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टैक्स स्लैब में बदलाव न होने से पांच लाख करदाता मायूस
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जम्मू। जम्मू कश्मीर में कोरोना और अन्य दूसरी परिस्थितियों में जूझ रहे कारोबारियों और करदाताओं को केंद्रीय बजट से मायूसी मिली है। खासतौर पर आयकर स्लैब में कोई बदलाव न करने से निराश हैं। कारोबारियों के लिए कोई विशेष पैकेज की भी घोषणा नहीं हो पाई है। हालांकि राहत यह भी है कि बजट में कोई नया कर नहीं लगाया गया है। कुछ कारोबारी इसे संतुलित तो कुछ उम्मीदों के परे बता रहे हैं। जम्मू कश्मीर में कारोबारियों सहित करीब पांच लाख करदाता हैं।
कारोबारियों का कहना है कि केंद्रीय बजट में टैक्स स्लैब में राहत मिलने की उम्मीद थी। सरकार को कोरोना महामारी को ध्यान में रखते हुए विशेषतौर पर छोटे कारोबारियों के लिए कोई घोषणा करनी चाहिए थी, लेकिन ऐसा नहीं हुआ। ट्रेडर्स फेडरेशन वेयर हाउस नेहरू मार्केट के प्रधान दीपक गुप्ता ने कहा कि केंद्रीय बजट कुल मिलाकर संतुलित है। इसमें स्वास्थ्य, शिक्षा, सड़क संपर्क, ऑनलाइन पोस्ट ऑफिस, स्टार्टअप रोजगार, 80 लाख आवास, रक्षा, रेलवे, शहरी बुनियादी सुविधाएं आदि शामिल हैं, लेकिन व्यापारियों को निराशा मिली है। व्यापारी ईमानदारी के साथ कर इकट्ठा करके सरकार को दे रहे हैं। उच्चतम आयकर स्लैब को 30 से कम करके 25 फीसदी नहीं किया गया। जीएसटी पर ई वे बिल लिमिट को 50 हजार से बढ़ाकर दो लाख नहीं किया गया। डल झील की तर्ज पर सुचेतगढ़, भद्रवाह, डोडा, बसोहली, बनी, मानसर सुरईंसर को भी विकसित किया जाना चाहिए था। ट्रेड नीति के तहत पांच करोड़ से कम आबादी वाले शहरों में बड़ी रिटेल कंपनियों को नहीं आने दिया जाए, जैसा कि केंद्र सरकार निजी निवेश को बढ़ावा देने की बात कर रही है।
पुरानी मंडी के कारोबारी जंग बहादुर ने कहा कि गरीब जनता के लिए बजट में कुछ खास नहीं दिया गया। आम लोगों के कर राशि का उनके कल्याण के लिए प्रयोग नहीं किया जा रहा है। स्वास्थ्य और शिक्षा के विस्तार पर कुछ नहीं किया गया। राजतिलक रोड टरेडर्स एसोसिएशन के पूर्व प्रधान विमल गुप्ता ने कहा कि छोटे कारोबारियों का बजट में कोई ध्यान नहीं रखा गया। कारोबारियों को कोरोना महामारी की चुनौतियों से निकालने के लिए विशेष घोषणा होनी चाहिए थी। रघुनाथ मंदिर बिजनेसमैन एसोसिएशन के प्रधान संजय गुप्ता ने कहा कि डिजिटल करेंसी, अर्थव्यवस्था को बढ़ावा देने की घोषणाएं स्वागत योग्य हैं। देश के बुनियादी ढांचे पर भी जोर दिया जा रहा है। राहत यह है कि कोई नया कर नहीं लगाया गया है।
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कारोबारियों का कहना है कि केंद्रीय बजट में टैक्स स्लैब में राहत मिलने की उम्मीद थी। सरकार को कोरोना महामारी को ध्यान में रखते हुए विशेषतौर पर छोटे कारोबारियों के लिए कोई घोषणा करनी चाहिए थी, लेकिन ऐसा नहीं हुआ। ट्रेडर्स फेडरेशन वेयर हाउस नेहरू मार्केट के प्रधान दीपक गुप्ता ने कहा कि केंद्रीय बजट कुल मिलाकर संतुलित है। इसमें स्वास्थ्य, शिक्षा, सड़क संपर्क, ऑनलाइन पोस्ट ऑफिस, स्टार्टअप रोजगार, 80 लाख आवास, रक्षा, रेलवे, शहरी बुनियादी सुविधाएं आदि शामिल हैं, लेकिन व्यापारियों को निराशा मिली है। व्यापारी ईमानदारी के साथ कर इकट्ठा करके सरकार को दे रहे हैं। उच्चतम आयकर स्लैब को 30 से कम करके 25 फीसदी नहीं किया गया। जीएसटी पर ई वे बिल लिमिट को 50 हजार से बढ़ाकर दो लाख नहीं किया गया। डल झील की तर्ज पर सुचेतगढ़, भद्रवाह, डोडा, बसोहली, बनी, मानसर सुरईंसर को भी विकसित किया जाना चाहिए था। ट्रेड नीति के तहत पांच करोड़ से कम आबादी वाले शहरों में बड़ी रिटेल कंपनियों को नहीं आने दिया जाए, जैसा कि केंद्र सरकार निजी निवेश को बढ़ावा देने की बात कर रही है।
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पुरानी मंडी के कारोबारी जंग बहादुर ने कहा कि गरीब जनता के लिए बजट में कुछ खास नहीं दिया गया। आम लोगों के कर राशि का उनके कल्याण के लिए प्रयोग नहीं किया जा रहा है। स्वास्थ्य और शिक्षा के विस्तार पर कुछ नहीं किया गया। राजतिलक रोड टरेडर्स एसोसिएशन के पूर्व प्रधान विमल गुप्ता ने कहा कि छोटे कारोबारियों का बजट में कोई ध्यान नहीं रखा गया। कारोबारियों को कोरोना महामारी की चुनौतियों से निकालने के लिए विशेष घोषणा होनी चाहिए थी। रघुनाथ मंदिर बिजनेसमैन एसोसिएशन के प्रधान संजय गुप्ता ने कहा कि डिजिटल करेंसी, अर्थव्यवस्था को बढ़ावा देने की घोषणाएं स्वागत योग्य हैं। देश के बुनियादी ढांचे पर भी जोर दिया जा रहा है। राहत यह है कि कोई नया कर नहीं लगाया गया है।
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