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Jammu News: जम्मू में बेअसर रहा भारत बंद, व्यापारिक प्रतिष्ठान खुले रहे, यातायात सामान्य रहा
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जम्मू। सुप्रीम कोर्ट के एससी आरक्षण में कोटा लागू करने की इजाजत देने के खिलाफ बुधवार को एससी एसटी मोर्चा के बैनर तले प्रदर्शन किया गया। आंबेडकर चौक जम्मू में जुटे समुदाय के लोगों ने एक स्वर में सुप्रीम कोर्ट के फैसले का विरोध किया। इसके बाद मंडलायुक्त कार्यालय में मांगों के समर्थन में ज्ञापन सौंपा। हालांकि देशभर में भारत बंद की काॅल का कोई असर जम्मू में नहीं दिखा। वाहनों की आवाजाही से लेकर व्यापारिक प्रतिष्ठान सामान्य रूप से बहाल रहे।
मोर्चा ने एससी एसटी में वर्गीकरण बंद करने, कालेजियम सिस्टम को बंद कर इसकी परीक्षा कराने, निजी क्षेत्र और न्यायपालिका में आरक्षण देने, भारत में जातीय जनगणना कराने की मांग की। उच्चतम न्यायालय ने 1 अगस्त को अपने फैसले में कहा था कि राज्य को सरकारी नौकरियों में आरक्षण देने के लिए अनुसूचित जातियों का उप-वर्गीकरण करने का अधिकार है। विरोध करने वाले संगठनों का तर्क है कि एससी में उप-वर्गीकरण का निर्णय आरक्षण ढांचे और सांविधानिक सुरक्षा को खतरे में डाल सकता है। एसटी एससी मोर्चा के अध्यक्ष आरके कलसोत्रा ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट का फैसला मंजूर नहीं है। ये पूरी तरह से दलित विरोधी है। इससे आरक्षण व्यवस्था के मौलिक सिद्धांतों पर प्रश्नचिह्न लग गया है। ये पूरी तरह से आरक्षण नीति के खिलाफ है। अनुसूचित जाति और जनजाति को यह आरक्षण उनकी तरक्की के लिए नहीं, बल्कि सामाजिक रूप से उनके साथ हुई प्रताड़ना से न्याय दिलाने के लिए है।
ज्ञापन मे ये मांगें
मोर्चा ने सरकारी नौकरियों में पदस्थ एससी, एसटी और ओबीसी कर्मचारियों का जातिगत आंकड़ा जारी करने और भारतीय न्यायिक सेवा के जरिए न्यायिक अधिकारी और जज नियुक्त करने की मांग रखी है। सरकारी सेवाओं में एससी, एसटी, ओबीसी कर्मचारियों के जाति आधारित डेटा को तत्काल जारी करने की मांग की है ताकि उनका सटीक प्रतिनिधित्व सुनिश्चित किया जा सके। समाज के सभी वर्गों से न्यायिक अधिकारियों और जजों की भर्ती के लिए एक भारतीय न्यायिक सेवा आयोग की भी स्थापना की जाए ताकि हायर ज्यूडिशियरी में एससी, एसटी और ओबीसी श्रेणियों से 50 फीसदी प्रतिनिधित्व सुनिश्चित किया जाए।
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मोर्चा ने एससी एसटी में वर्गीकरण बंद करने, कालेजियम सिस्टम को बंद कर इसकी परीक्षा कराने, निजी क्षेत्र और न्यायपालिका में आरक्षण देने, भारत में जातीय जनगणना कराने की मांग की। उच्चतम न्यायालय ने 1 अगस्त को अपने फैसले में कहा था कि राज्य को सरकारी नौकरियों में आरक्षण देने के लिए अनुसूचित जातियों का उप-वर्गीकरण करने का अधिकार है। विरोध करने वाले संगठनों का तर्क है कि एससी में उप-वर्गीकरण का निर्णय आरक्षण ढांचे और सांविधानिक सुरक्षा को खतरे में डाल सकता है। एसटी एससी मोर्चा के अध्यक्ष आरके कलसोत्रा ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट का फैसला मंजूर नहीं है। ये पूरी तरह से दलित विरोधी है। इससे आरक्षण व्यवस्था के मौलिक सिद्धांतों पर प्रश्नचिह्न लग गया है। ये पूरी तरह से आरक्षण नीति के खिलाफ है। अनुसूचित जाति और जनजाति को यह आरक्षण उनकी तरक्की के लिए नहीं, बल्कि सामाजिक रूप से उनके साथ हुई प्रताड़ना से न्याय दिलाने के लिए है।
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मोर्चा ने सरकारी नौकरियों में पदस्थ एससी, एसटी और ओबीसी कर्मचारियों का जातिगत आंकड़ा जारी करने और भारतीय न्यायिक सेवा के जरिए न्यायिक अधिकारी और जज नियुक्त करने की मांग रखी है। सरकारी सेवाओं में एससी, एसटी, ओबीसी कर्मचारियों के जाति आधारित डेटा को तत्काल जारी करने की मांग की है ताकि उनका सटीक प्रतिनिधित्व सुनिश्चित किया जा सके। समाज के सभी वर्गों से न्यायिक अधिकारियों और जजों की भर्ती के लिए एक भारतीय न्यायिक सेवा आयोग की भी स्थापना की जाए ताकि हायर ज्यूडिशियरी में एससी, एसटी और ओबीसी श्रेणियों से 50 फीसदी प्रतिनिधित्व सुनिश्चित किया जाए।
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