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सरकार जनता के कल्याण के लिए, निष्पक्षता से करे काम : कैट
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जम्मू। केंद्रीय प्रशासनिक न्यायाधीकरण (कैट) ने एक मामले पर फैसला सुनाते हुए सरकार को निष्पक्ष रहने की हिदायत दी है। कैट ने कहा है कि सरकार जनता के कल्याण के लिए है, इसलिए मनमाने तरीके से काम न करे। नागरिकों के साथ निष्पक्ष रहें। कैट ने यह फैसला उद्योग एवं वाणिज्य विभाग के दो कर्मचारियों की याचिका पर सुनाया है। याचिका में ''''''''समान कार्य के लिए समान वेतन'''''''' के सांविधानिक सिद्धांत का उल्लंघन होने की शिकायत की गई थी।
उद्योग एवं वाणिज्य विभाग में सहायक शिल्पकार (फुटवियर) के पद पर तैनात दिनेश भारती और जबीना गुलजार ने साल 2021 में कैट में एक याचिका दायर की थी। याचिका में उन्होंने बताया कि जम्मू-कश्मीर सेवा चयन बोर्ड ने साल 2013 में 5,181 पदों के लिए आवेदन आमंत्रित करने के लिए विज्ञापन निकाला था। विज्ञापन में बताया गया कि इन पदों पर नियुक्ति पाने वालों को 9,300-34,800 रुपये के वेतनमान के साथ 4,200 रुपये का ग्रेड पे मिलेगा। 5 साल बाद जब दिनेश और जबीना को नियुक्ति मिली तो उन्हें 4,440-7,440 रुपये के वेतनमान के साथ 1,300 रुपये का ग्रेड पे देने की बात विभाग ने कही। विभाग ने दोनों से इस वेतमान और ग्रेड पे को स्वीकार करने की हामी भरते हुए हलफनामा भी मांगा। नियुक्ति पत्र में भी इस असमान वेतनमान को विज्ञापन में गलती बता के उचित ठहराया गया। दिनेश और जबीना ने बताया कि विभाग में उनके पद पर काम कर रहे बाकी कर्मचारियों को विज्ञापन में बताया गया वेतनमान ही मिल रहा है।
मामले का फैसला सुनाते हुए कैट के न्यायिक सदस्य राजिंदर सिंह डोगरा ने कहा कि इस मामले में विभाग ने मनमानी की है। यह बिल्कुल ऐसा ही है, जैसे खेल समाप्त होने के बाद खेल के नियम बदल दिए जाएं। इस मामले में विभाग ''''''''समान कार्य के लिए समान वेतन'''''''' के सांविधानिक सिद्धांत का भी उल्लंघन कर रहा है। कैट ने विभाग को दो महीनों के भीतर विज्ञापन में बताया गया वेतनमान देने का आदेश दिया है। नया वेतनमान नियुक्ति की तारीख से ही दिया जाएगा, साथ ही अब तक की बकाया राशि का भी भुगतान विभाग को करना होगा।
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उद्योग एवं वाणिज्य विभाग में सहायक शिल्पकार (फुटवियर) के पद पर तैनात दिनेश भारती और जबीना गुलजार ने साल 2021 में कैट में एक याचिका दायर की थी। याचिका में उन्होंने बताया कि जम्मू-कश्मीर सेवा चयन बोर्ड ने साल 2013 में 5,181 पदों के लिए आवेदन आमंत्रित करने के लिए विज्ञापन निकाला था। विज्ञापन में बताया गया कि इन पदों पर नियुक्ति पाने वालों को 9,300-34,800 रुपये के वेतनमान के साथ 4,200 रुपये का ग्रेड पे मिलेगा। 5 साल बाद जब दिनेश और जबीना को नियुक्ति मिली तो उन्हें 4,440-7,440 रुपये के वेतनमान के साथ 1,300 रुपये का ग्रेड पे देने की बात विभाग ने कही। विभाग ने दोनों से इस वेतमान और ग्रेड पे को स्वीकार करने की हामी भरते हुए हलफनामा भी मांगा। नियुक्ति पत्र में भी इस असमान वेतनमान को विज्ञापन में गलती बता के उचित ठहराया गया। दिनेश और जबीना ने बताया कि विभाग में उनके पद पर काम कर रहे बाकी कर्मचारियों को विज्ञापन में बताया गया वेतनमान ही मिल रहा है।
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मामले का फैसला सुनाते हुए कैट के न्यायिक सदस्य राजिंदर सिंह डोगरा ने कहा कि इस मामले में विभाग ने मनमानी की है। यह बिल्कुल ऐसा ही है, जैसे खेल समाप्त होने के बाद खेल के नियम बदल दिए जाएं। इस मामले में विभाग ''''''''समान कार्य के लिए समान वेतन'''''''' के सांविधानिक सिद्धांत का भी उल्लंघन कर रहा है। कैट ने विभाग को दो महीनों के भीतर विज्ञापन में बताया गया वेतनमान देने का आदेश दिया है। नया वेतनमान नियुक्ति की तारीख से ही दिया जाएगा, साथ ही अब तक की बकाया राशि का भी भुगतान विभाग को करना होगा।
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