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नशे के दलदल में धंसे हैं जम्मू-कश्मीर के 6 लाख लोग
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जम्मू। एक खपत सर्वेक्षण के अनुसार जम्मू कश्मीर में 6 लाख लोग नशीली दवाओं से प्रभावित हैं जो इस केंद्र शासित प्रदेश की लगभग 4.6 प्रतिशत आबादी है। इन नशे की लत से पीड़ित 90 प्रतिशत 17 से 33 आयु वर्ग के लोग हैं। जम्मू कश्मीर एक ऐसे क्षेत्र के निकट है, यहां विश्व अफीम का 80 फीसदी उत्पादन होता है, जिससे प्रदेश में नशीली दवाओं के अवैध व्यापार की आशंका बढ़ जाती है। मुख्य सचिव डा. अरुण कुमार मेहता ने शुक्रवार को नार्को समन्वय केंद्र की राज्य स्तरीय समिति की पहली बैठक में जम्मू कश्मीर में नशीली दवाओं के खतरे से निपटने के लिए व्यापक परियोजना की रूप रेखा पर जोर दिया।
मुख्य सचिव ने जम्मू कश्मीर में खसखस और भांग के उत्पादन के साथ क्रास बार्डर परिवहन डेटा संकलित करने की आवश्यकता को रेखांकित किया, ताकि जम्मू कश्मीर में इन दवाओं और उनके सिंथेटिक डेरिवेटिव की उपस्थिति का आकलन किया जा सके। अफीम की अवैध खेती की रोकने के लिए आबकारी और कृषि विभागों के साथ एंटी नारकोटिक्स टास्क फोर्स (एएनटीएफ) मिलकर काम करे। इसमें अपेक्षित खेती क्षेत्रों का नक्शा बनाने और निजी व सरकारी भूमि पर अवैध फसल को नष्ट करने के लिए कार्रवाई की जाए। एएनटीएफ के अधिकारियों को अगले सीजन में ऐसी अवैध खेती रोकने के लिए एक कार्य योजना तैयार करने को कहा गया। उन्होंने नशीली दवाओं से निपटने के लिए एक बहुआयामी रणनीति तैयार करने पर जोर दिया। इसमें प्रवर्तन एजेंसियों का उचित प्रशिक्षण, दवा परीक्षण की क्षमता वृदि, अवैध उत्पादन और व्यापार का आकलन, जब्ती और नष्ट, आरोपी की गिरफ्तारी और सजा, पीड़ितों का परामर्श व पुनर्वास पर काम किया जाए। नशा और मादक पदार्थों के सेवन के पीड़ितों के परामर्श और पुनर्वास के लिए एक केंद्रित दृष्टिकोण को अपनाया जाए। जम्मू कश्मीर में नशे के इस खतरे को देखते हुए बड़े पैमाने पर निपटने की जरूरत है। संभागीय, जिला प्रशासन और अन्य हितधारकों को शामिल करके एक निर्धारित समय सीमा के भीतर ठोस, जमीनी स्तर पर बेहतर परिणाम देने वाली एक कार्य योजना तैयार करने के लिए एक उप समिति को गठन करने का निर्देश दिया। एएनटीएफ को नशे के खिलाफ जनता में जागरूकता को बढ़ावा देने पर जोर दिया गया। टास्क फोर्स को गैर सरकारी संगठनों, पंचायती राज संस्थाओं और स्वयंसेवकों के माध्यम से अवैध खेती, परिवहन, व्यापार और दवाओं व उनके सिंथेटिक डेरिवेटिव की खपत पर व्यापक रिपोर्टिंग के लिए मजबूत तंत्र स्थापित करने को कहा गया।
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मुख्य सचिव ने जम्मू कश्मीर में खसखस और भांग के उत्पादन के साथ क्रास बार्डर परिवहन डेटा संकलित करने की आवश्यकता को रेखांकित किया, ताकि जम्मू कश्मीर में इन दवाओं और उनके सिंथेटिक डेरिवेटिव की उपस्थिति का आकलन किया जा सके। अफीम की अवैध खेती की रोकने के लिए आबकारी और कृषि विभागों के साथ एंटी नारकोटिक्स टास्क फोर्स (एएनटीएफ) मिलकर काम करे। इसमें अपेक्षित खेती क्षेत्रों का नक्शा बनाने और निजी व सरकारी भूमि पर अवैध फसल को नष्ट करने के लिए कार्रवाई की जाए। एएनटीएफ के अधिकारियों को अगले सीजन में ऐसी अवैध खेती रोकने के लिए एक कार्य योजना तैयार करने को कहा गया। उन्होंने नशीली दवाओं से निपटने के लिए एक बहुआयामी रणनीति तैयार करने पर जोर दिया। इसमें प्रवर्तन एजेंसियों का उचित प्रशिक्षण, दवा परीक्षण की क्षमता वृदि, अवैध उत्पादन और व्यापार का आकलन, जब्ती और नष्ट, आरोपी की गिरफ्तारी और सजा, पीड़ितों का परामर्श व पुनर्वास पर काम किया जाए। नशा और मादक पदार्थों के सेवन के पीड़ितों के परामर्श और पुनर्वास के लिए एक केंद्रित दृष्टिकोण को अपनाया जाए। जम्मू कश्मीर में नशे के इस खतरे को देखते हुए बड़े पैमाने पर निपटने की जरूरत है। संभागीय, जिला प्रशासन और अन्य हितधारकों को शामिल करके एक निर्धारित समय सीमा के भीतर ठोस, जमीनी स्तर पर बेहतर परिणाम देने वाली एक कार्य योजना तैयार करने के लिए एक उप समिति को गठन करने का निर्देश दिया। एएनटीएफ को नशे के खिलाफ जनता में जागरूकता को बढ़ावा देने पर जोर दिया गया। टास्क फोर्स को गैर सरकारी संगठनों, पंचायती राज संस्थाओं और स्वयंसेवकों के माध्यम से अवैध खेती, परिवहन, व्यापार और दवाओं व उनके सिंथेटिक डेरिवेटिव की खपत पर व्यापक रिपोर्टिंग के लिए मजबूत तंत्र स्थापित करने को कहा गया।
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