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Jammu News: प्रदेश में अब राशन कार्ड धारक परिवारों का सत्यापन नहीं होगा
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कैबिनेट मंत्री सतीश शर्मा बजट सत्र के दौरान सवालों का जवाब देते हुए।
- फोटो : jammu news
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अमर उजाला ब्यूरो
जम्मू। जम्मू-कश्मीर में पात्र परिवारों को अंत्योदय अन्न योजना (एएवाई) और बीपीएल की सूची से हटाकर और अपात्र परिवारों को इस सूची में शामिल करने का मुद्दा गूंजा। विधायकों ने आरोप लगाया कि पैसे लेकर अपात्र लोगों को सूची में शामिल किया गया है, जबकि गरीब परिवारों को बाहर निकाला गया।
सरकार द्वारा जारी आदेश की आड़ में अधिकारियों ने यह खेल खेला है। खाद्य, नागरिक आपूर्ति और उपभोक्ता मामले विभाग के मंत्री सतीश शर्मा ने कहा कि जीएडी 24 दिसंबर 2024 के आदेश को स्थगित किया जाता है।
नेकां विधायक मीर सैफुल्लाह ने पूरक प्रश्न में पूछा कि 2011 की जनसंख्या के आधार पर विस्तृत सत्यापन के बाद लोगों को बीपीएल और एएवाई में जोड़ा गया और उन्हें राशन मिल रहा था। 2024 में सामान्य प्रशासन विभाग ने एक आदेश जारी कर राशन कार्ड के सत्यापन का फैसला लिया। इस आदेश की आड़ में पात्र लोगों को बीपीएल और एएवाई से हटाया जा रहा है। इसमें विभाग के अधिकारी भी शामिल हैं। मंत्री सतीश शर्मा ने विधायकों से अपात्र लोगों की सूची उन्हें देने को कहा। इस पर सज्जाद गनी लोन ने कहा कि विधायकों को लोगाें को राशन कार्ड में शामिल करने की अनुमति दी जाए न कि उससे निकालने की। कांग्रेस विधायक जीए मीर, अब्दुल रहमान वीरी, भाजपा विधायक विक्रम रंधावा ने चिंता जताई और कहा कि अपात्र लोगों को बीपीएल और एएवाई में शामिल किया है। वीरी ने इस आदेश को एक साल तक स्थगित करने को कहा।
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भाजपा विधायक विक्रम रंधावा ने कहा कि सरकार को बीपीएल कार्ड धारक परिवार के घर के बाहर यह लिखना चाहिए कि मैं बीपीएल कार्ड धारक हूं, जिससे खुद-खुद तय होगा कि कौन पात्र है या अपात्र। विधायकों की चिंताओं का जवाब देते हुए मंत्री सतीश शर्मा ने कहा कि हम फिलहाल जीएडी के इस आदेश को स्थगित करते हैं।
इससे पहले राशन कार्ड से ही जुड़े एक अन्य प्रश्न में पुंछ से विधायक एजाज अहमद जान ने आरोप लगाया की पुंछ में 15-15 हजार रुपये लेकर अपात्र लोगों को बीपीएल और एएवाई में जोड़ा गया है। उन्होंने कहा कि सरकार के पास कोई डेटा नहीं है कि उन्होने 2022-2024 तक कितने लोगों को बीपीएल और एएवाई में जोड़ा या बाहर निकाला है।
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जम्मू। जम्मू-कश्मीर में पात्र परिवारों को अंत्योदय अन्न योजना (एएवाई) और बीपीएल की सूची से हटाकर और अपात्र परिवारों को इस सूची में शामिल करने का मुद्दा गूंजा। विधायकों ने आरोप लगाया कि पैसे लेकर अपात्र लोगों को सूची में शामिल किया गया है, जबकि गरीब परिवारों को बाहर निकाला गया।
सरकार द्वारा जारी आदेश की आड़ में अधिकारियों ने यह खेल खेला है। खाद्य, नागरिक आपूर्ति और उपभोक्ता मामले विभाग के मंत्री सतीश शर्मा ने कहा कि जीएडी 24 दिसंबर 2024 के आदेश को स्थगित किया जाता है।
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नेकां विधायक मीर सैफुल्लाह ने पूरक प्रश्न में पूछा कि 2011 की जनसंख्या के आधार पर विस्तृत सत्यापन के बाद लोगों को बीपीएल और एएवाई में जोड़ा गया और उन्हें राशन मिल रहा था। 2024 में सामान्य प्रशासन विभाग ने एक आदेश जारी कर राशन कार्ड के सत्यापन का फैसला लिया। इस आदेश की आड़ में पात्र लोगों को बीपीएल और एएवाई से हटाया जा रहा है। इसमें विभाग के अधिकारी भी शामिल हैं। मंत्री सतीश शर्मा ने विधायकों से अपात्र लोगों की सूची उन्हें देने को कहा। इस पर सज्जाद गनी लोन ने कहा कि विधायकों को लोगाें को राशन कार्ड में शामिल करने की अनुमति दी जाए न कि उससे निकालने की। कांग्रेस विधायक जीए मीर, अब्दुल रहमान वीरी, भाजपा विधायक विक्रम रंधावा ने चिंता जताई और कहा कि अपात्र लोगों को बीपीएल और एएवाई में शामिल किया है। वीरी ने इस आदेश को एक साल तक स्थगित करने को कहा।
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भाजपा विधायक विक्रम रंधावा ने कहा कि सरकार को बीपीएल कार्ड धारक परिवार के घर के बाहर यह लिखना चाहिए कि मैं बीपीएल कार्ड धारक हूं, जिससे खुद-खुद तय होगा कि कौन पात्र है या अपात्र। विधायकों की चिंताओं का जवाब देते हुए मंत्री सतीश शर्मा ने कहा कि हम फिलहाल जीएडी के इस आदेश को स्थगित करते हैं।
इससे पहले राशन कार्ड से ही जुड़े एक अन्य प्रश्न में पुंछ से विधायक एजाज अहमद जान ने आरोप लगाया की पुंछ में 15-15 हजार रुपये लेकर अपात्र लोगों को बीपीएल और एएवाई में जोड़ा गया है। उन्होंने कहा कि सरकार के पास कोई डेटा नहीं है कि उन्होने 2022-2024 तक कितने लोगों को बीपीएल और एएवाई में जोड़ा या बाहर निकाला है।