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सर्दियों से पहले बढ़ सकती हैं आतंकी घुसपैठ की कोशिशें, एलओसी पर अलर्ट
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जम्मू। नियंत्रण रेखा के पार पाकिस्तान के कब्जे वाले जम्मू-कश्मीर में आतंकियों की हलचल देखी गई है। करीब 250 आतंकी घुसपैठ की फिराक में है। उच्च पर्वतीय इलाकों में नवंबर से बर्फ पड़ने लगती है, इससे पहले आतंकी घुसपैठ की कोशिशें बढ़ने की आशंका पर सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए हैं। घुसपैठ के लिहाज से बेहद संवेदनशील केरन सेक्टर समेत अन्य इलाकों में एंटी इनफिल्ट्रेशन ऑब्सटैकल सिस्टम, मानव निगरानी से लेकर सर्विलांस से घुसपैठ की किसी भी साजिश को नाकाम किया जाएगा।
एक अधिकारी ने बताया कि जम्मू-कश्मीर में 743 किलोमीटर लंबी एलओसी में 350 किलोमीटर नियंत्रण रेखा कश्मीर घाटी में जबकि 55 किलोमीटर अकेले केरन सेक्टर में ही पड़ती है। केरन सेक्टर में घने जंगल, नाले और दुरूह भौगोलिक परिस्थितियों को पाकिस्तान आतंकियों की घुसपैठ के लिए इस्तेमाल करता है। नवंबर से मार्च तक ये इलाके बर्फ से ढके रहते हैं, ऐसे में संघर्ष विराम के बावजूद बर्फबारी से पहले आतंकियों की घुसपैठ की आशंका है, जिसके लिए सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए गए हैं।
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केरन की चोटियों पर 15 से 30
फुट जमा बर्फ में ड्यूटी की चुनौती
एलओसी पर केरन सेक्टर में कई इलाके 12 हजार फुट की ऊंचाई वाले हैं। नवंबर से मार्च के बीच यहां 15 से 30 फुट बर्फ जमा हो जाती है। अग्रिम चौकियों से लेकर तारबंदी भी नजर नहीं आती। ऐसे हालात में ऊंचे पोल लगाकर एलओसी की पहचान की जाती है। सैन्य अधिकारी ने बताया कि इनपुट होने पर इन इलाकों में जवान ड्यूटी पर घंटों तैनात रहते हैं जिन्हें हेलिकॉप्टर से अग्रिम इलाकों की निगरानी के लिए भेजा जाता है।
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पांच साल में घटी आतंकियों की घुसपैठ
जम्मू-कश्मीर में पाकिस्तान से आतंकियों की घुसपैठ का ग्राफ पिछले पांच साल में नीचे आया है। वर्ष 2017 में घुसपैठ की 419 कोशिशें हुई थीं, जबकि 2018 में 328, 2019 में 216, 2020 में 99 और 2021 में आतंकी घुसपैठ की 77 कोशिशें हुई थीं। इस साल कश्मीर घाटी में आतंकी घुसपैठ की छह कोशिशें नाकाम की जा चुकी हैं। इसके बावजूद सर्दियोें से पहले इस साल सतर्कता बढ़ाई गई है।
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एक अधिकारी ने बताया कि जम्मू-कश्मीर में 743 किलोमीटर लंबी एलओसी में 350 किलोमीटर नियंत्रण रेखा कश्मीर घाटी में जबकि 55 किलोमीटर अकेले केरन सेक्टर में ही पड़ती है। केरन सेक्टर में घने जंगल, नाले और दुरूह भौगोलिक परिस्थितियों को पाकिस्तान आतंकियों की घुसपैठ के लिए इस्तेमाल करता है। नवंबर से मार्च तक ये इलाके बर्फ से ढके रहते हैं, ऐसे में संघर्ष विराम के बावजूद बर्फबारी से पहले आतंकियों की घुसपैठ की आशंका है, जिसके लिए सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए गए हैं।
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केरन की चोटियों पर 15 से 30
फुट जमा बर्फ में ड्यूटी की चुनौती
एलओसी पर केरन सेक्टर में कई इलाके 12 हजार फुट की ऊंचाई वाले हैं। नवंबर से मार्च के बीच यहां 15 से 30 फुट बर्फ जमा हो जाती है। अग्रिम चौकियों से लेकर तारबंदी भी नजर नहीं आती। ऐसे हालात में ऊंचे पोल लगाकर एलओसी की पहचान की जाती है। सैन्य अधिकारी ने बताया कि इनपुट होने पर इन इलाकों में जवान ड्यूटी पर घंटों तैनात रहते हैं जिन्हें हेलिकॉप्टर से अग्रिम इलाकों की निगरानी के लिए भेजा जाता है।
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पांच साल में घटी आतंकियों की घुसपैठ
जम्मू-कश्मीर में पाकिस्तान से आतंकियों की घुसपैठ का ग्राफ पिछले पांच साल में नीचे आया है। वर्ष 2017 में घुसपैठ की 419 कोशिशें हुई थीं, जबकि 2018 में 328, 2019 में 216, 2020 में 99 और 2021 में आतंकी घुसपैठ की 77 कोशिशें हुई थीं। इस साल कश्मीर घाटी में आतंकी घुसपैठ की छह कोशिशें नाकाम की जा चुकी हैं। इसके बावजूद सर्दियोें से पहले इस साल सतर्कता बढ़ाई गई है।