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पूर्व डिप्टी सीएम को स्पेशल ट्रिब्यूनल से राहत, घर गिराने के आदेश पर रोक
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जम्मू। नगरोटा में घर ध्वस्त करने के मामले में पूर्व उपमुख्यमंत्री डॉ. निर्मल सिंह को जेएंडके स्पेशल ट्रिब्यूनल ने राहत दी है। ट्रिब्यूनल के न्यायिक सदस्य राजेश सेकरी ने जेडीए द्वारा जारी 8 नवंबर 2021 के आदेश पर रोक लगाई है। सात दिसंबर तक यथास्थिति बनाए रखने के निर्देश दिए गए हैं।
वरिष्ठ अधिवक्ता आरके गुप्ता ने अपनी दलीलें रखीं। अधिवक्ता मुजफ्फर अली शाह ने व्यक्तिगत रूप से आवेदन दायर करने जबकि जेडीए की ओर से पेश हुए अधिवक्ता आदर्श शर्मा ने रिकॉर्ड और लिखित प्रस्तुतियां पेश करने के लिए समय मांगा। ट्रिब्यूनल ने 8 नवंबर 2021 के आक्षेपित आदेश को स्थगित रखने के साथ पार्टियों को 7 दिसंबर 2021 तक यथास्थिति बनाए रखने का निर्देश दिया।
सुनवाई के दौरान वरिष्ठ अधिवक्ता आरके गुप्ता ने कहा कि अपीलकर्ता की जमीन खसरा नं. 441 खाता नं 534 नगरोटा जिला जम्मू में स्थित है। इस भूमि को 20 मई 2014 को खरीदा गया है। अपीलकर्ता ने इस पर घर का निर्माण करवाया। भूमि और घर की संरचना वर्ष 2017 की शुरुआत में पूरी हो गई थी। उस समय से अपीलकर्ता यहां पर रह रहा है। निर्माण की पूरी अवधि के दौरान और उसके बाद किसी भी विकास प्राधिकरण द्वारा घर के निर्माण के संबंध में कोई शिकायत नहीं की गई थी। जम्मू मास्टर प्लान 2032 के लागू होने से पहले ही इसका निर्माण किया जा चुका था, जिसे एसआरओ द्वारा अधिसूचित किया गया था।
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इमारत के पूरा होने के 4 साल से अधिक की अवधि के बाद प्रतिवादियों ने कोबो अधिनियम, 1988 की धारा 7 (1) के तहत एक नोटिस जारी किया, जिसके तहत अपीलकर्ता को कारण बताने का निर्देश दिया गया था कि क्यों उसके द्वारा बनाए गए घर को तोड़ा नहीं जा सकता। अपीलकर्ता को निर्माण को ध्वस्त करने का निर्देश दिया गया है।
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वरिष्ठ अधिवक्ता आरके गुप्ता ने अपनी दलीलें रखीं। अधिवक्ता मुजफ्फर अली शाह ने व्यक्तिगत रूप से आवेदन दायर करने जबकि जेडीए की ओर से पेश हुए अधिवक्ता आदर्श शर्मा ने रिकॉर्ड और लिखित प्रस्तुतियां पेश करने के लिए समय मांगा। ट्रिब्यूनल ने 8 नवंबर 2021 के आक्षेपित आदेश को स्थगित रखने के साथ पार्टियों को 7 दिसंबर 2021 तक यथास्थिति बनाए रखने का निर्देश दिया।
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सुनवाई के दौरान वरिष्ठ अधिवक्ता आरके गुप्ता ने कहा कि अपीलकर्ता की जमीन खसरा नं. 441 खाता नं 534 नगरोटा जिला जम्मू में स्थित है। इस भूमि को 20 मई 2014 को खरीदा गया है। अपीलकर्ता ने इस पर घर का निर्माण करवाया। भूमि और घर की संरचना वर्ष 2017 की शुरुआत में पूरी हो गई थी। उस समय से अपीलकर्ता यहां पर रह रहा है। निर्माण की पूरी अवधि के दौरान और उसके बाद किसी भी विकास प्राधिकरण द्वारा घर के निर्माण के संबंध में कोई शिकायत नहीं की गई थी। जम्मू मास्टर प्लान 2032 के लागू होने से पहले ही इसका निर्माण किया जा चुका था, जिसे एसआरओ द्वारा अधिसूचित किया गया था।
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इमारत के पूरा होने के 4 साल से अधिक की अवधि के बाद प्रतिवादियों ने कोबो अधिनियम, 1988 की धारा 7 (1) के तहत एक नोटिस जारी किया, जिसके तहत अपीलकर्ता को कारण बताने का निर्देश दिया गया था कि क्यों उसके द्वारा बनाए गए घर को तोड़ा नहीं जा सकता। अपीलकर्ता को निर्माण को ध्वस्त करने का निर्देश दिया गया है।