है। इसके आधार पर याचिका को सुनवाई के अयोग्य मानते हुए खारिज कर दिया गया।
विज्ञापन
न्यायालय ने ग्राम सलमेरी तहसील विजयपुर से संबंधित एक भूखंड के विवाद में आरोपी राहुल शर्मा के विरुद्ध एफआईआर दर्ज करने की मांग वाली याचिका को खारिज कर दिया है। शिकायतकर्ता मदन लाल और शशि पाल ने आवेदन दायर कर आरोप लगाया था कि विपक्षी दल ने उनकी भूमि पर अवैध कब्जा करने का प्रयास किया। उन पर घातक हथियारों से हमला किया। हालांकि पुलिस द्वारा प्रस्तुत रिपोर्ट और तथ्यों के विश्लेषण के बाद अदालत ने इन आरोपों को निराधार पाया।
विज्ञापन
न्यायाधीश कृतिका सेठी ने अपने आदेश में स्पष्ट किया कि संबंधित भूमि पहले से ही दीवानी मुकदमेबाजी का विषय है। वर्तमान में मुंसिफ कोर्ट सांबा में लंबित है। अदालत ने पुलिस जांच रिपोर्ट का संज्ञान लेते हुए कहा कि कथित जानलेवा हमले के कोई पुख्ता सबूत नहीं मिले हैं। शिकायतकर्ताओं के बयानों में भारी विरोधाभास है। न्यायालय ने सुप्रीम कोर्ट के विभिन्न फैसलों का हवाला देते हुए टिप्पणी की कि आपराधिक न्याय प्रणाली का उपयोग निजी प्रतिशोध लेने या दीवानी विवादों में दबाव बनाने के औजार के रूप में नहीं किया जा सकता।
विज्ञापन
अदालत ने निष्कर्ष निकाला कि मामला पूरी तरह से दीवानी प्रकृति का है। इसे आपराधिक रंग देना कानून की प्रक्रिया का दुरुपयोग है। इसके आधार पर याचिका को सुनवाई के अयोग्य मानते हुए खारिज कर दिया गया।