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प्रदेश में 10 लाख से ज्यादा परिवार राशन कार्ड से वंचित
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जम्मू। प्रदेश में दस लाख से ज्यादा परिवारों के राशन कार्ड नहीं बन पाए हैं। इन दस लाख से ज्यादा लोगाें के नाम जनगणना 2011 में छूट गए हैं या फिर उस समय उनका नाम रिकॉर्ड में नहीं चढ़ पाया। वर्तमान में ये तमाम लोग प्रदेश के निवासी हैं, लेकिन सरकारी योजना का लाभ नहीं ले पा रहे हैं। अब 2022 में जनगणना होने के बाद इन लोगों के राशन कार्ड बनने की संभावना है।
मौजूदा समय में प्रदेश में लाखों लोग राशन कार्ड बनाने के लिए आवेदन कर चुके हैं, लेकिन औपचारिकताएं पूरी न होने की वजह से उन्हें सरकारी डिपो से राशन नहीं मिल रहा है। सबसे ज्यादा संख्या 2011 के बाद जन्म लेने वाले बच्चों की है। ये बच्चे नौ से दस साल के बीच के हैं। इनकी संख्या प्रदेश में आठ लाख के करीब है। ऐसे में लंबा अरसा बीत जाने के बाद भी इनके राशन कार्ड नहीं बन पाए हैं।
दो लाख के आसपास ऐसे उपभोक्ता है,। जिनका किसी कारण वश जनगणना के दौरान जिक्र नहीं हो पाया। अब ये लोग भी छूट गए हैं। बार-बार विभाग के चक्कर काट रहे हैं, लेकिन नए राशन कार्ड नहीं बन रहे हैं। विभाग के अनुसार राशन कार्ड बनवाने के लिए 2011 की जनगणना में जिक्र होना जरूरी है। जनगणना में नाम शामिल होने पर ही उपभोक्ताओं को राशन वितरित किया जा रहा है।
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दस्तावेज बनाने में भी आ रही परेशान
राशन कार्ड न होने के कारण उपभोक्ताओं को रोजगार हासिल करने या फिर अन्य दस्तावेज बनाने में भी परेशानी आ रही है। निवासी तो वे प्रदेश के हैं, लेकिन नौकरी के लिए उनसे राशन कार्ड मांगा जा रहा है। वहीं, स्कूली छात्रों को भी आधार कार्ड से ही काम चलाना पड़ रहा है। दाखिले के दौरान बच्चों को परेशानी आ रही है। सबसे ज्यादा परेशानी गरीब परिवारों से संबंध रखने वाले छात्रों को आ रही है। बाजार से महंगी दरों में राशन लेना पड़ रहा है।
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परिवार से अलग रहने वालों के भी नहीं बन रहे राशनकार्ड
परिवार से अलग रहने वाले और अलग राशन कार्ड की चाह रखने वाले उपभोक्ताओं के भी राशन कार्ड नहीं बन रहे हैं। इसमें भी 2011 की जनगणना आड़े आ रही है।
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कहां पड़ती है राशन कार्ड की जरूरत
- डिपो से राशन लेने, रोजगार के लिए आवेदन करने, बैंक खाते, आधार बनवाने, तहसीलों समेत अन्य कार्यालय में दस्तावेज बनाने के दौरान राशन कार्ड की जरूरत पड़ती है। स्कूल में दाखिले के लिए भी बच्चों का राशन कार्ड मांगा जाता है।
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कोट
2011 की जनगणना में शामिल तमाम लोगों को राशन डिपो से मिल रहा है। इसके बाद पैदा होने या जनगणना में जिक्र न होने वाले उपभोक्ताओं के नए राशन कार्ड नहीं बन पाए हैं। अब ये लोग दोबारा होने वाली जनगणना में कवर होंगे। यह मामला सरकार के पास विचाराधीन है।
- जुगल किशोर आनंद, अतिरिक्त सचिव, खाद्य, आपूर्ति एवं उपभोक्ता मामले विभाग
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मौजूदा समय में प्रदेश में लाखों लोग राशन कार्ड बनाने के लिए आवेदन कर चुके हैं, लेकिन औपचारिकताएं पूरी न होने की वजह से उन्हें सरकारी डिपो से राशन नहीं मिल रहा है। सबसे ज्यादा संख्या 2011 के बाद जन्म लेने वाले बच्चों की है। ये बच्चे नौ से दस साल के बीच के हैं। इनकी संख्या प्रदेश में आठ लाख के करीब है। ऐसे में लंबा अरसा बीत जाने के बाद भी इनके राशन कार्ड नहीं बन पाए हैं।
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दो लाख के आसपास ऐसे उपभोक्ता है,। जिनका किसी कारण वश जनगणना के दौरान जिक्र नहीं हो पाया। अब ये लोग भी छूट गए हैं। बार-बार विभाग के चक्कर काट रहे हैं, लेकिन नए राशन कार्ड नहीं बन रहे हैं। विभाग के अनुसार राशन कार्ड बनवाने के लिए 2011 की जनगणना में जिक्र होना जरूरी है। जनगणना में नाम शामिल होने पर ही उपभोक्ताओं को राशन वितरित किया जा रहा है।
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दस्तावेज बनाने में भी आ रही परेशान
राशन कार्ड न होने के कारण उपभोक्ताओं को रोजगार हासिल करने या फिर अन्य दस्तावेज बनाने में भी परेशानी आ रही है। निवासी तो वे प्रदेश के हैं, लेकिन नौकरी के लिए उनसे राशन कार्ड मांगा जा रहा है। वहीं, स्कूली छात्रों को भी आधार कार्ड से ही काम चलाना पड़ रहा है। दाखिले के दौरान बच्चों को परेशानी आ रही है। सबसे ज्यादा परेशानी गरीब परिवारों से संबंध रखने वाले छात्रों को आ रही है। बाजार से महंगी दरों में राशन लेना पड़ रहा है।
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परिवार से अलग रहने वालों के भी नहीं बन रहे राशनकार्ड
परिवार से अलग रहने वाले और अलग राशन कार्ड की चाह रखने वाले उपभोक्ताओं के भी राशन कार्ड नहीं बन रहे हैं। इसमें भी 2011 की जनगणना आड़े आ रही है।
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कहां पड़ती है राशन कार्ड की जरूरत
- डिपो से राशन लेने, रोजगार के लिए आवेदन करने, बैंक खाते, आधार बनवाने, तहसीलों समेत अन्य कार्यालय में दस्तावेज बनाने के दौरान राशन कार्ड की जरूरत पड़ती है। स्कूल में दाखिले के लिए भी बच्चों का राशन कार्ड मांगा जाता है।
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कोट
2011 की जनगणना में शामिल तमाम लोगों को राशन डिपो से मिल रहा है। इसके बाद पैदा होने या जनगणना में जिक्र न होने वाले उपभोक्ताओं के नए राशन कार्ड नहीं बन पाए हैं। अब ये लोग दोबारा होने वाली जनगणना में कवर होंगे। यह मामला सरकार के पास विचाराधीन है।
- जुगल किशोर आनंद, अतिरिक्त सचिव, खाद्य, आपूर्ति एवं उपभोक्ता मामले विभाग
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