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नवरेह मिलन : विस्थापन के तीन दशक बाद अपनी माटी से जुड़ने घाटी आएंगे कश्मीरी पंडित

Wed, 07 Apr 2021 02:13 AM IST
दुष्यंत शर्मा बृजेश कुमार सिंह, जम्मू
बृजेश कुमार सिंह, जम्मू Published by: दुष्यंत शर्मा Updated Wed, 07 Apr 2021 02:13 AM IST
सार

  • पैतृक गांवों में पहुंचकर पुरानी यादों को सहेजने का पंडित समुदाय करेगा प्रयास
  • श्रीनगर में सामूहिक नवरेह मिलन के जरिये दूरियां मिटाने और मेलजोल बढ़ाने की होगी कोशिश
  • सबका सम्मान और सबकी सुरक्षा की दिशा में काम कर माहौल सुधारने में जुटेगा समुदाय

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Jammu kashmir News : After three decades of displacement Kashmiri Pandits will come to the Valley
मंदिर में पूजा-पाठ... - फोटो : अमर उजाला...

विस्तार

आतंकवाद के खौफ में घाटी से निकले कश्मीरी पंडितों ने विस्थापन के तीन दशक बाद अपनी माटी से जुड़ने का फैसला किया है। इसके तहत 50 से अधिक कश्मीरी पंडितों का जत्था दिल्ली से कश्मीर पहुंचेगा। पैतृक गांवों में पहुंचकर पुरानी स्मृतियों को सहेजेगा।

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नवरेह (नए वर्ष के पहले दिन) पर 13 अप्रैल को श्रीनगर में सामूहिक रूप से नवरेह मिलन के जरिये मुस्लिम समाज के साथ भी मेलजोल बढ़ाने की कोशिश होगी। कश्मीरी पंडितों का मानना है कि सबका सम्मान और सबकी सुरक्षा थीम पर दूरियां मिटाने और माहौल को बेहतर बनाने की कोशिश होगी। 
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दिल्ली में रहने वाले कश्मीरी पंडितों का जत्था आठ अप्रैल को बस से रवाना होगा। वे नौ अप्रैल को श्रीनगर पहुंचेंगे। जत्थे में शामिल लोग बारामुला, शोपियां, खीरभवानी, शेखपोरा तथा अन्य जगहों पर स्थित अपने पैतृक गांवों में भी जाएंगे ताकि अपनी माटी से जुड़ सकें। पुरानी यादों को ताजा किया जा सके। पड़ोसियों से मेलमिलाप बढ़ सके। नवरेह पर 13 अप्रैल को हरी पर्वत स्थित चक्रेश्वरी मंदिर में सामूहिक पूजन होगा।
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क्रालखुड इलाके में बर्बरशाह स्थित शीतलनाथ मंदिर में नवरेह मिलन कार्यक्रम के जरिये 30 साल पुरानी परंपरा को फिर से जीवित किया जाएगा। इसमें मुस्लिम समुदाय के लोगों के साथ भी परस्पर मिलकर घाटी में अमन-चैन की दुआ की जाएगी। साथ मिलकर भाईचारे के साथ रहने तथा पुराने दिनों की तरह सुख-दुख में साथ खड़े रहने का संकल्प लिया जाएगा। 

कश्मीरी पंडितों की संस्था रिकन्सिलिएशन, रिटर्न रिहेब्लिशन ऑफ माइग्रेंट्स की ओर से यह पहल की गई है। संस्था के चेयरमैन सतीश महालदार का कहना है कि विस्थापन के बाद से नवरेह के जरिये धार्मिक-सांस्कृतिक यादें भूल बिसर गई हैं। इन्हें पुनर्जीवित करने की कोशिश होगी। साथ ही आपसी भाईचारे को बढ़ाने की भी कोशिश होगी। इस आयोजन के जरिये ही पंडित समुदाय अपने गांवों से भी जुड़ने की कोशिश करेगा। 

सूफी परंपरा से भी अमन-शांति का दिया जाएगा पैगाम
नवरेह मिलन कार्यक्रम के लिए केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह, संघ के पूर्व प्रमुख मोहन भागवत, डा. कर्ण सिंह, डा. सुब्रह्मण्यम स्वामी समेत कई सांसदों व धर्मगुरुओं को न्योता दिया गया है। कार्यक्रम में जाने माने सूफी विशेषज्ञ गुलाम रसूल भी मौजूद रहेंगे। इससे सूफी परंपरा के जरिये घाटी में अमन-शांति का पैगाम पहुंचाने में मदद मिलेगी। 


सरकार की ओर से परिवहन सुविधा न मिलने से हैं नाराज
सतीश महालदार का कहना है कि प्रधानमंत्री कार्यालय ने जम्मू-कश्मीर सरकार को नवरेह पर परिवहन तथा अन्य सभी सुविधाएं मुहैया कराने को कहा था। मुख्य सचिव को इस बाबत पत्र भेजा था, लेकिन सरकार ने सुविधाएं देने से मना कर दिया। इस वजह से पंडित समुदाय स्वयं व्यवस्था कर घाटी में अमन-शांति के प्रयास करेगा।

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