फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Jammu and Kashmir ›   Jammu News ›   jammu kashmir news

सोपोरी ने जम्मू कश्मीर को शेष भारत से सांस्कृतिक रूप से जोड़ा

विज्ञापन
jammu kashmir news
जम्मू। मशहूर संतूर वादक पद्मश्री पंडित भजन सोपोरी ने जम्मू-कश्मीर को सांस्कृतिक रूप से देश के साथ जोड़ने का काम किया था। पंडित सोपोरी को संतूर वादन की शिक्षा विरासत में मिली थी। उनके पिता पंडित एसएन सोपोरी भी संतूर वादक थे और सूफी घराने से ताल्लुक रखते थे। घर पर उनके दादा एससी सोपोरी और पिता एसएन सोपोरी से उन्हें संतूर की शिक्षा मिली थी। दादा और पिता ने उन्हें गायन शैली व वादन शैली में शिक्षा दी और फिर उन्होंने अपनी कला के दम पर एक अलग पहचान बनाई। सोपोरी ने 1953 में पांच साल की उम्र में अपनी पहली सार्वजनिक प्रस्तुति दी थी। भजन सोपोरी ने अंग्रेजी साहित्य में मास्टर्स डिग्री हासिल की थी। इसके बाद वाशिंगटन विश्वविद्यालय से पश्चिमी शास्त्रीय संगीत का अध्ययन भी किया। सोपोरी के बेटे अभय रुस्तम सोपोरी भी संतूर वादक हैं। भजन सोपोरी का जन्म 1948 में श्रीनगर में हुआ था।
विज्ञापन

भजन सोपोरी को क्लासिकल म्यूजिक में योगदान के लिए 1992 में संगीत नाटक अकादमी पुरस्कार से सम्मानित किया गया था। 2004 में पद्मश्री से सम्मानित भी किया गया था। पंडित सोपोरी ने जम्मू-कश्मीर को शेष भारत के बीच सांस्कृतिक कड़ी के रूप में जोड़ने का काम भी किया। उन्होंने सा मा पा नामक एक संगीत अकादमी भी शुरू की। यह अकादमी भारतीय शास्त्रीय संगीत को बढ़ावा देने का कार्य कर रही है। सा मा पा अकादमी में कैदियों को संगीत की शिक्षा दी जाती है, ताकि उनके और समाज के बीच भावनात्मक बंधन बने। अकादमी ने कई संगीतकारों को प्रशिक्षित करने के साथ पुराने संगीत उपकरणों को पुनर्जीवित करने में महत्वपूर्ण भूमिका अदा की। 2016 में गणतंत्र दिवस पर पंडित भजन सोपोरी को जम्मू-कश्मीर स्टेट लाइफटाइम अचीवमेंट अवॉर्ड से सम्मानित किया गया था।
विज्ञापन

------
संतूर को लोकप्रिय करने का है श्रेय
संतूर को लोकप्रिय करने का श्रेय भजन सोपोरी को ही जाता है। लंबे समय तक संतूर को कश्मीर का लोक वाद्य माना जाता है, लेकिन यह सूफी वाद्य है, सूफी गायन में संतूर के अपने ठाठ रहे हैं। सूफी कलाकारों के दल में सितार वादक तो कई हो सकते हैं लेकिन संतूर वादक एक ही होता रहा है और वही दल का नायक भी होता है। सोपोरी के दादा एससी सोपोरी संतूर पर संस्कृत में बंदिशें गाया करते थे।
विज्ञापन
विज्ञापन

----
आजाद ने दी श्रद्धांजलि
जम्मू। पूर्व मुख्यमंत्री गुलाम नबी आजाद और उनकी पत्नी शमीमा आजाद ने पंडित भजन सोपोरी के निधन पर शोक व्यक्त किया है। अपने संदेश में उन्होंने कहा कि भजन सोपोरी के निधन की खबर सुनकर हम स्तब्ध हैं। वह हमारे के लिए परिवार की तरह थे। शमीमा और सोपोरी साहब भाई-बहन थे। दोनों ने भजन के दिवंगत पिता पं. शंभू नाथ सोपोरी से शिक्षा ली थी।
---
संतूर वादक पंडित भजन सोपोरी के निधन के बारे में सुनकर दुख हुआ। वह बहुत विनम्र व्यक्ति थे। संगीत की दुनिया में उन्हें हमेशा उनके काम के लिए याद रखा जाएगा। वह जम्मू-कश्मीर की पहचान थे। दिवंगत आत्मा को प्रभु अपने चरणो में स्थान दें।

-देवेंद्र राणा, वरिष्ठ भाजपा नेता
----
पर्यटन विभाग ने शोक सभा का आयोजन किया
पर्यटन विभाग ने शोक सभा का आयोजन किया। इसमें वक्ताओं ने संगीत के माध्यम से भजन सोपोरी के योगदान को याद किया। शोक सभा की अध्यक्षता पर्यटन सचिव सरमद हफीज ने की। इस दौरान उन्होंने कहा कि भजन सोपोरी ने अपनी प्रस्तुतियों से विश्व भर में जम्मू-कश्मीर की समृद्ध संस्कृति और संगीत को बढ़ावा देने का काम किया।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed