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मात्र कॉल डिटेल रिकॉर्ड पर दोषी नहीं ठहराया जा सकता : हाईकोर्ट
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जम्मू। जम्मू-कश्मीर और लद्दाख उच्च न्यायालय ने एक फैसले में कहा कि मात्र कॉल डिटेल रिकॉर्ड (सीडीआर) के आधार पर किसी आरोपी को एनडीपीएस एक्ट के तहत दोषी नहीं ठहराया जा सकता। जब तक कि उसके खिलाफ ठोस सबूत या आवाज की रिकॉर्डिंग न हो। इसी के साथ न्यायाधीश संजय धर की पीठ ने नशीले पदार्थों की तस्करी के लिए वित्तीय मदद देने के आरोपी को जमानत दे दी।
साल 2023 में सांबा पुलिस ने चेकिंग के दौरान एक कार को रोका, जिसमें हरप्रीत सिंह और रणजीत सिंह सवार थे। तलाशी के दौरान उनके पास से हेरोइन और 16,71,520 रुपये नकद बरामद हुए। पूछताछ में दोनों ने पुलिस को बताया कि वे युगराज सिंह के इशारे पर काम कर रहे थे, जिसे कथित तौर पर इस ड्रग नेटवर्क का सरगना बताया गया। इसके बाद पुलिस ने जांच को आगे बढ़ाते हुए 8 जून 2023 को युगराज सिंह को गिरफ्तार कर लिया और उसके खिलाफ घगवाल थाने में एनडीपीएस एक्ट के तहत मामला दर्ज किया। इसके खिलाफ युगराज सिंह ने ट्रायल कोर्ट में याचिका दायर की, जिसे खारिज कर दिया गया। इसके बाद युगराज सिंह ने उच्च न्यायालय की शरण ली।
उच्च न्यायालय ने पुलिस द्वारा पेश किए गए सबूतों पर बारीकी से विचार किया। पुलिस ने मुख्य रूप से युगराज सिंह और अन्य आरोपियों के बीच हुए कॉल डिटेल रिकॉर्ड को अदालत में पेश किया और दावा किया कि यह रिकॉर्ड इस बात का प्रमाण है कि आरोपी ड्रग तस्करी में शामिल था। इस पर अदालत ने कहा कि मात्र कॉल डिटेल रिकॉर्ड यह साबित करने के लिए पर्याप्त नहीं है कि आरोपी नशीले पदार्थों की तस्करी में शामिल है। आरोपी और सह आरोपियों के बीच बातचीत के कोई ठोस सबूत नहीं हैं।
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साल 2023 में सांबा पुलिस ने चेकिंग के दौरान एक कार को रोका, जिसमें हरप्रीत सिंह और रणजीत सिंह सवार थे। तलाशी के दौरान उनके पास से हेरोइन और 16,71,520 रुपये नकद बरामद हुए। पूछताछ में दोनों ने पुलिस को बताया कि वे युगराज सिंह के इशारे पर काम कर रहे थे, जिसे कथित तौर पर इस ड्रग नेटवर्क का सरगना बताया गया। इसके बाद पुलिस ने जांच को आगे बढ़ाते हुए 8 जून 2023 को युगराज सिंह को गिरफ्तार कर लिया और उसके खिलाफ घगवाल थाने में एनडीपीएस एक्ट के तहत मामला दर्ज किया। इसके खिलाफ युगराज सिंह ने ट्रायल कोर्ट में याचिका दायर की, जिसे खारिज कर दिया गया। इसके बाद युगराज सिंह ने उच्च न्यायालय की शरण ली।
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उच्च न्यायालय ने पुलिस द्वारा पेश किए गए सबूतों पर बारीकी से विचार किया। पुलिस ने मुख्य रूप से युगराज सिंह और अन्य आरोपियों के बीच हुए कॉल डिटेल रिकॉर्ड को अदालत में पेश किया और दावा किया कि यह रिकॉर्ड इस बात का प्रमाण है कि आरोपी ड्रग तस्करी में शामिल था। इस पर अदालत ने कहा कि मात्र कॉल डिटेल रिकॉर्ड यह साबित करने के लिए पर्याप्त नहीं है कि आरोपी नशीले पदार्थों की तस्करी में शामिल है। आरोपी और सह आरोपियों के बीच बातचीत के कोई ठोस सबूत नहीं हैं।
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