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जेकेआरटीसी में अब चालक परिचालक ठेके पर रखे जाएंगे
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जम्मू। जम्मू-कश्मीर रोड ट्रांसपोर्टर कारपोरेशन (जेकेआरटीसी) में अब चालक व परिचालक की नियमित भर्ती नहीं होगी। जेकेआरटीसी में ठेके पर चालकों और परिचालकों को तैनात करेगी। इसके लिए पांच कंपनियों को ठेका दिया गया है। यह कंपनियां अब चालक-परिचालक मुहैया करवाएंगी।
जेकेआरटीसी में चालकों और परिचालकों की बड़ी कमी है। इस कमी को दूर करने के लिए ठेके पर भर्ती शुरू की है। जेकेआरटीसी ने इसके लिए एजेंसी, एनजीओ और कंपनियों से आवेदन मांगे थे। इसमें दस से अधिक कंपनियों ने आवेदन किया था, जिसमें से पांच कंपनियों को ठेका दिया गया है। जेकेआरटीसी वित्त घाटे के साथ चालकों और परिचालकों की कमी से जूझ रही है। इस कमी को पूरा करने लिए सरकार ने आउटसोर्सिंग से स्टॉफ तैनात करने का फैसला लिया है। जेकेआरटीसी के बेड़े में 500 नए वाहन भी शामिल हो रहे हैं। ऐसे में चालक और परिचालकों की कमी न हो इसके लिए यह पहल की गई है।
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कर्मचारी बोले-आउटसोर्सिंग कर्मचारियों के हित में नहीं
जेकेआरटीसी वर्कर्स यूनियन के अध्यक्ष वजात हुसैन ने कहा कि सरकार का फैसला कर्मचारियों और कारपोरेशन के हित में नहीं है। सरकार निजीकरण को बढ़ावा दे रही है। सरकार का यह कदम यात्री सुरक्षा के लिए अच्छा नहीं है। जेकेआरटीसी में तैनात चालक-परिचालक यहां के रूट से परिचत हैं। कारपोरेशन का एक्सीडेंट अनुपात एक फीसदी से भी कम है। आउटसोर्सिंग के तहत तैनात होने वाले चालक-परिचालक जेकेआरटीसी की बसों से अवगत नहीं हैं, ऐसे में यह यात्री सुरक्षा के लिए ठीक नहीं है।
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10 वर्ष से अधिक तैनात चालक नियमित किएं
जेकेआरटीसी में 320 के करीब ऐसे चालक-परिचालक हैं जो 10 साले से ज्यादा समय से अपनी सेवाएं दे रहे है। कारपोरेशन इन्हें नियमित नहीं कर रही, लेकिन आउटसोर्स पर लोगों को रख रही है। कर्मचारियों को 5 महीने से वेतन नहीं मिला है तो निजी कंपिनयों को पैसा कहां से दिया जाएगा।
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कोट
आउटसोर्सिंग के तहत कारपोरेशन में चालकों और परिचालकों को तैनात किया जा रहा है। हमारे पास दस के करीब कंपनियों नेे आवेदन किया था, जिसमें से पांच को ठेका दिया गया है। यह कंपनियां अब चालक और परिचालक मुहैया करवाएंगी। कारपोरेशन को वित्त रूप से मजबूत करना इसका उद्देश्य है।
अंग्रेज सिंह, एमडी जेकेआरटीसी
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जेकेआरटीसी में चालकों और परिचालकों की बड़ी कमी है। इस कमी को दूर करने के लिए ठेके पर भर्ती शुरू की है। जेकेआरटीसी ने इसके लिए एजेंसी, एनजीओ और कंपनियों से आवेदन मांगे थे। इसमें दस से अधिक कंपनियों ने आवेदन किया था, जिसमें से पांच कंपनियों को ठेका दिया गया है। जेकेआरटीसी वित्त घाटे के साथ चालकों और परिचालकों की कमी से जूझ रही है। इस कमी को पूरा करने लिए सरकार ने आउटसोर्सिंग से स्टॉफ तैनात करने का फैसला लिया है। जेकेआरटीसी के बेड़े में 500 नए वाहन भी शामिल हो रहे हैं। ऐसे में चालक और परिचालकों की कमी न हो इसके लिए यह पहल की गई है।
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कर्मचारी बोले-आउटसोर्सिंग कर्मचारियों के हित में नहीं
जेकेआरटीसी वर्कर्स यूनियन के अध्यक्ष वजात हुसैन ने कहा कि सरकार का फैसला कर्मचारियों और कारपोरेशन के हित में नहीं है। सरकार निजीकरण को बढ़ावा दे रही है। सरकार का यह कदम यात्री सुरक्षा के लिए अच्छा नहीं है। जेकेआरटीसी में तैनात चालक-परिचालक यहां के रूट से परिचत हैं। कारपोरेशन का एक्सीडेंट अनुपात एक फीसदी से भी कम है। आउटसोर्सिंग के तहत तैनात होने वाले चालक-परिचालक जेकेआरटीसी की बसों से अवगत नहीं हैं, ऐसे में यह यात्री सुरक्षा के लिए ठीक नहीं है।
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10 वर्ष से अधिक तैनात चालक नियमित किएं
जेकेआरटीसी में 320 के करीब ऐसे चालक-परिचालक हैं जो 10 साले से ज्यादा समय से अपनी सेवाएं दे रहे है। कारपोरेशन इन्हें नियमित नहीं कर रही, लेकिन आउटसोर्स पर लोगों को रख रही है। कर्मचारियों को 5 महीने से वेतन नहीं मिला है तो निजी कंपिनयों को पैसा कहां से दिया जाएगा।
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कोट
आउटसोर्सिंग के तहत कारपोरेशन में चालकों और परिचालकों को तैनात किया जा रहा है। हमारे पास दस के करीब कंपनियों नेे आवेदन किया था, जिसमें से पांच को ठेका दिया गया है। यह कंपनियां अब चालक और परिचालक मुहैया करवाएंगी। कारपोरेशन को वित्त रूप से मजबूत करना इसका उद्देश्य है।
अंग्रेज सिंह, एमडी जेकेआरटीसी