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जम्मू-कश्मीर में दरबार के साथ मूव होने वाला हाईकोर्ट का रिकॉर्ड होगा ऑनलाइन
Tue, 07 Jan 2020 04:05 PM IST
Pranjal Dixit
अजय मीनिया, जम्मू
अजय मीनिया, जम्मू
Published by: Pranjal Dixit
Updated Tue, 07 Jan 2020 04:05 PM IST
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केंद्र शासित जम्मू कश्मीर और लद्दाख हाईकोर्ट का दरबार के साथ मूव होने वाला आधिकारिक रिकार्ड अब मूव नहीं होगा। इस रिकॉर्ड का डिजिटलीकरण किया जा रहा है। हाईकोर्ट ने निजी कंपनी से इस संबंध में ब्योरा मांगा है। हाईकोर्ट ने अपनी तमाम जरूरतों को बताया है। अब इच्छुक कंपनियां हाईकोर्ट के सामने प्रस्ताव बनाकर पेश करेंगी। कम से कम पांच साल तक इसके रखरखाव और तकनीकी खामियों को दूर करने की जिम्मेदारी भी उस कंपनी की होगी, जो रिकॉर्ड डिजिटाइज करेगी।
जानकारी के अनुसार जब भी दरबार मूव होता है तो हाईकोर्ट के विभिन्न सेक्शनों का रिकॉर्ड भी मूव करना पड़ता है। यह रिकॉर्ड पेपर पर है और फाइलों में मौजूद है। इन फाइलों को हर छह महीने के बाद जम्मू से अप्रैल और श्रीनगर से अक्तूबर के महीने में मूव करना पड़ता है। करीब 15 लाख पन्नों में यह रिकॉर्ड मौजूद है।
इस रिकॉर्ड को मूव करने पर हाईकोर्ट का खर्च भी होता है। साथ ही कई बार रिकॉर्ड फट भी जाता है। वहीं जिस दौरान रिकॉर्ड इधर से उधर किया जाता है उस समय हाईकोर्ट का काम भी धीरे चलता है। हाईकोर्ट के रजिस्ट्रार की तरफ से निजी कंपनियों को इस संबंध में प्रस्ताव लेकर आने का न्योता दिया गया है।
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जानकारी के अनुसार जब भी दरबार मूव होता है तो हाईकोर्ट के विभिन्न सेक्शनों का रिकॉर्ड भी मूव करना पड़ता है। यह रिकॉर्ड पेपर पर है और फाइलों में मौजूद है। इन फाइलों को हर छह महीने के बाद जम्मू से अप्रैल और श्रीनगर से अक्तूबर के महीने में मूव करना पड़ता है। करीब 15 लाख पन्नों में यह रिकॉर्ड मौजूद है।
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इस रिकॉर्ड को मूव करने पर हाईकोर्ट का खर्च भी होता है। साथ ही कई बार रिकॉर्ड फट भी जाता है। वहीं जिस दौरान रिकॉर्ड इधर से उधर किया जाता है उस समय हाईकोर्ट का काम भी धीरे चलता है। हाईकोर्ट के रजिस्ट्रार की तरफ से निजी कंपनियों को इस संबंध में प्रस्ताव लेकर आने का न्योता दिया गया है।
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यह होगा लाभ
हाईकोर्ट का रिकॉर्ड ऑनलाइन होगा। यूजर हाईकोर्ट और देश के किसी भी कोने में बैठ कर एक सर्च पर फाइल को ढूंढ़ सकेंगे। इससे यूजर को काम करने में मदद होगी। वहीं हाईकोर्ट का रिकॉर्ड सुरक्षित भी रहेगा। इस रिकॉर्ड को स्कैन करके रखा जाएगा।
सीसीटीवी की निगरानी में रहेगा रिकॉर्ड
जो कंपनी इसका रिकॉर्ड डिजिटाइज करेगी। वो इस सिस्टम को सीसीटीवी की निगरानी में रखेगी। कम से कम एक महीने का रिकॉर्ड रखना होगा। जिसे जब चाहे हाईकोर्ट जरूरत पड़ने पर देख सके।
हाईकोर्ट का रिकॉर्ड ऑनलाइन होगा। यूजर हाईकोर्ट और देश के किसी भी कोने में बैठ कर एक सर्च पर फाइल को ढूंढ़ सकेंगे। इससे यूजर को काम करने में मदद होगी। वहीं हाईकोर्ट का रिकॉर्ड सुरक्षित भी रहेगा। इस रिकॉर्ड को स्कैन करके रखा जाएगा।
सीसीटीवी की निगरानी में रहेगा रिकॉर्ड
जो कंपनी इसका रिकॉर्ड डिजिटाइज करेगी। वो इस सिस्टम को सीसीटीवी की निगरानी में रखेगी। कम से कम एक महीने का रिकॉर्ड रखना होगा। जिसे जब चाहे हाईकोर्ट जरूरत पड़ने पर देख सके।