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जम्मू-कश्मीर: सैन्य अभ्यास के दौरान कमदीनी गांव में गिरे दो गोले, बड़ा हादसा टला
Thu, 09 Feb 2023 11:10 PM IST
विमल शर्मा
अमर उजाला नेटवर्क, जम्मू
अमर उजाला नेटवर्क, जम्मू
Published by: विमल शर्मा
Updated Thu, 09 Feb 2023 11:10 PM IST
सार
स्थानीय लोगों ने बताया कि जिस जगह पर गोला गिरा उसके पास ही स्कूल है। सूचना पर सेना और पुलिस के अधिकारी मौके पर पहुंच गए। उन्होंने गोले को कब्जे में ले लिया।
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- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
जम्मू के कलीठ फील्ड फॉयरिंग रेंज में गुरुवार को सैन्य अभ्यास के दौरान दो गोले खौड़ उपजिले की नाथल पंचायत के कमदीनी गांव में गिरे। यह गोले जहां गिरे वहां से मात्र 50 मीटर दूरी पर घर और कमदीनी हाई स्कूल है। एक गोला स्कूल की इमारत के आगे और एक पीछे गिरा है। इससे कोई नुकसान तो नहीं हुआ, लेकिन गोले गिरने के बाद ग्रामीण दहशत में हैं। बाद में पुलिस और सेना ने मौके पर पहुंच कर स्थिति का जायजा लिया है।
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नाथल पंचायत के सरपंच धनी राम शर्मा ने बताया कि भगवान की कृपा से बड़ा हादसा टल गया है। गोले गिरने के समय ग्रामीण मवेशियों के लिए चारे का प्रबंध कर रहे थे और स्कूल में पढ़ाई चल रही थी। घटना के बाद ग्रामीणों ने सरपंच के नेतृत्व में पंचायत घर में सेना और प्रशासन के खिलाफ रोष जताया है। सरपंच ने बताया कि ऐसा पहली बार नही हुआ है। इससे 15 सितंबर 2018 और 2019 में भी सैन्य अभ्यास के दौरान गोले गांव में गिरे थे, जिसमें कई मवेशियों की मौत हो गई थी।
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बोध राज शर्मा, अश्वनी कुमार, अजीत राज और जोगेंद्र पाल आदि ने बताया कि सेना और प्रशासन ने पंचायत को कलीठ फील्ड फॉयरिंग रेंज से बाहर रखा है तो यह गोले गांव में नहीं गिरने चाहिए। 2014 से पहले हमें फील्ड फॉयरिंग रेंज का मुआवजा मिलता था। जब भी फायरिंग रेंज में अभ्यास होता था तो ग्रामीणों को घरों से बाहर नहीं निकलने का संदेश दिया जाता था।
कामकाज बंद होने की सूरत में मुआवजा दिया जाता था। इसके बाद सरकार ने फॉयरिंग रेंज को बंद कर दिया था, लेकिन 2017 से फिर शुरू किया गया है। अब लोगों को अभ्यास से पहले सूचित भी नहीं किया जाता है। प्रशासनिक अधिकारियों को कई बार समस्या से अवगत करवा चुके हैं। अगर गांव रेंज से बाहर है तो गोले यहां नहीं गिरने चाहिए। ग्रामीणों में दहशत है। प्रशासन और सरकार से अपील है कि फॉयरिंग रेंज को बंद कर दिया जाए।