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Jammu News: दो वर्ष बाद भी प्रदेश में सीसीटीवी एकीकृत नेटवर्क सिस्टम तैयार नहीं
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जम्मू। प्रदेश में सीसीटीवी एकीकृत नेटवर्क सिस्टम दो वर्ष बाद भी तैयार नहीं हो सका है। इस सिस्टम के माध्यम से संवेदनशील जगहों की 24 घंटे निगरानी की जानी थी। इस सिस्टम के तहत जोनल और जिला स्तरीय कमांडर सेंटर विकसित किए जाने थे। हालांकि पुलिस महकमे का दावा है कि अगले तीन महीनों के भीतर ये सिस्टम तैयार कर लिया जाएगा। कुछ तकनीकी कारणों की वजह से काम पूरा नहीं हो सका।
इस परियोजना के तहत प्रमुख सार्वजनिक क्षेत्रों की सीसीटीवी निगरानी करना है। यहां दिनभर भीड़ रहती है। जो आपराधिक स्तर पर अतिसंवेदनशील है। सिस्टम के तहत स्वचालित नंबर प्लेट पहचान प्रणाली (एएनपीआर), चेहरे की पहचान प्रणाली (एफआरएस) और कमांड सेंटर आदि प्रस्तावित है। ताकि त्वरित और प्रभावी समाधान किसी घटना के वक्त निकाला जा सके।
जानकारी के अनुसार शुरुआत में कश्मीर में 43 स्थलों पर 184 व जम्मू में 119 स्थलों पर 218 कैमरे लगाए जाने हैं। श्रीनगर जिले के सभी पांच क्षेत्रों उत्तर, दक्षिण और हजरतबल व जम्मू के उत्तर, दक्षिण, पश्चिम और पूर्व और ग्रामीण क्षेत्र कवर होने हैं, लेकिन अभी तक अधिकतर जिलों में सीसीटीवी नहीं लग पाए। कई जिले इसमें शामिल हैं।
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कुछ जिलों में लगे हैं कैमरे
जानकारी के अनुसार सांबा, श्रीनगर और जम्मू शहर में कुछ जगहों पर सीसीटीवी कैमरे लगे हैं। इसके लिए श्रीनगर और जम्मू में एक पुलिस नियंत्रण कक्ष (पीसीआर) भी स्थापित किया है। लेकिन इन सेंटरों में अपने अपने जिले का सीसीटीवी सिस्टम है। जबकि पूरे प्रदेश में लगाए जाने वाले सिस्टम में जम्मू के लिए जम्मू में जोनल सेंटर और कश्मीर के लिए श्रीनगर में जोनल सिस्टम बनना है। सिस्टम में भूगौलिक जानकारी वाले सीसीटीवी शामिल हैं।
इसलिए बनी परियोजना
पिछले कुछ वर्षों में आतंकवाद और नारको आतंकवाद की घटनाएं बढ़ी हैं। इस परियोजना का मकसद संवेदनशील जगहों पर शरारती तत्वों, संदिग्ध गतिविधियों और एक्सीडेंट जैसी वारदातों पर नजर रखना है। क्योंकि बीते वर्षों में इससे जुड़ी वारदातें बढ़ी हैं। इसलिए निर्णय लिया गया कि हर एक जिले में प्रवेश और निकास, महत्वपूर्ण चौक चौराहों, क्रासिंग जंक्शन पर इन्हें इंस्टाल किया जाए।
90 फीसदी काम हो चुका
परियोजना दो वर्ष पहले ही पूरी हो जानी चाहिए थी। कुछ तकनीकी कारणों की वजह से पूरी नहीं हो सकी, लेकिन 90 फीसदी काम हो चुका है। उम्मीद है कि अगले दो से तीन महीने में इसका काम पूरा कर लिया जाएगा। रही बात इस परियोजना पर खर्च की तो इसका लेखा जोखा पुलिस मुख्यालय के पास है।
-सुजित कुमार, आईजी एवं इंचार्ज परियोजना
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इस परियोजना के तहत प्रमुख सार्वजनिक क्षेत्रों की सीसीटीवी निगरानी करना है। यहां दिनभर भीड़ रहती है। जो आपराधिक स्तर पर अतिसंवेदनशील है। सिस्टम के तहत स्वचालित नंबर प्लेट पहचान प्रणाली (एएनपीआर), चेहरे की पहचान प्रणाली (एफआरएस) और कमांड सेंटर आदि प्रस्तावित है। ताकि त्वरित और प्रभावी समाधान किसी घटना के वक्त निकाला जा सके।
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जानकारी के अनुसार शुरुआत में कश्मीर में 43 स्थलों पर 184 व जम्मू में 119 स्थलों पर 218 कैमरे लगाए जाने हैं। श्रीनगर जिले के सभी पांच क्षेत्रों उत्तर, दक्षिण और हजरतबल व जम्मू के उत्तर, दक्षिण, पश्चिम और पूर्व और ग्रामीण क्षेत्र कवर होने हैं, लेकिन अभी तक अधिकतर जिलों में सीसीटीवी नहीं लग पाए। कई जिले इसमें शामिल हैं।
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कुछ जिलों में लगे हैं कैमरे
जानकारी के अनुसार सांबा, श्रीनगर और जम्मू शहर में कुछ जगहों पर सीसीटीवी कैमरे लगे हैं। इसके लिए श्रीनगर और जम्मू में एक पुलिस नियंत्रण कक्ष (पीसीआर) भी स्थापित किया है। लेकिन इन सेंटरों में अपने अपने जिले का सीसीटीवी सिस्टम है। जबकि पूरे प्रदेश में लगाए जाने वाले सिस्टम में जम्मू के लिए जम्मू में जोनल सेंटर और कश्मीर के लिए श्रीनगर में जोनल सिस्टम बनना है। सिस्टम में भूगौलिक जानकारी वाले सीसीटीवी शामिल हैं।
इसलिए बनी परियोजना
पिछले कुछ वर्षों में आतंकवाद और नारको आतंकवाद की घटनाएं बढ़ी हैं। इस परियोजना का मकसद संवेदनशील जगहों पर शरारती तत्वों, संदिग्ध गतिविधियों और एक्सीडेंट जैसी वारदातों पर नजर रखना है। क्योंकि बीते वर्षों में इससे जुड़ी वारदातें बढ़ी हैं। इसलिए निर्णय लिया गया कि हर एक जिले में प्रवेश और निकास, महत्वपूर्ण चौक चौराहों, क्रासिंग जंक्शन पर इन्हें इंस्टाल किया जाए।
90 फीसदी काम हो चुका
परियोजना दो वर्ष पहले ही पूरी हो जानी चाहिए थी। कुछ तकनीकी कारणों की वजह से पूरी नहीं हो सकी, लेकिन 90 फीसदी काम हो चुका है। उम्मीद है कि अगले दो से तीन महीने में इसका काम पूरा कर लिया जाएगा। रही बात इस परियोजना पर खर्च की तो इसका लेखा जोखा पुलिस मुख्यालय के पास है।
-सुजित कुमार, आईजी एवं इंचार्ज परियोजना