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ई-विधान प्रणाली से चलेगी जम्मू-कश्मीर की विधानसभा
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जम्मू। जम्मू-कश्मीर में विधानसभा चुनाव से पहले प्रदेश की विधानसभा को ई-विधान प्रणाली युक्त बनाने की तैयारी शुरू हो गई है। ई-विधान प्रणाली से विधानसभा का कामकाज लगभग पूरी तरह से पेपर लेस हो जाएगा। विधानसभा के आईटी विभाग ने डीपीआर तैयार कर मंजूरी के लिए केंद्रीय सूचना एवं प्रौद्योगिकी मंत्रालय को भेज दी है।
जम्मू-कश्मीर में 2018 से विधानसभा भंग पड़ी है। पांच अगस्त 2019 को अनुच्छेद 370 व 35ए हटाने के साथ ही राज्य को दो केंद्र शासित प्रदेशों में परिवर्तित कर दिया गया था। अब परिसीमन आयोग मार्च 2022 में अंतिम रिपोर्ट सरकार को सौंपेगा, जिसके बाद सरकार ने चुनाव करवाने का आश्वासन दिया है। सियासी दल विधानसभा चुनाव की तैयारी में अभी से जुट गए हैं। इस बीच पड़ोसी राज्य हिमाचल प्रदेश और पंजाब समेत देश के अन्य राज्यों की तर्ज पर विधानसभा में ई-विधान प्रणाली लागू करने की तैयारी चल रही है।
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विधायक अपनी टेबल पर स्क्रीन से देखेंगे कार्यवाही
ई-विधान प्रणाली के तहत सारी कार्यवाही ऑनलाइन हो जाएगी। विधायकों की टेबल पर स्क्रीन लगेगी, जिसमें विधायक कामकाज व सवाल और जवाब की पूरी जानकारी ले सकेंगे। सामान्य तौर पर कागजों का अत्यधिक प्रयोग होता है, लेकिन ई-विधान प्रणाली में सदन की कार्यवाही पेपर लेस हो जाएगी।
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नेशनल ई-विधान एप्लीकेशन (नेवा) के तहत जम्मू-कश्मीर विधानसभा में ई-विधान प्रणाली के लिए डीपीआर तैयार की गई है। मंजूरी के लिए डीपीआर केंद्र सरकार को भेजी गई है। ई-विधान पर्यावरण मित्र प्रणाली है। डीपीआर को मंजूरी मिलते ही यहां पर कामकाज शुरू कर दिया जाएगा।
- मुजफ्फर अहमद भट, सचिव विधानसभा जम्मू-कश्मीर
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जम्मू-कश्मीर में 2018 से विधानसभा भंग पड़ी है। पांच अगस्त 2019 को अनुच्छेद 370 व 35ए हटाने के साथ ही राज्य को दो केंद्र शासित प्रदेशों में परिवर्तित कर दिया गया था। अब परिसीमन आयोग मार्च 2022 में अंतिम रिपोर्ट सरकार को सौंपेगा, जिसके बाद सरकार ने चुनाव करवाने का आश्वासन दिया है। सियासी दल विधानसभा चुनाव की तैयारी में अभी से जुट गए हैं। इस बीच पड़ोसी राज्य हिमाचल प्रदेश और पंजाब समेत देश के अन्य राज्यों की तर्ज पर विधानसभा में ई-विधान प्रणाली लागू करने की तैयारी चल रही है।
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विधायक अपनी टेबल पर स्क्रीन से देखेंगे कार्यवाही
ई-विधान प्रणाली के तहत सारी कार्यवाही ऑनलाइन हो जाएगी। विधायकों की टेबल पर स्क्रीन लगेगी, जिसमें विधायक कामकाज व सवाल और जवाब की पूरी जानकारी ले सकेंगे। सामान्य तौर पर कागजों का अत्यधिक प्रयोग होता है, लेकिन ई-विधान प्रणाली में सदन की कार्यवाही पेपर लेस हो जाएगी।
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नेशनल ई-विधान एप्लीकेशन (नेवा) के तहत जम्मू-कश्मीर विधानसभा में ई-विधान प्रणाली के लिए डीपीआर तैयार की गई है। मंजूरी के लिए डीपीआर केंद्र सरकार को भेजी गई है। ई-विधान पर्यावरण मित्र प्रणाली है। डीपीआर को मंजूरी मिलते ही यहां पर कामकाज शुरू कर दिया जाएगा।
- मुजफ्फर अहमद भट, सचिव विधानसभा जम्मू-कश्मीर