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जम्मू-कश्मीर हाईकोर्ट: दिव्यांग जनों के लिए वही शब्द प्रयोग में लाएं जो अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्य

Wed, 07 Dec 2022 05:09 PM IST
kumar गुलशन कुमार अमर उजाला नेटवर्क, जम्मू
अमर उजाला नेटवर्क, जम्मू Published by: kumar गुलशन कुमार Updated Wed, 07 Dec 2022 05:09 PM IST
सार

मुख्य न्यायाधीश अली मोहम्मद माग्रे और न्यायाधीश राहुल भारती की खंडपीठ ने कहा, इस मुद्दे पर सरकार और समाज को अपेक्षाओं के अनुरूप काम करना होगा।

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Jammu Kashmir High Court directs Use the same word for disabled people which is recognized internationally
highcourt srinagar - फोटो : फाइल

विस्तार

जम्मू-कश्मीर और लद्दाख हाईकोर्ट ने कहा कि दिव्यांगजनों के लिए वही शब्द इस्तेमाल किए जाएं, जो अंतरराष्ट्रीय मंच पर मान्य हैं। इसके अलावा दिव्यांगजनों के लिए तमाम सरकारी परिसरों में आसान पहुंच के लिए जरूरी व्यवस्थाएं सुनिश्चित की जाएं ताकि विशेष रूप से सक्षम इस वर्ग को कोई परेशानी न उठानी पड़े। साथ ही प्रदेश और केंद्र सरकार से इस मामले में दो सप्ताह में जवाब तलब किया।

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याचिकाकर्ता बदरुल दूजा ने कोर्ट में इस मुद्दे को उठाते हुए कहा, अभी भी दिव्यांगों के लिए किसी न किसी रूप में ऐसे शब्दों का प्रयोग किया जा रहा है, जो उन्हें अक्षम और समाज पर बोझ होने का अहसास करवाते हैं। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बाकायदा इस वर्ग के लिए विशेष रूप से सक्षम शब्द का प्रयोग मान्य है। दूजा ने कोर्ट से मांग करते हुए कहा, सरकार को उन कानूनों में भी संशोधन करने के निर्देश देने चाहिएं, जहां बदलाव की जरूरत है।
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जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए मुख्य न्यायाधीश अली मोहम्मद माग्रे और न्यायाधीश राहुल भारती की खंडपीठ ने कहा, इस मुद्दे पर सरकार और समाज को अपेक्षाओं के अनुरूप काम करना होगा। खंडपीठ ने प्रदेश और केंद्र सरकार से दो सप्ताह में जवाब भी तलब किया। खंडपीठ ने कहा, न्यायिक आदेश, अधिसूचना, सर्कुलर, समाचार पत्रों, पाठ्यपुस्तकों, अदालती आदेशों या किसी भी तरह की आधिकारिक सूचनाओं में विशेष रूप से सक्षम वर्ग के लिए अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्य शब्दों का भी प्रयोग किया जाए। खंडपीठ ने कहा, जिन सरकारी परिसरों में रैंप, लिफ्ट और दिव्यांगजनों के अनुकूल शौचालय व अन्य सुविधाएं नहीं हैं, वहां पर सुविधाओं को जल्द सुनिश्चित किया जाए।

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