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एमबीबीएस घोटाले में पूर्व बीओपीईई अध्यक्ष की याचिका खारिज
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जम्मू। उच्च न्यायालय श्रीनगर विंग के न्यायमूर्ति संजीव कुमार ने एमबीबीएस घोटाले में शामिल पूर्व बीओपीईई अध्यक्ष की याचिका को खारिज कर दिया है। साथ पेंशन वापसी के आदेश को भी रद्द कर दिया।
याचिका को खारिज करते हुए कोर्ट ने कहा कि याचिकाकर्ता यह दावा नहीं कर सकता कि उसकी सजा के खिलाफ अपील उच्च न्यायालय के समक्ष लंबित है। न्यायमूर्ति संजीव कुमार ने फैसला सुनाते हुए कहा कि याचिकाकर्ता की यह दलील है कि उन्हें सुनवाई का पूर्व अवसर प्रदान नहीं किया गया। याचिकाकर्ता को सुनवाई का अवसर दिया जाता तो स्थिति में कोई बदलाव नहीं आता। याचिकाकर्ता किसी भी तर्क से प्रतिवादी-विश्वविद्यालय के समक्ष यह प्रदर्शित नहीं कर सकता था कि जिन अपराधों के लिए उन्हें दोषी ठहराया गया है वे गंभीर नहीं हैं। भ्रष्टाचार विरोधी अदालत कश्मीर द्वारा उसे दोषी ठहराया गया। पेंशन को जेएंडके सिविल सेवा विनियमों के अनुच्छेद 168 के अनुसार प्रभाव से वापस लिया गया है। याचिकाकर्ता एक लोक सेवक है और उसे विभिन्न अपराधों के लिए एक सक्षम न्यायालय द्वारा दोषी ठहराया गया है और उसे सजा और जुर्माना भरने के आदेश दिए गए हैं। भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत अपराध गंभीर है। उसे हमेशा गंभीर अपराध माना जाता है। याचिकाकर्ता एक दोषी है और अपीलीय न्यायालय द्वारा बरी होने तक ऐसा ही रहेगा। इस पर याचिका को अदालत ने खारिज कर दिया। - जेएनएफ
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याचिका को खारिज करते हुए कोर्ट ने कहा कि याचिकाकर्ता यह दावा नहीं कर सकता कि उसकी सजा के खिलाफ अपील उच्च न्यायालय के समक्ष लंबित है। न्यायमूर्ति संजीव कुमार ने फैसला सुनाते हुए कहा कि याचिकाकर्ता की यह दलील है कि उन्हें सुनवाई का पूर्व अवसर प्रदान नहीं किया गया। याचिकाकर्ता को सुनवाई का अवसर दिया जाता तो स्थिति में कोई बदलाव नहीं आता। याचिकाकर्ता किसी भी तर्क से प्रतिवादी-विश्वविद्यालय के समक्ष यह प्रदर्शित नहीं कर सकता था कि जिन अपराधों के लिए उन्हें दोषी ठहराया गया है वे गंभीर नहीं हैं। भ्रष्टाचार विरोधी अदालत कश्मीर द्वारा उसे दोषी ठहराया गया। पेंशन को जेएंडके सिविल सेवा विनियमों के अनुच्छेद 168 के अनुसार प्रभाव से वापस लिया गया है। याचिकाकर्ता एक लोक सेवक है और उसे विभिन्न अपराधों के लिए एक सक्षम न्यायालय द्वारा दोषी ठहराया गया है और उसे सजा और जुर्माना भरने के आदेश दिए गए हैं। भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत अपराध गंभीर है। उसे हमेशा गंभीर अपराध माना जाता है। याचिकाकर्ता एक दोषी है और अपीलीय न्यायालय द्वारा बरी होने तक ऐसा ही रहेगा। इस पर याचिका को अदालत ने खारिज कर दिया। - जेएनएफ
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