फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Jammu and Kashmir ›   Jammu News ›   Jammu Kashmir High Court: Officers cannot take back the reservation certificate without hearing the side

जम्मू-कश्मीर और लद्दाख हाईकोर्ट का निर्देश: संबंधित व्यक्ति का पक्ष सुने बिना आरक्षण प्रमाण पत्र वापस नहीं ले सकते अफसर

Fri, 22 Apr 2022 07:47 AM IST
विमल शर्मा अमर उजाला नेटवर्क, श्रीनगर
अमर उजाला नेटवर्क, श्रीनगर Published by: विमल शर्मा Updated Fri, 22 Apr 2022 07:47 AM IST
सार

हाई कोर्ट ने एसआई इरफान का प्रमाण पत्र रद्द करने का अनंतनाग डीसी का आदेश किया रद्द। कहा-जम्मू-कश्मीर पुलिस का एसआई प्रमाण पत्र से मिलने वाले सभी लाभ लेने का हकदार। 
 

विज्ञापन
Jammu Kashmir High Court: Officers cannot take back the reservation certificate without hearing the side
highcourt srinagar - फोटो : फाइल

विस्तार

जम्मू-कश्मीर और लद्दाख उच्च न्यायालय ने वीरवार को कहा कि अधिकारी संबंधित व्यक्ति को सुने बिना आरक्षण प्रमाण पत्र वापस नहीं ले सकते। इसके साथ ही उन्होंने जम्मू-कश्मीर पुलिस के उप निरीक्षक इरफान अहमद खान गुज्जर के खिलाफ जाति प्रमाण पत्र रद्द करने के अनंतनाग उपायुक्त के आदेश को खारिज कर दिया। साथ ही यह भी स्पष्ट किया कि खान प्रमाण पत्र के आधार पर मिलने वाले सभी लाभ का अधिकारी है। 

विज्ञापन

प्रमाणिकता रिपोर्ट लंबित होने के कारण उन्हें नियुक्त नहीं किया गया

न्यायमूर्ति संजीव कुमार की एक सदस्यीय पीठ वीरवार को एसआई इरफान अहमद खान गुज्जर की याचिका पर सुनवाई कर रही थी। वर्ष 2016 में  खान को उप निरीक्षक के रूप में अनुसूचित जनजाति (एसटी) की आरक्षित श्रेणी के तहत चुना गया था, लेकिन प्रमाण पत्र की प्रमाणिकता रिपोर्ट लंबित होने के कारण उन्हें नियुक्त नहीं किया गया।

विज्ञापन


अधिकारियों ने अपनी आपत्तियों में कहा कि अतिरिक्त जिला मजिस्ट्रेट (एडीएम), बिजबिहाड़ा (अनंतनाग) द्वारा जांच करने के बाद मई 2019 में उपायुक्त अनंतनाग ने इरफान अहमद खान गुज्जर के पक्ष में जारी एसटी श्रेणी प्रमाण पत्र को रद्द कर दिया। इसके कारण उसकी नियुक्ति का आदेश नहीं जारी किया गया।
विज्ञापन
विज्ञापन


इरफान अहमद के कुछ भाइयों का चयन सामान श्रेणी के शिक्षकों की सूची में किया जा चुका था।कोर्ट ने सुनवाई के दौरान कहा कि एक बार किसी व्यक्ति के पक्ष में सक्षम प्राधिकारी द्वारा आरक्षित श्रेणी का प्रमाण पत्र जारी किए जाने के बाद, इसे केवल अपीलीय प्राधिकारी द्वारा (अनुसूचित जनजाति श्रेणी) की धारा 18 के तहत प्रदत्त शक्तियों के प्रयोग के बाद वापस लिया जा सकता है।

इस तरह की शक्ति का प्रयोग संबंधित व्यक्ति को सुनवाई का उचित अवसर देने के बाद ही किया जा सकता है। इस मामले में उपायुक्त द्वारा पारित आदेश 2004 के अधिनियम की धारा 18 के दायरे में आता है। उपायुक्त का आदेश धारा 18 से जुड़े प्रावधान का उल्लंघन है। 

किसी शिकायत पर कार्रवाई का मौका उपलब्ध

हालांकि अदालत ने कहा कि 2004 के अधिनियम और उसके तहत बनाए गए नियमों के तहत अपीलीय प्राधिकारी के लिए मौका रहेगा कि वह अधिनियम की धारा 18 के तहत या तो स्वप्रेरणा से या गुर्जर समुदाय के वास्तविक सदस्य सहित किसी भी पीड़ित व्यक्ति द्वारा किए गए आवेदन पर कार्रवाई करे।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed