{"_id":"676f050c82ae83d0740836e4","slug":"jammu-kashmir-news-jammu-news-c-10-lko1027-511237-2024-12-28","type":"story","status":"publish","title_hn":"Jammu News: प्रदेश में अखरोट, पीकन नट्स की नई किस्में लगेंगी","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Jammu News: प्रदेश में अखरोट, पीकन नट्स की नई किस्में लगेंगी
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
जम्मू। प्रदेश में नए साल में अखरोट और पीकन नट्स की नई किस्में उगाई जाएंगी। अखरोट की नई किस्म के पौधे तीन से चार साल में फल देने लगेंगे। पीकन भी सात से आठ साल में फल देने लगेगा। हालांकि पुरानी किस्में 15 से 20 साल में फल देती हैं। नई किस्म के पौधों से पैदावार ज्यादा होगी। इनके नाम प्रदेश स्तरीय कमेटी की ओर से रखे जाने हैं। इसके बाद केंद्रीय कमेटी अंतिम फैसला लेगी। स्काॅस्ट जम्मू में इस पर 2015 से शोध चल रहा है। नए साल में नई किस्मों के पौधों को लांच किया जाना है।
नई किस्म के अखरोट की खास बात यह है कि इसका छिलका अलग नहीं होता। फल पकने के बाद खुद अलग करना पड़ता है। काेहरे की मार नहीं पड़ेगी। एक हेक्टेयर भूमि में 160 से 170 पौधे लगाए जा सकते हैं। हालांकि पुरानी किस्मों के पौधे प्रति हेक्टेयर 70 से 80 ही लग पाते थे। पौधे बड़े आकार के होते थे। इस कारण जगह ज्यादा घेरते थे। नई किस्मों के पौधे छोटे आकार के हैं। इनसे एक तो पैदावार में बढ़ोतरी होगी, वहीं अन्य राज्यों में भी निर्यात हो सकेगा।
-- -- -- -- -- -- -
पुंछ, किश्तवाड़, उधमपुर और राजोरी में होती है पीकन की खेती
प्रदेश में पीकन नट्स की पैदावार पुंछ, किश्तवाड़, उधमपुर और राजोरी में होती है। नई किस्म के 100 ग्राम में गिरी 65 ग्राम तक निकलती है, जबकि पुरानी किस्म में 30 से 35 ग्राम ही गिरी निकलती थी। पीकन नट्स की गिरी खाने में स्वादिष्ट है। इसकी सर्दी में डिमांड ज्यादा रहती है। पुंछ में इसकी पुरानी किस्मों के पौधे ही हैं। वहीं, पर्वतीय अखरोट में भी गिरी 60 से 100 ग्राम ही निकलती है। जम्मू-कश्मीर में अखरोट 87 हजार हेक्टेयर में होता है। तीन लाख मीट्रिक टन के करीब पैदावार होती है।
विज्ञापन
-- -- -- -- -- -- --
अखरोट और पीकन फ्रूट की नई किस्में नए साल में लांच की जाएंगी। इस पर प्रदेश और केंद्रीय स्तर पर कमेटी फैसला लेगी। इसके बाद इन्हें लांच किया जाएगा।
- डा. प्रशांत बख्शी, एचओडी, बागवानी, स्काॅस्ट जम्मू
विज्ञापन
नई किस्म के अखरोट की खास बात यह है कि इसका छिलका अलग नहीं होता। फल पकने के बाद खुद अलग करना पड़ता है। काेहरे की मार नहीं पड़ेगी। एक हेक्टेयर भूमि में 160 से 170 पौधे लगाए जा सकते हैं। हालांकि पुरानी किस्मों के पौधे प्रति हेक्टेयर 70 से 80 ही लग पाते थे। पौधे बड़े आकार के होते थे। इस कारण जगह ज्यादा घेरते थे। नई किस्मों के पौधे छोटे आकार के हैं। इनसे एक तो पैदावार में बढ़ोतरी होगी, वहीं अन्य राज्यों में भी निर्यात हो सकेगा।
विज्ञापन
पुंछ, किश्तवाड़, उधमपुर और राजोरी में होती है पीकन की खेती
प्रदेश में पीकन नट्स की पैदावार पुंछ, किश्तवाड़, उधमपुर और राजोरी में होती है। नई किस्म के 100 ग्राम में गिरी 65 ग्राम तक निकलती है, जबकि पुरानी किस्म में 30 से 35 ग्राम ही गिरी निकलती थी। पीकन नट्स की गिरी खाने में स्वादिष्ट है। इसकी सर्दी में डिमांड ज्यादा रहती है। पुंछ में इसकी पुरानी किस्मों के पौधे ही हैं। वहीं, पर्वतीय अखरोट में भी गिरी 60 से 100 ग्राम ही निकलती है। जम्मू-कश्मीर में अखरोट 87 हजार हेक्टेयर में होता है। तीन लाख मीट्रिक टन के करीब पैदावार होती है।
विज्ञापन
अखरोट और पीकन फ्रूट की नई किस्में नए साल में लांच की जाएंगी। इस पर प्रदेश और केंद्रीय स्तर पर कमेटी फैसला लेगी। इसके बाद इन्हें लांच किया जाएगा।
- डा. प्रशांत बख्शी, एचओडी, बागवानी, स्काॅस्ट जम्मू