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जम्मू-कश्मीर: राष्ट्रीय अखंडता के हित में पूरे देश के लिए होना चाहिए एक कानून: भीम सिंह
Wed, 09 Jan 2019 01:53 PM IST
Pranjal Dixit
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जम्मू
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जम्मू
Published by: Pranjal Dixit
Updated Wed, 09 Jan 2019 01:53 PM IST
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भीम सिंह
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जम्मू-कश्मीर नेशनल पैंथर्स पार्टी के मुख्य संरक्षक एवं सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन के वरिष्ठ कार्यकारी सदस्य प्रो. भीम सिंह ने राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद से आग्रह किया कि वे राज्य के लिए भारतीय संविधान के तहत प्राप्त शक्तियों का इस्तेमाल करें। उन्होंने कहा कि भारत के राष्ट्रपति ही एकमात्र संवैधानिक प्रमुख हैं और उन्हीं को जेएंडके के सम्बंध में भारतीय संविधान के अनुच्छेद 370 के तहत संवैधानिक समस्याओं को हल करने का शक्ति है।
प्रो. भीम सिंह ने कहा कि मई 1954 में राष्ट्रपति ने ही अपनी शक्ति का प्रयोग करते हुए अनुच्छेद 35 में ए जोड़ा था। इसी प्रकार भारत के राष्ट्रपति एकमात्र सक्षम अधिकारी हैं जो जम्मू-कश्मीर में लोकतंत्र व कानून के शासन पर किसी भी नए बदलाव को लागू करने में सक्षम हैं। पहले जेएंडके विधानसभा की अवधि पांच वर्ष थी लेकिन जब लोकसभा की अवधि को छह साल किया गया।
जम्मू-कश्मीर सरकार ने भी भारतीय संसद का अनुसरण करते हुए विधानसभा की अवधि छह वर्ष कर दी है। 1977 में इस फैसले को वापस लेते हुए संसद और राज्य विधानसभाओं की अवधि पांच साल की। उन्होंने राष्ट्रपति से आग्रह किया कि वे भारतीय संविधान के अनुच्छेद 370 के तहत अपनी निहित शक्ति का प्रयोग करते हुए भारत की अन्य विधानसभाओं की तरह जम्मू-कश्मीर विधानसभा का कार्यकाल पांच वर्ष किया जाए। साथ ही संवैधानिक दस्तावेज तैयार करने के लिए भारत के अटॉर्नी जनरल की अध्यक्षता में एक समिति का गठन किया जाए। राष्ट्रीय अखंडता के हित में पूरे देश के लिए एक कानून होना चाहिए।
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प्रो. भीम सिंह ने कहा कि मई 1954 में राष्ट्रपति ने ही अपनी शक्ति का प्रयोग करते हुए अनुच्छेद 35 में ए जोड़ा था। इसी प्रकार भारत के राष्ट्रपति एकमात्र सक्षम अधिकारी हैं जो जम्मू-कश्मीर में लोकतंत्र व कानून के शासन पर किसी भी नए बदलाव को लागू करने में सक्षम हैं। पहले जेएंडके विधानसभा की अवधि पांच वर्ष थी लेकिन जब लोकसभा की अवधि को छह साल किया गया।
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जम्मू-कश्मीर सरकार ने भी भारतीय संसद का अनुसरण करते हुए विधानसभा की अवधि छह वर्ष कर दी है। 1977 में इस फैसले को वापस लेते हुए संसद और राज्य विधानसभाओं की अवधि पांच साल की। उन्होंने राष्ट्रपति से आग्रह किया कि वे भारतीय संविधान के अनुच्छेद 370 के तहत अपनी निहित शक्ति का प्रयोग करते हुए भारत की अन्य विधानसभाओं की तरह जम्मू-कश्मीर विधानसभा का कार्यकाल पांच वर्ष किया जाए। साथ ही संवैधानिक दस्तावेज तैयार करने के लिए भारत के अटॉर्नी जनरल की अध्यक्षता में एक समिति का गठन किया जाए। राष्ट्रीय अखंडता के हित में पूरे देश के लिए एक कानून होना चाहिए।
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