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जम्मू-कश्मीर: हर साल होगी शराब ठेकों की नीलामी, डोमिसाइल धारक ही कर सकेगा आवेदन
Thu, 01 Apr 2021 10:30 AM IST
करिश्मा चिब
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जम्मू
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जम्मू
Published by: करिश्मा चिब
Updated Thu, 01 Apr 2021 10:30 AM IST
सार
- जम्मू-कश्मीर की नई आबकारी नीति लागू, एक व्यक्ति को एक ही लाइसेंस
- 600 रुपये तक की आईएमएफएल शराब के आयात पर प्रतिबंध
- सीएसडी पर सिविल की तुलना में 25 फीसदी कम लगेगा टैक्स
- अधिकतम दस फीसदी मुनाफा कमा सकेंगे होलसेल और रिटेलर
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विस्तार
जम्मू-कश्मीर में शराब की दुकान का लाइसेंस अब नीलामी से ही मिलेगा। हर साल लाइसेंस नीलाम होगा और सबसे अधिक बोली लगाने वाले को इसका ठेका मिलेगा। नीलामी में केवल जम्मू-कश्मीर डोमिसाइल प्रमाणपत्र धारक की आवेदन कर सकेंगे। सरकार ने बुधवार को वित्त वर्ष 2021-22 के लिए आबकारी नीति घोषित कर दी। यह नीति एक अप्रैल से 31 मार्च 2022 तक प्रभावी होगी। हालांकि मौजूदा लाइसेंस धारकों को एक माह तक उपलब्ध स्टॉक बेचने का समय दिया गया है।
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इसके बाद उन्हें लाइसेंस के लिए नीलामी में शामिल होना पड़ेगा। आठ मार्च को आबकारी विभाग ने ड्राफ्ट पॉलिसी तैयार की थी। सरकार ने इसी पर मुहर लगाई है। एक व्यक्ति को एक ही लाइसेंस मिलेगा। नई नीति में सीएसडी कैंटीन से बेची जाने वाली शराब पर सिविल की टैक्स दर की तुलना में 25 फीसदी कम कर लगाने का प्रावधान किया है। जम्मू-कश्मीर में इंडियन मेड फॉरेन लिकर (आईएमएफएल) निर्माताओं के हितों को देखते हुए प्रदेश में 600 रुपये तक के दाम वाली आईएमएफएल शराब के आयात पर प्रतिबंध लगाया गया है। शराब के होलसेल और रिटेल कारोबारी अधिकतम दस फीसदी मार्जिन पर सामान बेच सकेंगे।
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सरकार ने नई नीति में शराब की दुकानें नहीं बढ़ाई हैं। जिन जगहों पर मौजूदा दुकानें हैं, उन्हीं क्षेत्रों में दुकानें होंगी। हालांकि सरकार ने ड्राफ्ट पॉलिसी से पहले सुझाव मांगे थे। लेकिन सरकार ने सुझाव को दरकिनार करते हुए ड्राफ्ट पॉलिसी को ही लागू किया है। नई पॉलिसी के तहत हर साल लाइसेंस निलाम होगा। आवेदन के लिए 25 हजार रुपये जबकि लाइसेंस मिलने पर के लिए पांच लाख रुपये जमा कराने होंगे, जो वापस नहीं होंगे। एक महीने तक दुकानों की नीलामी की प्रक्रिया होगी। ई-ऑक्शन से नीलामी होगी। पर्यटन स्थलों पर भी दुकानें खुलेंगी।
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दुकानदारों का विरोध काम नहीं आया
पिछले कई दिनों से जम्मू-कश्मीर ट्रेड वाइन एसोसिएशन मांग कर रही थी कि ड्रॉफ्ट पॉलिसी में बदलाव किया जाए। लेकिन सरकार ने इसमें कोई बदलाव नहीं किया है। इससे मौजूदा 219 दुकानदारों को झटका लगा है। दुकानदारों ने कहा है कि वह अपने विरोध को जारी रखेंगे।
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एक महीने बाद स्वत: ही रद्द हो जाएगा मौजूदा लाइसेंस
सरकार ने नई पॉलिसी लागू करने के साथ ही पुरानी पॉलिसी की मियाद को भी एक महीने तक बढ़ा दिया है। एक महीने तक मौजूदा शराब की दुकानों का लाइसेंस रखने वाले शराब बेच सकेंगे। इसके लिए उन्हें पिछली पॉलिसी के तहत लाइसेंस रिन्यू शुल्क देना होगा। एक महीने के बाद स्वत: ही लाइसेंस रद्द माना जाएगा।
एक माह बाद ही होगा लाइसेंस आवंटन
नई पॉलिसी को लागू करने में एक महीने का समय लगेगा। लाइसेंस की नीलामी की जाएगी। इस दौरान दुकानों में पड़ा स्टॉक बिक सकेगा और शराब के उपभोक्ताआें को भी परेशानी नहीं होगी।
सामाजिक दायित्व शुल्क लगेगा
शराब के लाइसेंस छह अलग-अलग श्रेणी में दिए जाएंगे। लाइसेंस धारकों को सामाजिक दायित्व के तहत हर माह निर्धारित शुल्क देना होगा। ए श्रेणी के लिए 1500 रुपये, बी के लिए 1000 रुपये, सी,डी और ई के लिए 2500 और एफ श्रेणी के लिए 3000 रुपये प्रतिमाह शुल्क रखा गया है। इतना ही शुल्क सरकार देगी जिसे नशे के दुष्प्रभाव से जुड़ी जागरूकता, एंबुलेंस, खेल समेत अन्य मानव उत्थान गतिविधियों पर खर्च किया जाएगा।