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जम्मू-कश्मीर में अरोमा-लैवेंडर की खेती लोकप्रिय विकल्प: जितेंद्र सिंह
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नई दिल्ली/जम्मू। केंद्रीय विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी राज्य मंत्री डॉ जितेंद्र सिंह ने कहा कि स्टार्ट-अप इंडिया में बैंगनी क्रांति जम्मू-कश्मीर का योगदान है। इस पहल की शुरुआत 2016 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने की थी और आज हम पहला राष्ट्रीय स्टार्ट-अप दिवस मना रहे हैं। सीएसआईआर के जरिये अरोमा मिशन की शुरुआत की थी, जिसने भारत में प्रसिद्ध बैंगनी क्रांति को जन्म दिया है।
उन्होंने बताया कि सीएसआईआर ने कई जिलों में खेती के लिए जम्मू स्थित अपनी प्रयोगशाला इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ इंटीग्रेटिव मेडिसिन (आईआईआईएम) के जरिये लैवेंडर फ सल की शुरुआत की थी। शुरुआत में डोडा, किश्तवाड़, राजोरी और इसके बाद अन्य जिलों रामबान और पुलवामा में इसे शुरू किया गया था। थोड़े ही समय में अरोमा-लैवेंडर की खेती कृषिगत स्टार्ट-अप के लिए कृषि में एक लोकप्रिय विकल्प बन गई है। डोडा जिले के सुदूर गांव खिलानी के भारत भूषण नाम के एक युवा सफ लता की अनुकरणीय कहानी बन चुके हैं। भूषण ने सीएसआईआर-आईआईआईएम के सहयोग से लगभग 0.1 हेक्टेयर भूमि में लैवेंडर की खेती शुरू की। इसके बाद उन्होंने अपने घर के आस-पास मक्के के खेत के एक बड़े क्षेत्र को भी लैवेंडर के बगान में बदल दिया। आज उन्होंने 20 लोगों को काम पर रखा है जो उनके लैवेंडर के खेतों और पौधशाला में काम कर रहे हैं। उनके जिले के लगभग 500 किसानों ने भी मक्के को छोड़कर बारहमासी फू ल वाले लैवेंडर पौधे की खेती शुरू कर दी है।
कहा कि आईआईआईएम अरोमा और लैवेंडर की खेती में संलग्न स्टार्ट-अप्स को उनकी उपज बेचने में सहायता कर रही है। मुंबई स्थित अजमल बायोटेक प्राइवेट लिमिटेड, अदिति इंटरनेशनल और नवनैत्री गमिका जैसी प्रमुख कंपनियां इसकी प्राथमिक खरीदार हैं।
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उन्होंने बताया कि सीएसआईआर ने कई जिलों में खेती के लिए जम्मू स्थित अपनी प्रयोगशाला इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ इंटीग्रेटिव मेडिसिन (आईआईआईएम) के जरिये लैवेंडर फ सल की शुरुआत की थी। शुरुआत में डोडा, किश्तवाड़, राजोरी और इसके बाद अन्य जिलों रामबान और पुलवामा में इसे शुरू किया गया था। थोड़े ही समय में अरोमा-लैवेंडर की खेती कृषिगत स्टार्ट-अप के लिए कृषि में एक लोकप्रिय विकल्प बन गई है। डोडा जिले के सुदूर गांव खिलानी के भारत भूषण नाम के एक युवा सफ लता की अनुकरणीय कहानी बन चुके हैं। भूषण ने सीएसआईआर-आईआईआईएम के सहयोग से लगभग 0.1 हेक्टेयर भूमि में लैवेंडर की खेती शुरू की। इसके बाद उन्होंने अपने घर के आस-पास मक्के के खेत के एक बड़े क्षेत्र को भी लैवेंडर के बगान में बदल दिया। आज उन्होंने 20 लोगों को काम पर रखा है जो उनके लैवेंडर के खेतों और पौधशाला में काम कर रहे हैं। उनके जिले के लगभग 500 किसानों ने भी मक्के को छोड़कर बारहमासी फू ल वाले लैवेंडर पौधे की खेती शुरू कर दी है।
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कहा कि आईआईआईएम अरोमा और लैवेंडर की खेती में संलग्न स्टार्ट-अप्स को उनकी उपज बेचने में सहायता कर रही है। मुंबई स्थित अजमल बायोटेक प्राइवेट लिमिटेड, अदिति इंटरनेशनल और नवनैत्री गमिका जैसी प्रमुख कंपनियां इसकी प्राथमिक खरीदार हैं।
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