अब चैन की नींद सो सकेंगे अनिद्रा के शिकार कैदी, जेल प्रशासन ने शुरू की संज्ञानात्मक व्यवहार थेरेपी
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
जम्मू-कश्मीर के कारागारों में बंद कैदियों में अनिद्रा की समस्या के साथ उनके व्यवहार में बदलाव के चलते जेल विभाग ने संज्ञानात्मक व्यवहार थेरेपी शुरू की है। जम्मू विश्वविद्यालय के मनोविज्ञान विभाग के साथ मिलकर जेल प्रशासन कैदियों को यह थेरेपी दे रहा है। यह जानकारी जेल विभाग के डीजी वीके सिंह ने दी।
यह भी पढ़ें- सोपोर हमलाः बाबा के शव पर बैठ रो रहा था बच्चा, जवानों ने ऐसे बचाई मासूम की जान
डीजी ने बताया कि अंबफला जिला जेल के 60 कैदियों में अनिद्रा की शिकायत पाई गई है। इनमें छह महिला कैदी भी शामिल हैं। इन सभी कैदियों को थेरेपी दी गई है। ये सभी कैदी बस तीन घंटे ही सो पा रहे थे। इसकी वजह से इनको कई तरह की परेशानियां आ रही हैं। इन्हें दूर करने के लिए ऐसा किया गया है।
सिंह ने बताया कि जेल विभाग कैदियों के सुधार के लिए प्रयासरत है। जल्दी ही इसी तरह की थेरेपी प्रदेश की अन्य जेलों में भी दी जाएगी। जुलाई महीने में इसे शुरू किया जाएगा। कहा कि अनिद्रा की वजह से कैदियों में कई बीमारियां हो सकती हैं। इससे उनका स्वभाव बदल सकता है। वह आक्रोशित होने के साथ ही तनाव में रहते हैं। चिड़चिड़ा होना और खुदकुशी तक के ख्याल अनिद्रा की वजह से पैदा हो सकते हैं।
अनिद्रा से गंभीर दिक्कतों से होते हैं दो-चार
जम्मू विश्वविद्यालाय के मनोविज्ञान विभाग की एचओडी डॉ. आरती बख्शी और महिला कॉलेज परेड की सहायक प्रोफेसर पयाली अरोड़ा ने कैदियों को थेरेपी दी। इन्होंने बताया कि अनिद्रा गंभीर बीमारियों को लेकर सामने आती है। एक व्यक्ति को नींद पूरी करनी ही चाहिए। अनिद्रा की वजह से लंबे समय में व्यक्ति को कई तरह की दिक्कतों का सामना करना पड़ता है।
कोविड का कोई मामला नहीं
डीजी ने कहा कि जम्मू-कश्मीर की 14 जेलों में बंद 3628 कैदियों में कोविड-19 का एक भी मामला नहीं है। अधिकारियों द्वारा उठाए गए एहतियाती कदमों के कारण ऐसा हो सका है। इस समय 150 नए कैदी जेल परिसरों में 14 दिन के क्वारंटीन में हैं। उन्होंने बताया कि जेल कर्मियों में भी कोराना का कोई मामला नहीं आया है। प्रदेश की जेलों की क्षमता 3232 कैदी रखने की है।