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Jammu News: अब 20 जनवरी को जारी होगी अंतिम पंचायत मतदाता सूची
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जम्मू। राज्य चुनाव आयोग जम्मू-कश्मीर की ओर से पंचायत मतदाता सूची-2025 के लिए संशोधन कार्यक्रम जारी किया गया है। इसके तहत 26 दिसंबर तक दावे और आपत्तियां दाखिल करवाए जा सकते हैं, जिनका संबंधित ईआरओ की ओर से 6 जनवरी तक निपटान किया जाएगा और अंतिम पंचायत मतदाता सूची 2025 का प्रकाशन 20 जनवरी को किया जाएगा।
आयोग की ओर से दूसरी बार संशोधित कार्यक्रम जारी किया गया है। इससे पहले 15 जनवरी को अंतिम सूची जारी की जानी थी। वहीं पंचायतों में ओबीसी आरक्षण के लिए ओबीसी आयोग काम कर रहा है। इसके लिए जिला उपायुक्तों से जाति डेटा मांगा गया है।
राज्य चुनाव आयुक्त बीआर शर्मा के अनुसार संशोधित कार्यक्रम में सभी पहलुओं को ध्यान में रखते हुए काम किया जा रहा है। प्रासंगिक रूप से आयोग को विभिन्न जिलों से दावों और आपत्तियों की पंचिंग की तिथि बढ़ाने के लिए अनुरोध प्राप्त हुए थे, क्योंकि अंतिम चरण में बड़ी संख्या में आवेदन (दावे और आपत्तियां) प्राप्त हुए थे और उनकी पंचिंग अभी लंबित थी, जिससे तिथियां बढ़ाई गई हैं।
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ग्रामीण विकास विभाग के एक उच्चाधिकारी ने बताया कि ओबीसी आयोग की सिफारिशों पर आबादी के आधार पर ओबीसी वर्ग का आरक्षण किया जाएगा। इसमें देखा जाता है कि किस पंचायत में ओबीसी की आबादी कितनी बढ़ी है। ओबीसी आरक्षण की रिपोर्ट कैबिनेट में जाती है, जिसके बाद सरकार की मंजूरी मिलती है। लेकिन आरक्षण की प्रक्रिया के लिए कम से कम डेढ़ से दो माह का समय लगता है। इससे चुनाव मार्च से मई के बीच में करवाए जा सकते हैं। जम्मू कश्मीर पंचायत राज अधिनियम 1989 की सेक्शन 2 जे के एक प्रावधान में पंचायतों का नए सिरे से परिसीमन किया जा सकता है। इसमें पहाड़ी क्षेत्र की एक पंचायत में 3000 और मैदानी इलाके में 4500 आबादी से अधिक होने पर परिसीमन किया जा सकता है। लेकिन ओबीसी आयोग की रिपोर्ट के बाद ही पंचायत चुनाव पर कोई फैसला लिया जाएगा। जम्मू कश्मीर में पहली बार पंचायत चुनाव में ओबीसी को आरक्षण दिया जा रहा है।
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आयोग की ओर से दूसरी बार संशोधित कार्यक्रम जारी किया गया है। इससे पहले 15 जनवरी को अंतिम सूची जारी की जानी थी। वहीं पंचायतों में ओबीसी आरक्षण के लिए ओबीसी आयोग काम कर रहा है। इसके लिए जिला उपायुक्तों से जाति डेटा मांगा गया है।
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राज्य चुनाव आयुक्त बीआर शर्मा के अनुसार संशोधित कार्यक्रम में सभी पहलुओं को ध्यान में रखते हुए काम किया जा रहा है। प्रासंगिक रूप से आयोग को विभिन्न जिलों से दावों और आपत्तियों की पंचिंग की तिथि बढ़ाने के लिए अनुरोध प्राप्त हुए थे, क्योंकि अंतिम चरण में बड़ी संख्या में आवेदन (दावे और आपत्तियां) प्राप्त हुए थे और उनकी पंचिंग अभी लंबित थी, जिससे तिथियां बढ़ाई गई हैं।
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ग्रामीण विकास विभाग के एक उच्चाधिकारी ने बताया कि ओबीसी आयोग की सिफारिशों पर आबादी के आधार पर ओबीसी वर्ग का आरक्षण किया जाएगा। इसमें देखा जाता है कि किस पंचायत में ओबीसी की आबादी कितनी बढ़ी है। ओबीसी आरक्षण की रिपोर्ट कैबिनेट में जाती है, जिसके बाद सरकार की मंजूरी मिलती है। लेकिन आरक्षण की प्रक्रिया के लिए कम से कम डेढ़ से दो माह का समय लगता है। इससे चुनाव मार्च से मई के बीच में करवाए जा सकते हैं। जम्मू कश्मीर पंचायत राज अधिनियम 1989 की सेक्शन 2 जे के एक प्रावधान में पंचायतों का नए सिरे से परिसीमन किया जा सकता है। इसमें पहाड़ी क्षेत्र की एक पंचायत में 3000 और मैदानी इलाके में 4500 आबादी से अधिक होने पर परिसीमन किया जा सकता है। लेकिन ओबीसी आयोग की रिपोर्ट के बाद ही पंचायत चुनाव पर कोई फैसला लिया जाएगा। जम्मू कश्मीर में पहली बार पंचायत चुनाव में ओबीसी को आरक्षण दिया जा रहा है।