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जम्मू-कश्मीर के पूर्व वित्तमंत्री डॉ. हसीब द्राबू ने छोड़ी पीडीपी, पार्टी प्रमुख महबूबा को भेजा पत्र
न्यूज़ डेस्क, अमर उजाला, जम्मू
Updated Thu, 06 Dec 2018 08:53 PM IST
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डॉ. हसीब द्राबू
- फोटो : फाइल
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जम्मू-कश्मीर के कद्दावर नेता और पूर्व वित्तमंत्री डॉ. हसीब द्राबू ने गुरुवार को अंतत: पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी (पीडीपी) से नाता तोड़ लिया। उन्होंने पार्टी प्रमुख महबूबा मुफ्ती को अपना इस्तीफा भेज दिया है। सरकार गिरने के बाद भारी अंतर्विरोधों से जूझ रही पार्टी को इससे तगड़ा झटका लगा है। द्राबू ने स्वयं ट्वीट कर अपने इस्तीफे की जानकारी दी।
मंत्री पद से हटाए जाने के बाद से द्राबू पार्टी से नाराज चल रहे थे। हालांकि, उन्होंने अपने पत्र में इसका कोई जिक्र नहीं किया है। लेकिन माना जा रहा है कि पार्टी में उपेक्षा से क्षुब्ध होकर उन्होंने यह फैसला लिया है। पत्र में उन्होंने लिखा है कि विधानसभा भंग होने के साथ ही उनकी सदस्यता समय से पहले से खत्म हो गई। राज्यपाल के इस निर्णय के समय व तरीके से वह सहमत नहीं थे। इससे लोकतांत्रिक व्यवस्था को किसी प्रकार का लाभ नहीं होने वाला। इसलिए अब समय आ गया है कि वह पार्टी को अलविदा कहें।
मतभेद नहीं, दो साल पहले ही सौंपा था त्यागपत्र
पत्र में उन्होंने कहा कि उनका कोई मतभेद नहीं है। वह जानती हैं कि दो साल पहले ही उन्होंने कैबिनेट, विधानसभा तथा पार्टी से इस्तीफा दे दिया था, जिसे स्वीकार नहीं किया गया। उन्होंने पार्टी की गतिविधियों से भी किनारा कर लिया था। उन्होंने कहा कि वह इसे नैतिक रूप से गलत मान रहे थे कि जिस पार्टी के बैनर तले उन्होंने चुनाव लड़ा उसे छोड़ दिया जाए। लेकिन अब सब कुछ खत्म है इस वजह से वे पार्टी से इस्तीफा दे रहे हैं।
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मंत्री पद से हटाए जाने के बाद से द्राबू पार्टी से नाराज चल रहे थे। हालांकि, उन्होंने अपने पत्र में इसका कोई जिक्र नहीं किया है। लेकिन माना जा रहा है कि पार्टी में उपेक्षा से क्षुब्ध होकर उन्होंने यह फैसला लिया है। पत्र में उन्होंने लिखा है कि विधानसभा भंग होने के साथ ही उनकी सदस्यता समय से पहले से खत्म हो गई। राज्यपाल के इस निर्णय के समय व तरीके से वह सहमत नहीं थे। इससे लोकतांत्रिक व्यवस्था को किसी प्रकार का लाभ नहीं होने वाला। इसलिए अब समय आ गया है कि वह पार्टी को अलविदा कहें।
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मतभेद नहीं, दो साल पहले ही सौंपा था त्यागपत्र
पत्र में उन्होंने कहा कि उनका कोई मतभेद नहीं है। वह जानती हैं कि दो साल पहले ही उन्होंने कैबिनेट, विधानसभा तथा पार्टी से इस्तीफा दे दिया था, जिसे स्वीकार नहीं किया गया। उन्होंने पार्टी की गतिविधियों से भी किनारा कर लिया था। उन्होंने कहा कि वह इसे नैतिक रूप से गलत मान रहे थे कि जिस पार्टी के बैनर तले उन्होंने चुनाव लड़ा उसे छोड़ दिया जाए। लेकिन अब सब कुछ खत्म है इस वजह से वे पार्टी से इस्तीफा दे रहे हैं।
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पीडीपी में साढ़े चार साल का सफर
द्राबू ने कहा कि पीडीपी में शामिल हुए उन्हें साढ़े चार साल हो गए। राजनीति में आने के बाद उन्होंने पार्टी के बैनर व विचारधारा के तले चुनाव लड़ा। विधायक बना और फिर कैबिनेट में शामिल कर लिया गया। इतने छोटे समय में उन्होंने राजनीति के हर रंग देखे। इस यात्रा में उतार-चढ़ाव, प्रशंसा व आलोचना, उत्साह व निराशा, सहमति व असहमति देखने को मिले।
मुफ्ती लाए थे राजनीति में
मुफ्ती साहब को याद करते हुए कहा कि वे ही राजनीति में लाए। उनके साथ काम करने का सौभाग्य प्राप्त हुआ। विश्वास है कि भाजपा के साथ मुफ्ती साहब के गठबंधन का फैसले की समीक्षा होगी तब उस समय की परिस्थितियों व जटिलताओं का भी ख्याल रखा जाएगा जिसमें यह फैसला किया गया।
अभी और कई दे सकते हैं इस्तीफा
पीडीपी में गंभीर संकट चल रहा है। सरकार गिरने के बाद से कई नेता असंतुष्ट हैं। खासकर पीडीपी प्रमुख महबूबा मुफ्ती की कार्यप्रणाली से। पूर्व मंत्री इमरान अंसारी खुलेआम पीपुल्स कांफ्रेंस के साथ हैं। माना जा रहा है कि आने वाले कुछ दिनों में और कई असंतुष्ट पार्टी से किनारा कस सकते हैं।
मुफ्ती लाए थे राजनीति में
मुफ्ती साहब को याद करते हुए कहा कि वे ही राजनीति में लाए। उनके साथ काम करने का सौभाग्य प्राप्त हुआ। विश्वास है कि भाजपा के साथ मुफ्ती साहब के गठबंधन का फैसले की समीक्षा होगी तब उस समय की परिस्थितियों व जटिलताओं का भी ख्याल रखा जाएगा जिसमें यह फैसला किया गया।
अभी और कई दे सकते हैं इस्तीफा
पीडीपी में गंभीर संकट चल रहा है। सरकार गिरने के बाद से कई नेता असंतुष्ट हैं। खासकर पीडीपी प्रमुख महबूबा मुफ्ती की कार्यप्रणाली से। पूर्व मंत्री इमरान अंसारी खुलेआम पीपुल्स कांफ्रेंस के साथ हैं। माना जा रहा है कि आने वाले कुछ दिनों में और कई असंतुष्ट पार्टी से किनारा कस सकते हैं।